बृजेश की किला फतह तैयारी,रहेगी परिवार की सीट पर रहेगी कब्जेदारी

Politics उत्तर प्रदेश
अमित मौर्या
                            अमित मौर्या

माफ़िया ने खुद की जगह पत्नी को निर्दल मैदान में उतारा ताकि जीत के बाद बीजेपी से अपरोक्ष लाभ मिलता रहे

बीजेपी के कमजोर कैंडिडेट कहे जा रहे हैं सुदामा पटेल,मकान कब्जाने का भी है आरोप

अमित मौर्या

वाराणसी। विधानसभा चुनाव के बाद यूपी में विधान परिषद का चुनाव चरम पर है। कहीं बीजेपी प्रत्याशी के विरुद्ध खड़े दूसरे प्रत्याशी पर्चा वापस ले रहे हैं। तो कहीं किसी का पर्चा ही छीन जा रहा है। सियासत का रुख किधर जा रहा है,यह हर सियासी समझ रखने वाला व्यक्ति समझ पा रहा है। बहरहाल हम चर्चा करेंगे उस विधान परिषद सीट की जिसपर एक बाहुबली परिवार का कब्जा अनवरत। चलता आ रहा है। यानी माफ़िया डान से माननीय बने बृजेश सिंह परिवार का। पिछली दफा (एक पूर्व मुख्यमंत्री/वर्तमान केन्द्रीय मंत्री के रहमोकरम पर) बीजेपी से वाक ओवर पाये अरूण सिंह उर्फ बृजेश सिंह ने इस बार नाम वापसी के दिन अपना पर्चा वापस ले लिया। और अपनी पत्नी व पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह को मैदान में कर दिया। गौरतलब है कि दो दशकों से यह सीट बृजेश सिंह के ही परिवार की बपौती बन चुकी है।
पूर्वानुमान था कि बीजेपी इस सीट से अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी मगर बीजेपी ने सुदामा सिंह पटेल को उम्मीदवार घोषित करते हुये अटकलों पर विराम लगा दिया। वहीं समाजवादी पार्टी ने भी उमेश यादव को यहां से उतारा है
। सनद रहे कि 2016 के विधानपरिषद चुनाव में बृजेश सिंह के चुनावी मैदान में उतरने के बाद अन्य के साथ बीजेपी प्रतिनिधियों ने भी बृजेश सिंह को अपना समर्थन दिया था। बीजेपी के अंदरूनी तौर पर समर्थन की वजह से बृजेश सिंह ने उस वक्त सपा की उम्मीदवार मीना सिंह को कड़ी टक्कर देते हुये फतह हासिल की थी। उस वक्त यूपी में सपा सरकार थी। अब चूंकि यूपी में बीजेपी की सरकार है। इसलिए बीजेपी को अप्रत्यक्ष रूप से बृजेश परिवार को जिताना भी है और खुद की साख बरकरार रखना भी है। और बृजेश सिंह को निर्बाध रूप से सत्ता का लाभ लेना है इसलिए वह खुद के नाम पर आपत्ति न आये इसलिए पत्नी अन्नपूर्णा सिंह को चुनाव में आगे रख रहे हैं।
इसलिए गेम प्लान के तहत खुद का नाम हटाकर वह येनकेन प्रकारेण अन्नपूर्णा को जिताने की और निर्दल तौर पर जीत के बाद अन्नपूर्णा सिंह बीजेपी के पाले में चलीं जायें। दरअसल राजनीतिक जानकारों का कहना है कि डॉक्टर सुदामा पटेल बृजेश सिंह की पत्नी के मुकाबले कमजोर कैंडिडेट हैं।उनका कहना है कि बीजेपी जानबूझकर ऐसा प्रत्याशी उतारी है जो चुनावी धरातल पर धनबल बाहुबल औऱ मैनजेमेंट में कमजोर है। सुदामा पटेल के बारे में यह भी जानकारी उभर कर आ रही है कि यह मात्र डमी कैंडिडेट ही नहीं। जहां हॉस्पिटल खोले हैं उसका किराया भी नहीं चुका रहे हैं। आरोप यह भी है कि यह उसको कब्जा रहे हैं। वहीं सपा प्रत्याशी उमेश यादव के बारे में चर्चा है कि इन्हें सत्ताधारी दल घेरेबंदी कर चुनाव में उभरने नही देगी। मिलाजुलाकर गेंद बृजेश परिवार के पाले में है। बृजेश का माफ़िया परिवार सत्ता का साझीदार बना रहेगा।

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