तो क्या दबाव का प्रभाव दिखाना चाहते हैं ओपी राजभर

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अखिलेश के साथ भी बीजेपी वाला दांव खेल रहे हैं राजभर

आज बात करते हैं एक ऐसे किरदार की जो यूपी की राजनीति के बारे में कहा जाता है। वह जलेबी की तरह गोल है उनका और उनकी पॉलिटिक्स करने की स्टाइल ऐसी है कि जो कहते हैं, वह करते नहीं। जो करते हैं वह कहते नहीं। और आज कल वह ऐसी ऐसी बातें कह रहे है समझ में कुछ नहीं आये । उनके बारे में क्या कहा जाए। पता नहीं क्यों? आजकल अखिलेश यादव से बेहद खफा खफा नजर आ रहे चुनाव से समय एक ही सवाल बार बार पूछा जाता था से कि आप क्या फिर बीजेपी के कैंप जाएंगे लेकिन उस समय वह समाजवादी पार्टी के साथ ही रहे । और उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 6 विधायकों के साथ विधानसभा में गई ओमप्रकाश राजभर चुनाव के टाइम अखिलेश यादव दोनों साथ साथ चुनाव लड़ने की तरफ आ रहे थे। सरकार बनाने के दावे कर रहे थे। ऐसा लग रहा था दो जिस्म एक जान है वाली बात है। उसके बाद अब जो विधानसभा की बैठक हो रही है तो वह अचानक से क्यों नाराज हो रहे। क्या। वह विधानसभा जब चुनाव लड़ रहे थे। तब अखिलेश जमीन पर उतर के पॉलिटिक्स नहीं कर रहे थे कि अखिलेश यादव को गाड़ी में में रहने की आदत लग गई। उन्हें आराम की आदत लग गई। कह रहे हैं कि कहीं भी जाते हैं तो बिना गाड़ी के नहीं जाते। 100 मीटर दूरी भी पैदल तय करनी होती तो गाड़ी में जाते हैं। वह यह भी कहते हैं कि अगर नहीं उनकी जगह मै होता तो फिर 100 मीटर दूर पैदल ही जाता था कि इतने बहुत सारे कार्यकर्ताओं से मिल पाता उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा कार्यकर्ताओं द्वारा मुझे यह कहा गया कि आप जिस तरह यह कहा गया कि इस तरह आप मेहनत कर रहे हैं निकल कर के जो चुनाव के समय आप लोगों ने जनता के बीच में जाकर के। एक समान अनिवार्य शिक्षा की बात या गरीबों के इलाज फ्री करने की बात किया। जातिवार जनगणना की बात किया। 300 मिनट बिजली फ्री देने की बात किया। आप लोगों ने प्रदेश में अमन चैन की बात किया आवारा पशु से निजात दिलाने की बात किया मामला समाजवादी पार्टी के अंदर का इनका कोई लेना देना नहीं है। ओमप्रकाश राजभर का लेकिन आजम खान और अखिलेश यादव के बीच इन दिनों मीठे कड़वे और खट्टे वाले रिश्ते हो गए, जिसमें कहा जा रहा है कि आजम खान जो है वह अखिलेश यादव से नाराज हैं। इस रिश्ते में शिवपाल यादव कह रहे क्यों नहीं विधानसभा में जब आजम खान विधायक पद की शपथ ले रहे थे। विधानसभा में अखिलेश यादव को उस वक्त मौजूद रखना चाहिए था । अब सवाल यह उठता है कि उठता है कि क्या ओमप्रकाश राजभर अखिलेश यादव का साथ छोड़ने वाले है समाजवादी पार्टी की तरफ से कुछ बातें कही जाने लगी और फिर दोनों के बीच में ठन गई और फिर एक बहाना मिल गया और फिर ओमप्रकाश राजभर बीजेपी के तरफ चले गए और क्या बीजेपी से उनके डील पक्की हो गई है.? क्योंकि कुछ दिनों पहले भी यूपी के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर दयाशंकर सिंह उनसे उनकी मुलाकात हुई थी। उससे पहले भी चुनाव के दरमियान भी जब वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के घर चाय पीने चले गए थे, तब भी ऐसे ही बात होती थी। क्या कुछ होने वाला है। कहानी कुछ इस तरह की है कि आप सोचेंगे कि यह जो ओमप्रकाश राजभर अचानक से अखिलेश यादव से इतने नाराज हो गए जो कहते थे कि मेरी इच्छा अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है। वह विधानसभा चुनाव के दौरान हर मंच से वह यह कहते थें की कहने अखिलेश को मुख्यमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकता वह आज अचानक से अपने बेटा कोई एमएएलसी बनाना चाहते हैं।
उनको अपने बेटे का राजनीतिक भविष्य सवारना है अगर वह सदन का सदस्य नहीं बनते हैं तो अरविंद के भविष्य के खतरा हो सकता है इसलिए ओमप्रकाश राजभर किसी भी तरह अपने बेटे को एमएलसी बनाना चाहते हैं उनका पुत्र के भविष्य को लेकर चिंतित हैं यह कोई गलत बात नहीं है ।

ओमप्रकाश राजभर की यह दबाव की रणनीति है। यह उनका स्टाइल है अपने तरीके से पेश कर रहे हैं। अखिलेश यादव पर अभी जो राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव होने वाले हैं राजभर चाहते हैं कि अपने बेटे के लिए एमएलसी की एक सीट पक्की कर ले लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी उनको समाजवादी पार्टी गठबंधन के कोटे से राज्यसभा भेजने की चर्चा शुरू हो गई है जिनके यूपी विधानसभा में 8 विधायक हैं ओमप्रकाश राजभर यह भी चाहते हैं कि उनके छह विधायक हैं तो वह एक विधान परिषद भेज सकते सकते हैं लेकिन समाजवादी कैंप से नहीं का जवाब मिला है ।समाजवादी कैन टेक करेगी चुनाव में उनके बेटों को हमने विधानसभा का टिकट दिया वह हार गए तो हम क्या करें राजभर अखिलेश पर दबाव बनाकर अपने बेटे को विधान परिषद सदस्य बनाना चाहते हैं वैसे भी समाजवादी पार्टी इस समय कमजोर स्थिति में हैं। वह नहीं चाहती थी कि उनका कोई भी सहयोगी भाजपा के साथ जाए।

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