कपिल सिब्बल ने कांग्रेस छोड़ी, अखिलेश की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए भरा पर्चा

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बुधवार को कहा कि उन्होंने 16 मई को ही कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था.
कपिल सिब्बल ने कहा कि वह विपक्ष में रहकर एक गठबंधन बनाना चाहते हैं ताकि मोदी सरकार का विरोध किया जा सके. कपिल सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार का 2024 में साझा विरोध होना चाहिए.
कपिल सिब्बल ने बुधवार को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की सांसदी के लिए पर्चा भरा है. उन्होंने कहा कि उनकी उम्मीदवारी का समर्थन समाजवादी पार्टी समेत कई दलों से मिल रहा है. कपिल सिब्बल कांग्रेस के नाराज़ धड़ा जी-23 के अहम हिस्सा थे. वह पार्टी से लंबे समय से नाराज़ चल रहे थे.
कपिल सिब्बल जब राज्यसभा के लिए नामांकन भर रहे थे तो उनके साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी थे. सिब्बल की क़रीबी एक वकील के तौर पर अखिलेश यादव के परिवार से पहले से ही रही है. शिवपाल यादव से जब विवाद हुआ था और समाजवादी पार्टी बँटी हुई दिख रही थी, तब सिब्बल ने कहा था कि साइकिल चुनाव चिह्न अखिलेश को ही मिलना चाहिए.
समाचार एजेंसी एनएनआई के अनुसार कपिल सिब्बल के नामांकन के बाद अखिलेश यादव ने कहा, ”समाजवादी पार्टी के समर्थन से कपिल सिब्बल ने राज्यसभा के लिए नामांकन भरा है. वह एक जाने-माने वकील हैं. राज्यसभा और लोकसभा में वह प्रभावी तरीक़े से लोगों के मुद्दे उठाते हैं. देश कई चीज़ों से जूझ रहा है और मुझे उम्मीद है कि राज्यसभा में वह इन मुद्दों को प्रभावी तरीक़े से उठाएंगे.”
कपिल सिब्बल ने इसी साल मार्च में अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में गाँधी-नेहरू परिवार पर हमला बोलते हुए कहा था, ”गांधी परिवार को पार्टी का नेतृत्व छोड़ देना चाहिए. नेतृत्व का मौक़ा अब किसी और को मिलना चाहिए.”
इंटरव्यू के सामने आते ही कांग्रेस में गांधी परिवार के वफादार नेताओं ने उन पर तीखा वार किया था. पार्टी के सीनियर नेताओं ने सिब्बल पर आरएसएस और बीजेपी की भाषा बोलने का आरोप लगाया था.
सिब्बल ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी को पार्टी नेतृत्व से हट जाना चाहिए. उन्हें पार्टी की कमान अब किसी दूसरे को दे देना चाहिए. इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ”कांग्रेस नेतृत्व ख्याली दुनिया में जी रहा है जबकि मैं ‘सबकी कांग्रेस’ चाहता हूँ, जबकि कुछ लोग ‘घर की कांग्रेस’ चाहते हैं. ”
-एजेंसियां

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