उदण्ड, बदजुबान, निर्लज्ज, बत्तमीज, चिरकुट बाबा रामदेव की बेहयाई, पत्रकार से बात करने की तमीज नही आयी

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नाम रामदेव, बात झुठामदेव, जनता को बरगलामदेव् !

2014 से पहले 35 रुपये में पेट्रोल दिलाने वाले योग गुरु,अब 107 रुपये लीटर होने पर थेथरई बतिया रहे हैं

कभी तेल पर अर्थशास्त्र समझाते थें, अब ज्यादा कमाने की दे रहें नसीहत

-विनय मौर्या-

वाराणसी। कहने को वो तो योग गुरु हैं मगर दुर्योग यह है कि वह योग का उपयोग कभी-कभार अपनी राजनीतिक क्षुदा शांत करने के लिये भी करते आ रहे हैं। यहाँ तक कि वर्तमान सत्ताधारी पार्टी जब सत्ता में नहीं थी तब उसका सपोर्ट करने के लिये जनता को महंगाई से निजात दिलाने की बात करते थें। वह 2014 से पहले टीवी चैनल के डिबेट में सीधे दर्शकों से पूछते थें की आप पैंतीस रुपये लीटर पेट्रोल दिलाने वाले को वोट दोगे या पिछत्तर अस्सी रुपये लीटर वालों को..? वह बोलते थें की इतना अर्थशास्त्र तो मैंने भी पढ़ा है। दिलाएगा उसको वोट देंगे कि 75-80 रुपये देनेवालों को? वह यहीं पर नहीं रुकते वह आगे कहते हैं कि अच्छा आज आपको गैस सिलिंडर बिना सब्सिडी के 1200 रुपये और सब्सिडी के साथ सवा चार सौ का मिलता है, यदि गैस सिलेंडर 300 रुपये में या 400 रुपये में मिलेगा, उसको वोट करोगे या 1200 रुपये वालों को। उस टीवी शो में शामिल दर्शकों ने उस वक्त तालियां बजाकर उनका समर्थन किया था।

उन्होंने उस समय यह भी कहा था कि पांच साल इतना पैसा आ जायेगा कि गरीबों के खाते भी खुलवा देंगे उनमें पैसे भी डलवा देंगे। इन सब मुंगेरी लाल के हसीन सपनों के सौदागर का नाम है रामदेव।

आज उसी योग गुरु रामदेव के मनमुताबिक पार्टी सत्ता में है। मगर उस समय बड़े बड़े दावे करने वाले रामदेव अब कुतर्कदेव का रूप धर चुके हैं। औऱ जब कोई उनकी कही बातों को याद दिलाता है तो थेथरई पर उतर जाते हैं।

इसका एक ताजा नमूना है कि हरियाणा में रामदेव को उनके पुराने बयान पर आधारित वादे याद दिलाते हुए एक पत्रकार ने जब उनसे सवाल दागा तो वह हत्थे से उखड़ गयें। बोलें ऐसे सवाल मत पूछो,मैं ठेकेदार नहीं हूं। कि जो तुम पूछो, मैं सभी सवालों के जवाब दूं। मैंने ये बयान दिया था, अब नहीं देता। यह तो यही बात हुई कि जनता को पहले सस्ताई के सपने दिखाओ और जब सत्ता पा जाओ तो उसी जनता की छाती पर महंगाई का मूंग दलवाओ।

आज 8 साल से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार चला रहे हैं। मगर न तो कभी पेट्रोल पैंतीस रुपये लीटर हुआ न ही गैस सिलेंडर तीन सौ रुपये का हो पाया। और तो और यह दिनों दिन मंहगाई की ऊंचाई को छूता गया। आज पेट्रोल की हालत यह है कि पेट्रोल का रेट प्रतिदन बढ़ता जा रहा है। आज के डेट में पेट्रोल कई जगहों पर एक सौ दस रुपये से ज्यादा हो गया है।

वहीं गैस सिलिंडर भी हजार रुपये से ज्यादा का पड़ रहा है। मगर कभी मोदी सरकार आने पर महंगाई भगाने की वकालत करने वाले रामदेव से सवाल करने पर उन्हें मिर्ची लग रही है। और वह कमाई बढ़ाने की नसीहत दे रहे हैं। सच तो यह है कि बाबा रामदेव के इस यूटर्न रवैए से उनके प्रति दिमाग में खाम खा आ जा रहा है कि यह रामदेव हैं या बरगलामदेव्।

-अचूक संघर्ष

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