अशोका इंस्टीट्यूट में एमबीए के स्टूडेंट्स के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध के नतीजों पर ग्रुप डिस्कशन

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वाराणसी। अशोका इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स ग्रुप डिस्कशन में कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से भारत को खतरनाक नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। वैश्विक दुनिया में हर देश दूसरे से जुड़े हैं। भारत पर इस युद्ध का व्यापक असर पड़ेगा, जिससे देश की राजनीतिक, सामरिक और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। आने वाले समय में यह युद्ध अगर बड़ा रूप लेता है, तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ज्यादा प्रभावित होगी और स्थिति बुरी तरह चरमरा जाएगी।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई में भारत की इकोनामी पर पड़ऩे वाले असर पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोका इंस्टीट्यूट के बच्चों ने कहा कि भारत और यूक्रेन के बीच एक मजबूत व्यापारिक संबंध है। यूक्रेन के लिए भारत 15वां सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। वहीं दूसरी ओर भारत के लिए यूक्रेन 23वां सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। ऐसे में ये युद्ध दोनों देशों के व्यापारिक हितों को बुरी तौर पर प्रभावित करने वाला है। यूक्रेन से भारत को बड़े पैमाने पर कुकिंग ऑयल मिलता है। इसके अलावा भारत लोहा, स्टील, प्लास्टिक, इनॉर्गनिक केमिकल्स, आदि कई वस्तुएं यूक्रेन से इम्पोर्ट करता है। दूसरी तरफ भारत यूक्रेन को दवा, बॉयलर मशीनरी, मैकेनिकल अपल्यांस आदि चीजों का निर्यात करता है। युद्ध लंबा खिंचने पर दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात हो सकता है, जिसका सीधा असर देश की महंगाई पर पड़ेगा। जब से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ है तब से भारत सरकार सनफ्लावर ऑयल के आयात के लिए दूसरे देशों के विकल्प की तलाश कर रही है। युद्ध लंबा खिंचने पर कुकिंग ऑयल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

अशोका इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स ने ग्रुप डिस्कशन में यह भी कहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित करने का काम करेगा। इस युद्ध के कारण खेती की लागत और खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा होने की उम्मीद है। काला सागर क्षेत्र, जो व्यापार का केंद्र है और युद्ध की वजह से यहां से सभी व्यापार बंद हैं। इस वजह से कच्चे तेल, गेहूं, मक्का, खाना पकाने के तेल और उर्वरकों की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। खरीफ सीजन में बुवाई के मौसम से पहले देश में उर्वरकों की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में अशांति पैदा हो सकती है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से खाद्य फसलों के उत्पादन पर असर होता है, जिससे फसल की कीमतें बढ़ जाती हैं। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो हालात बिगड़ सकते हैं, ऐसे में भारत अधिक गेहूं निर्यात कर सकता है, जिससे खुदरा बिक्री में तेजी आएगी।

ग्रुप डिस्कशन में अकांक्षा चौबे अव्वल रहीं। सुशांत उपाध्याय द्वितीय और सत्यम पांडेय तृतीय स्थान पर रहे। जजों से पैनल में अनुजा सिंह और प्रशांत गुप्ता को शामिल किया गया था। पुरस्कार वितरण डीन एमबीए प्रो.सीपी मल्ल ने किया। एमबीए के विभागाध्यक्ष राजेंद्र तिवारी ने जजों को सम्मानित किया। कार्यक्रम की संयोजक पल्लवी सिंह थी। कार्यक्रम को सफल बनाने में अमित कुमार सिंह, श्रीमती शर्मिला सिंह, श्रीमती प्रीति राय, विनय तिवारी, विशाल गुप्ता, मो.शाहनवाज, आदित्य सिंह यादव ने अहम भूमिका अदा की।

-अचूक संघर्ष-

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