एसिड अटैक: आंतरिक सौंदर्य से वह भरी है, आत्मबल से वह आसमां जितनी बड़ी है

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हर स्त्री की यही कहानी है.होठों पर दर्द आंखों में पानी है.मिलते हैं हर मोड़ पर हमदर्द उनको किसी की आंखों में आग वासना कि…तो किसी के हाथों में इंकार पर तेजाबी पानी है.

आज लखनऊ के गोमती नगर अम्बेडकर पार्क के सामने सिरोज कैफे जाना हुआ.जिसे एसिड अटैक से पीड़ित लड़कियों द्वारा संचालित किया जाता है.

मैं इनकी कहानी तो नहीं जानती मगर तय है कि कोई सिरफिरा कुंठित व्यक्ति अपने एकतरफा चाह में इनके इंकार पर चेहरा विभत्स करने पर उतर आया. ऐसे पुरुषों की घृणित सोच होती है कि मेरी नहीं तो किसी और की नहीं.और वह ऐसा घृणित कार्य कर जाते हैं.
बहरहाल इनसे मिलकर अच्छा लगा.

इनका बाहरी रूप चाहे जैसा हो…मगर आंतरिक रूप से यह बेहद खूबसूरत लगीं.इनके कोमल मुस्कान के पीछे एक दर्द भरी कहानी छुपी है. मगर यह सब भुलाकर जीवन को नये सिरे से जी रही हैं.

शीरोज कैफे की एक एसिड अटैक फाइटर ने कही ये बात:

इंसान के चेहरे पर एक पिंपल होता है तो वो परेशान हो जाते हैं। यहां एक 20 रुपए की बोतल से हम लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी जाती हैं, लेकिन फिर भी आज हम खुश हैं। अपने पैरों पर खड़े हैं। जब हम घर में रहते है तो लगता है सिर्फ हमारे साथ एसिड अटैक हुआ है। जिसकी वजह से हमें अकेलापन और डिप्रेशन महसूस होता है। लेकिन, यहां सबको देखकर और मिलकर काम करने से साहस मिलता है।

कैफे के बाहर एसिड अटैक महिलाओं की फोटोज लगी है, जिससे कभी-कभी लोगों को लगता है ये कोई हॉस्पिटल है। इस पर एक महिला कहती है, ‘हम ऐसे लोगों से बात करते हैं, उन्हें अपने रेस्टोरेंट के बारे में बताते हैं। अंदर बुलाते हैं। उन्हें यहां आकर हमारी स्टोरी सुनकर बहुत अच्छा लगता है। वो अपने दूसरे दोस्तों को भी यहां आने के लिए कहते हैं।

में अपने शब्दों में कहना चाहूंगी कि

कुरूप नहीं रूपवान है, ऐ पीड़िता तू महान है।

-सोनिका मौर्या-

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