मुख्यमंत्री जी का सड़क सुरक्षा पर व्याख्यान,क्या अफसरान पूरा कर पाएंगे फरमान ?

उत्तर प्रदेश

उसी दिन ही जिस दिन मुख्यमंत्री जी सड़क सुरक्षा पर गुंडों व माफियाओं की बात कर रहे थे उसी समय उन्नाव में भगवंत नगर विधानसभा से सत्तारूढ़ विधायक के रिश्तेदार गाड़ी में हूटर लगाकर निकल रहे थे। डियूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मी ने रोका तो बखेड़ा कर दिया गया। उक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी को रोते हुए माफी मांगनी पड़ी। यह अलग बात हैं मामला सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो कार्यवाही संभव हो सकी। 

आशीष सागर/सोनिका मौर्या

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क सुरक्षा अभियान को लेकर विगत सप्ताह फील्ड अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर रहे थे। उन्होंने डिजीटल वीडियो संवाद में बात करते हुए कहा कि अवैध स्टैंड वालों पर गैंगस्टर लगाएं, सभी माफिया की कमर तोड़े। माफियाओं के आर्थिक स्रोतों को बन्द करें। माफिया यदि आर्थिक मजबूत होगा तो आपका जीना हराम कर देगा। प्रदेश में किसी भी तरह का माफिया प्रश्रय नहीं पा सके। यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जून माह में मंत्रियों व उनका प्रत्येक ज़िलों में दौरा होगा। कहीं से भी यदि नकारात्मक खबर आई तो संबंधित पर कार्यवाही की जाएगी। क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह बेलौस कथनी यूपी में ब्यूरोक्रेसी की निष्पक्ष करनी बन पाएगी ?

गरीबों पर बुलडोजर चलाने पर दुःखी होते मुख्यमंत्री जब अफसरों से कहते है कि किसी भी गरीब के घर पर बुलडोजर नहीं चलना चाहिए लेकिन माफिया बचे नहीं तो नायक फ़िल्म से तेवर यूपी सीएम के चेहरे पर नजर आते हैं। वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री प्रदेश को भ्रस्टाचार मुक्त ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर ले जाना चाहते है। वे इसके लिए सतत प्रयासरत दिखते हैं लेकिन उनके आदेशों को जनपदों में तैनात अफसरों की कतार किसी भी सत्तारूढ़ दल के माननीयों को खुश रखने वाली प्रवृत्ति से उबरती नहीं दिखती है। प्रदेश के किसी भी जनपद में देखिए तो डीएम / एसपी के अधीनस्थ अफसर में भी विधायक और माननीय को प्रसन्न रखने की बड़ी होड़ रहती हैं। क्योंकि उनकी कृपा से ही शासन को अच्छी रिपोर्ट प्रेषित होती है। अफसरों के धन अर्जन करने वाले जनपद बरकरार रहते हैं। खासकर बालू-मौरम व शराब ठेकेदारों से गुलजार ज़िले। वह सोनभद्र, मिर्जापुर, फतेहपुर हो या बुंदेलखंड क्षेत्र विशेष के कम विकसित जनपद। यहां अफसरों का आना तो दिक्कत करता है लेकिन जाना उनकी मर्जी पर निर्भर हो जाता है। खैर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सड़क सुरक्षा अभियान में डिजीटल संवाद करते हुए कहा कि अवैध स्टैंड संचालित करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्यवाही सुनिश्चित करें। किसी भी अवैध स्टैंड को जिला मार्ग, मुख्य सड़क,चौराहा पर प्रश्रय न मिले। माफियाओं की आर्थिक कमर तोड़े जिससे उनके काले धंधे कमजोर हो सकें। सड़कों से अवैध स्टैंड 24 घण्टे में हटाये जाएं। उन्होंने बृहस्पतिवार को इसके लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरटीओ दफ्तर दलालों का अड्डा न बन सके, परिवहन विभाग को दलालों से मुक्त करें। योग्य / प्रशिक्षित व्यक्ति को ही ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाएगा। बिना टेस्ट पास किये किसी का परिवहन लाइसेंस नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़क हादसे रोकने के लिए सड़कों से अतिक्रमण हटाये। कमर तोड़ स्पीड ब्रेकर की जगह टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर बनाएं जाए जिससे यात्री दुर्घटना कम हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में अनफिट, बिना परमिट की बसों का संचालन न हो सके। अवैध डग्गामार बसें प्रदेश की सीमा में प्रवेश न कर सकें। अवैध टैक्सी स्टैंड संचालन पर सख्ती की जाए और ज़िलों में निर्धारित स्थान या स्पेस जगह देखकर समस्या का समाधान किया जाएगा। युवाओं की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि ओवरब्रिज स्टंटबाजी की जगह नहीं है। बिना हेलमेट, सीटबेल्ट के कोई सड़क पर दिखाई न देवे ताकि सड़क सुगम व दुर्घटना से मुक्त बन सके। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस लहजे में यह बातें बेबाकी से कहीं हैं उसका 50 फीसदी भी प्रशासन निष्पक्षता से अनुपालन करने लगे तो उत्तरप्रदेश सुरक्षित सड़क परिवहन और माफियागिरी मुक्ति में उत्तम प्रदेश बन सकता हैं। लेकिन देश मे चेहरा देखकर कानून अनुपालन करवाने की नियति में उन्नाव जैसी घटना कारित होती हैं। बीते बुधवार ही उन्नाव में भगवंत नगर विधानसभा से सत्तारूढ़ विधायक के रिश्तेदार गाड़ी में हूटर लगाकर निकल रहे थे। डियूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मी ने रोका तो बखेड़ा कर दिया गया। उक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी को रोते हुए माफी मांगनी पड़ी। यह अलग बात हैं मामला सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो कार्यवाही संभव हो सकी। मिली जानकारी मुताबिक बीते बुधवार को बीजेपी विधायक भगवंतनगर आशुतोष शुक्ला के रिश्तेदार व समर्थक कार से हूटर बजाकर रहे निकल रहे थे। कार में बीजेपी के झंडे के साथ हूटर लगा था। ट्रैफिक सिपाही ने कार को रोका तो नेता के रिश्तेदार भड़क गए और झड़प शुरू हो गई।हाल यह हुआ कि बीच सड़क ट्रैफिक सिपाही को कहा कि तुम्हारी हैसियत क्या है…कर चालान ,तुम्हारे बाप की हैसियत है…चल कोतवाली बंद कराता हूं! नहीं तो DM से बात करता हूं।

सदर कोतवाली में इंस्पेक्टर कक्ष में बीजेपी नेताओं की बदसलूकी पर उक्त ट्रैफिक सिपाही आंसू भरकर रोया। वीडियो में इंस्पेक्टर पूछ रहे है कि क्या आपको हूटर लगाने का अधिकार है, जवाब आता है नहीं…फिर इंस्पेक्टर व ट्रैफिक इंस्पेक्टर की मौजूदगी में पंचायत होती है। यह सदर कोतवाली से 50 कदम की दूरी पर गांधी नगर तिराहा का मामला था। ट्रैफिक आरक्षी मामले में रिपोर्ट दर्जकर इस मामले में धारा 143,147, 332, 504 आईपीसी का अभियोग रजन्ना मिश्रा, संदीप पांडेय, पंकज दीक्षित व अन्य तीन के विरुद्ध पंजीकृत किया जाता है। खबर में यह उदाहरण मात्र है। अक्सर छोटे जनपदों में यह सफेदपोश रुतबेदार उपलब्ध रहते हैं जहां कर्मठ ट्रैफिक पुलिसकर्मी को खराब बर्ताव झेलना पड़ता हैं। वहीं यूपी में मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रशासन निष्पक्ष होकर माफियाओं पर कार्यवाही करता तो तमाम प्रकार के माफिया मसलन व्हाइट कालर कथित सभ्रांत शिक्षा माफिया, भूमाफिया,मौरम माफिया,शराब माफिया ज़िलों के माननीयों का संरक्षण पाकर बेखौफ बसर नहीं करते। यह माफिया बाँदा आसपास तो ऐसे हैं जिन्होंने सरकारी कर्मचारी / अधिकारी होकर सरकार की संपत्ति हड़प ली और सेवानिवृत्त पर भी खाली नहीं की हैं। यह शिक्षा माफिया ऐसे हैं जो सत्ता संरक्षण में विधायक के साथ रहकर शिक्षा से भूमाफिया तक मे गोल्ड मेडलिस्ट हैं। करोड़ो की संपत्ति व नजूल भूमि पर कब्जे है, कुछ तो मंडल आयुक्त के कार्यालय के ठीक सामने है। गाहे-बगाहे सरकार के रुतबे पर नजूल ज़मीन फ्रीहोल्ड करा चुके हैं। क्या चर्च की नजूल ज़मीन और क्या तालाबों की भूमि यह दोनों माफियाओं के कब्जेधारक बन जाने की प्रतिस्पर्धा में मुख्यमंत्री के निर्देश पर बट्टा
लगाती दिखती हैं। चर्च की नजूल ज़मीन पर मैरिज हाल,स्कूल, सिंचाई विभाग की केन कैनाल नहर भूमि पर ताबड़तोड़ अवैध कब्जे सामान्य बात हैं। सीएम योगी का प्रथम कार्यकाल उनके ही कारण सराहा गया और बीजेपी सत्ता मे वापसी की हैं। मुख्यमंत्री के तल्ख बयान पर उत्तरप्रदेश प्रशासन अमल करेगा तो सीएम योगी आदित्यनाथ की निर्भीक कथनी सिस्टम की करनी बन सकती हैं। जहां कानून समता से क्रियान्वित होता दिखने लगेगा। यही जनता की उम्मीद भी हैं।

 सीटबेल्ट व हेलमेट लगाए तभी वाहन चलायें :दयाशंकर सिंह

गत सप्ताह सड़क सुरक्षा पर बोलते हुए सूबे के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बिना सीटबेल्ट व हेलमेट के वाहन कभी भी न चलाये उन्होंने कहा कि सावधानी ही बचाव है सड़क दुर्घटना पर उन्होंने कहा कि आप घर से निकलते है तो आप का आप की प्रतीक्षा में रहता है अपने परिवार को देखते हुए सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करे व सुरक्षित घर जाएं।परिवहन मंत्री ने जोर देकर इस बात को कहा कि हर महीने सड़क सुरक्षा पर लोगो को जागरूक भी करे चालान जुर्माना से लोगो मे जागरूकता नही आएगी।

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