पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस की उड़ रही है धज्जियां, जिला आबकारी अधिकारी बना घूसखोरी में शूरवीर, महीना न देने पर दुकान सस्पेंड की देता है धमकी

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जिला आबकारी अधिकारी ओमवीर, घूसखोरी में शूरवीर !

दुकानों से लेता है महीना, न देने पर दुकान सस्पेंड की देता है धमकी

भांग की दुकानों के बगल में इनकी सरपरस्ती में बिकता है गाँजा

प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस की उड़ रही है धज्जियां

सोनिका मौर्या
सोनिका मौर्या

वाराणसी। चोर करे तिजोरी की रखवाली,व्यभिचारी को मिले दुल्हन की रखवाली। तो समझ सकते हैं कि क्या हाल होगा उसका जिसकी रखवाली का जिम्मा उसे मिला है। कुछ ऐसे ही तर्ज पर आजकल जिले का आबकारी विभाग चल रहा है। इस वक्त जिले में भांग की दुकानो से गांजा की बिक्री जोरों पर बेचे है। कुछ जगहों पर अवैध मदिरा का व्यापार भी तेजी से पनप रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है..क्योंकि जिम्मेदार जानकर भी धृतराष्ट्र बने हुए हैं।

जी हां वाराणसी जनपद प्रधानमंत्री का क्षेत्र है। यह धार्मिक सांस्कृतिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मगर कुछ समय से यहां अवैध नशे का हब बनता जा रहा है। यहां लगभग हर भांग की दुकान से गांजे की पुड़िया बेची जा रही है। इस गांजे की लत में स्कूल, कालेज के बच्चों से लेकर हर उम्र के लोग इस ख़तरनाक नशे की गिरफ्त में रहे हैं। गांजे धंधेबाजों की आबकारी विभाग के मुखिया से तगड़ी सेटिंग बताई जा रही। जिनके संरक्षण में शहर से लेकर गांव तक के भांग के ठेकों पर बदस्तूर गांजा बिक्री जारी है। वैसे आबकारी विभाग ठेकेदारों को भांग का ही ठेका दिया है, लेकिन भांग की दुकानों पर वह गांजा बिक्री इसलिए मौन रहता है। क्योंकि जिला आबकारी अधिकारी ओमवीर को एक बंधी बंधाई रकम मिलती रहती है। यही नहीं देशी विदेशी मदिरा बीयर की दुकानों से ओवर रेटिंग का खेल भी जारी है। जिससे जिला आबकारी अधिकारी ओमवीर की तिजोरी दिनों दिन और आबाद होती जा रही है।

बताया जाता है जिले के शराब बियर की दुकानों से हर माह 2 से 3 हजार तक की वसूली की जाती है। यह वसूली का खेल आबकारी विभाग के सेक्टर इंस्पेक्टर के जरिये होती। सूत्रों की माने तो हर माह 20 से 25 लाख तक कि वसूली हो जाती है। जो कुछ कट करके जिला आबकारी अधिकारी की जेब तक पहुँच जाती है।

अवैध वसूली का यह खेल प्रशासन के नाक के नीचे हो रहा है। आबकारी अधिकारी सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगे पर रखकर सब संचालित करवा रहे हैं। यही चलता रहा तो वह दिन दूर नही जब रिश्वतखोरी का पर्यायवाची ईमानदारी कहलायेगा। और हर रिश्वतखोर ओमवीर बनना चाहेगा।

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