उफ, कब मिलेगी से निजाइस्लामोफोबिया त,कब होगी मुल्क में मोहब्बत की बात

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कहीं देश को सीरिया की श्रेणी में लाकर न खड़ा कर दे,क्योंकी धर्मांधता ले डूबने की तरफ बढ़ चली है

देश में हालिया चर्चित मुद्दा रहा एक जैन समुदाय के बुजुर्ग की पीट- पीट कर हत्या. वह भी हत्या उस बुजुर्ग के मुसलमान होने के शक में की गई.बार बार मीडिया जैन समुदाय को इस बात के लिए आश्वस्त कर रहा है कि घटना से उनको परेशान होने की जरूरत नहीं,जैनों से बैर नहीं है.वो तो मुसलमान होने शक में ऐसी गलती से हो गई है… जैन समुदाय भी शायद इसीलिए खामोश है कि पहचान की गलती हो गई..पर मेरा सवाल ये है कि अगर वो बुजुर्ग सच में मुसलमान होता तो क्या उसकी हत्या उचित थी..?
क्या एक मुसलमान का जीवन इतना सस्ता है इस लोकतांत्रिक देश में..?

मैने बार बार कहा है कि नफरत की राजनीति में ही अब कईयों के लिए स्कोप है अब…उत्तर प्रदेश के दादरी स्थित बिसाहड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक की हत्या के 15 आरोपियों को दादरी स्थित नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी मिली है… घर में गाय का मांस रखने की अफवाह के बाद भीड़ ने सितंबर 2015 में मोहम्मद अखलाक और उनके बेटे दानिश पर घर में घुसकर हमला कर दिया था… चोटों के कारण उनकी मौत हो गई थी… इसके बाद देश भर में नामी लेखकों ने विरोध करते हुए अपने पुरस्कार लौटा दिए थे… द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा विधायक तेजपाल सिंह नागर ने एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 9 अक्टूबर को एक बैठक में 15 युवाओं की भर्ती की व्यवस्था की थी.. सजा के बजाए मॉब लिंचिंग करने वालों को मिले ये ईनाम बताते हैं कि हां अब नफरत की राजनीति में स्कोप है… किसी मुसलमान की हत्या करके हीरो बना जा सकता है.

शायद इसी की बानगी है जैन समुदाय के बुजुर्ग की हत्या…हत्यारोपी बीजेपी नेता दिनेश कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया गया पर उसके मन में कोई डर नही है, न कानून का न समाज का, न किसी और का वरना हत्यारा खुद ही खुद को हाईलाइट क्यों करवाता… उसने कराया क्योंकि उसको पता है कि उसका विधायक का टिकट इधर से ही कन्फर्म होना है.
ये जो हत्यारी परंपरा की नींव पड़ रही है न, दुआ करिए ये कहीं देश को सीरिया की श्रेणी में लाकर न खड़ा कर दे… क्योंकि ये परंपरा हत्यारों की ऐसी भीड़ तैयार करेगी,ऐसी भीड़ तैयार करेगी कि देश में हत्यारों के अलावा कुछ दिखाई नहीं देगा… आपके बच्चे आत्मघाती तक बन जायेंगे इस परंपरा के चक्कर मे.. सब तबाह को जाएगा.. अभी भी वक्त है.. इससे पहले इस्लामोफोबिया सब खत्म कर दे इसका उपचार जरूरी है… समय है कि जनता को सीधे सवाल उठना चाहिए कि ये नफरत की राजनीति में स्कोप क्यों बनाया जा रहा है.. और अगर बनाया जा रहा है तो बनाने वालों के बच्चे अमेरिका,ब्रिटेन,आस्ट्रेलिया क्यों जा रहे हैं पढ़ाई करने.. वो इस नफरती राजनीति का हिस्सा क्यों नही बन रहे।

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