एप्सटीन फाइल से खुला राज,मोदी ने अमेरिका व इजरायल की फंडिंग से 2019 में पीएम का पहना था ताज
क्या भाजपा ने 2019 के आम चुनावों के लिए इजरायल और अमेरिका से फंडिंग ली थी? एप्सटीन फाइल से निकला राज, केंद्र सरकार की बंद आवाज

– अमेरिका में घोषित यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन के साथ डील कर रहा था भारत का उद्योगपति अनिल अंबानी
– किस हैसियत से, किसकी अनुमति से? 2017 से एप्सटीन के साथ बनाए रिश्ते
– चुनाव के लिए फंडिंग तक की बात की, मिला भी
– भारत के प्रधानमंत्री की इमेज हुई तार-तार, नाचने-गाने की बात आई बाहर
– विपक्ष के आरोपों को मिला बल- धंधेबाज तय कर रहे हैं भारत की विदेश नीति

नई दिल्ली। नए साल के जनवरी अंत से भारत में एप्सटीन फाइल चल रहा है। एप्सटीन फाइल वैसे तो अमेरिका के एक बाल यौनाचारी, दुराचारी और मासूम लड़कियो के हत्यारे जेफ्री एप्सटीन के बारे में है, जिसकी अब मौत हो चुकी है। लेकिन उसके द्वारा दुनिया के कई देशों के प्रमुखों से संपर्क और अमेरिका के साथ रिश्ते बनाने की कोशिश में की गई बातचीत का राज अब जाकर खुला है। एप्सटीन फाइल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम आया है। इसके बाद भारत में मचे बवाल को भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह कहकर खारिज कर दिया कि जेफ्री एप्सटीन जैसे कुख्यात अपराधी के मेल से जुड़ी खबरें निराधार हैं।
लेकिन, इस बयान के बाद भी जिस तरह एक-एक कर कड़ियां खुल रही हैं, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अच्छे रिश्ते बनाने के लिए पीएम मोदी का इजरायल जाकर नाचने और गाने की खबरें चल रही हैं, उससे भारत की वैश्विक मंच पर खासी बदनामी हुई है।
अनिल अंबानी ने चुनाव के लिए फंड मांगा
अमेरिका के न्याय विभाग से जारी एप्सटीन फाइल के ईमेल में सबसे प्रमुख रूप से जो चेहरा उभरकर आया है, वह भारत के कारोबारी अनिल अंबानी का है। 21 अप्रैल 2019 को जेफ्री एप्सटीन को किए एक ईमेल में अनिल अंबानी उससे पूछता है, क्या आप मेरे लिए कॉर्पोरेट लेवल पर कोई फंडिंग उपलब्ध करा सकते हो? अनिल आगे कहता है, भारत में आम चुनाव 23 मई को हैं और मैं न्यूयॉर्क में बैठा हूं।
इस पर एप्सटीन का जवाब है कि अनिल अंबानी को स्टीव बैनन, रंबलर, रयूमलर से मिलना चाहिए। रयूमलर उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति भवन यानी व्हाइट हाउस में पूर्व वकील थे। इसके बाद अनिल और एप्सटीन के बीच 23 मई 2019 को मीटिंग तय होती है। वही तारीख, जिस दिन भारत में लोकसभा चुनाव शुरू हुए। 20 मई 2019 को एप्सटीन अपने दोस्त स्टीव बैनन को संदेश भेजता है कि नरेंद्र मोदी मुझसे मिलने किसी को भेज रहे हैं। वह आदमी और कोई नहीं, बल्कि अनिल अंबानी था, जिससे 23 मई को मुलाकात का वक्त तय हुआ था। स्टीव बैनन मूल रूप से एक राजनीतिक रणनीतिकार और पूर्व बैंकर है, जिसने राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल में केवल 7 महीने व्हाइट हाउस में मुख्य रणनीतिकार के रूप में काम किया और फिर वहां से निकाल दिया गया। अनिल अंबानी से मिलने के बाद 23 मई को ही एप्सटीन अपने दोस्त बैनन से कहता है कि मोदी के भेजे आदमी से मेरी मुलाकात दिलचस्प रही। उसी दिन वह अनिल को भी मैसेज भेजता है कि आपसे मुलाकात बेहद अच्छी रही।

बड़ा सवाल- क्या 2019 में मोदी की जीत में अमेरिका का दखल था?
यह एक बड़ा सवाल बन गया है, क्योंकि उसी 2019 की चुनावी जीत में भाजपा पर पहली बार वोट चोरी का आरोप लगा था। आरोप यह था कि भाजपा ने 170 से ज्यादा सीटें वोट चोरी से जीती हैं। वहीं, अब एप्सटीन फाइल से यह सामने आया है कि नरेंद्र मोदी से अमेरिका के रिश्ते सुधारने के लिए संपर्क सूत्र अनिल अंबानी ही था, जिसने जेफ्री एप्सटीन के माध्यम से यह काम करने की कोशिश की। इस बेहद अहम सवाल को लेकर केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है।
दूसरा सवाल- ट्रंप के सामने नाचने के बाद भी रिश्ते क्यों नहीं बने?
पीएम नरेंद्र मोदी की 2017 में इजरायल यात्रा के बारे में एप्सटीन फाइल से सामने आया है कि इसमें भी जेफ्री एप्सटीन का हाथ था और तब भी अनिल अंबानी ने इस यात्रा के दौरान सूत्रधार की भूमिका निभाई थी। इस पूरे मामले को ऐसे समझें-
फरवरी 2017 में अनिल का फोन नंबर मिला- जेफ्री एप्सटीन को अनिल अंबानी का फोन नंबर सऊदी व्यापारी सुल्तान अहमद बिन सुलेअम ने दिया था। 23 फरवरी को जेफ्री एप्सटीन अनिल अंबानी को मैसेज करता है कि उनकी मुलाकात हो चुकी है, जो बहुत अच्छी रही। इसके बाद जेफ्री एप्सटीन अनिल का नंबर ईहुद बराक को देता है, जो इजराचयल का पूर्व पीएम रहा।
इसके बाद 2 मार्च 2017 को अनिल अंबानी जेफ्री एप्सटीन को बताता है कि उसे भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग के मामले में उसकी मदद चाहिए। जवाब में जेफ्री एप्सटीन कहता है कि अंबानी उसे बदले में क्या दे सकता है? इस पर अनिल कहता है कि बदले में भारत का बाजार ले लो। 3 मार्च 2017 को जेफ्री एप्सटीन की ओर से अनिल अंबानी को मैसेज आता है कि वह सिग्नल ऐप डाउनलोड कर ले, ताकि संदेशों का आदान-प्रदान सुरक्षित रहे। 16 मार्च 2017 को अनिल अंबानी जेफ्री एप्सटीन से कहता है कि भारत का नेतृत्व ट्रंप के दामाद जेराड कुशनर और स्टीव बैनन से तुरंत मिलना चाहता है। अनिल यह भी बताता है कि पीएम मोदी मई में वॉशिंगटन आकर ट्रंप से मिलेंगे।
इसके बाद 17 मार्च 2017 को जेफ्री एप्सटीन एक ईमेल में टॉम बराक (अमेरिकी रियल एस्टेट कारोबारी) से कहता है कि अनिल अंबानी अप्रैल में न्यूयॉर्क आएंगे और मोदी मई में अमेरिका आ रहे हैं।
इसके बाद 27 अप्रैल 2017 तक एप्सटीन और अनिल अंबानी के बीच अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों के बारे में बातचीत चलती रहती है और इसमें अमेरिकी प्राथमिकताएं, इजरायल के साथ संबंध और पाकिस्तान का मुद्दा छाया रहता है। फिर एक और जुलाई 2017 को पीएम मोदी इजरायल पहुंचते हैं।
6 जुलाई 2017 को एप्सटीन ने कतर में किसी को ईमेल भेजा, जिसमें कहा गया कि भारतीय प्रधानमंत्री ने सलाह मानते हुए इजरायल में अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए डांस किया और गाना गाया। वही ट्रंप जिसके साथ मोदी ने कई हफ्ते पहले मुलाकात की थी। यह सफल रहा। हैरत इस बात की है कि इस नाचने-गाने के दो साल बाद भी अनिल अंबानी 2019 के चुनाव में फंडिंग के लिए एप्सटीन से आग्रह कर रहा है।
तीसरा सवाल: अनिल अंबानी को एप्सटीन से मिलने किसने भेजा और क्यों?
एप्सटीन फाइल्स में जो सबसे प्रमुख चेहरा सामने आया है, वह अनिल अंबानी का है। इसीलिए यह सवाल बहुत ही अहम हो जाता है कि क्या केंद्र की मोदी सरकार ने अनिल अंबानी को भारत-अमेरिकी रिश्तों को सुधारने के लिए मदद करने को कहा था। क्या एक घोषित अपराधी के साथ डीलिंग करने के लिए अंबानी को सरकार ने अधिकृत किया था? अभी तक दोनों की बातचीत से आप यह तो समझ ही गए होंगे कि अनिल अंबानी को प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की खबर थी और वह लगातार अमेरिका जाकर जेफ्री एप्सटीन से मिलता रहा या फिर उसके संपर्क में भी रहा।
क्या कॉर्पोरेट तय करते रहे भारत की विदेश नीति
अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते कितने बेहतर हों, यह तय करना भारत की विदेश नीति का मामला हे और इसके लिए भारत में विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री दोनों हैं। ऐसे में इस मामले में अनिल अंबानी की इसमें कोई भूमिका नहीं बनती और न ही जेफ्री एप्सटीन नाम के अपराधी और स्टीव बैनन के रूप में किसी कारोबारी की। तो फिर 2017 से लेकर 2019 तक अनिल अंबानी किस हैसियत और किसकी अनुमति के दो बडे सप्रभुता संपन्न राष्ट्रों के बीच रिश्तों में सुधार के लिए डील करता रहा? यहां तक कि दोनों ने भारत में 2019 के आम चुनाव और फंडिंग तक की बात कर ली? इस मामले में कांग्रेस समेत विपक्ष ने लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर अंबानी और अदानी जैसे बड़े कॉर्पोरेट्स के फायदे के लिए विदेश नीति को बदलने के आरोप लगाए हैं। अब एप्सटीन फाइल्स में सामने आए चौंकाने वाले राज से इन आरोपों को और बल मिल गया है। 24 मई 2019 को बैनन एप्सटीन को लिखता है- मैं मोदी के लिए एक घंटे का शो कर रहा हूं, साथ में अमेरिका में रहने वाले हिंदुओं को भी जोड़ रहा हूं। उसी दिन दोपहर में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है- एप्सटीन ने मोदी को स्टीव बैनन से मिलाने का प्रस्ताव किया, जिसमें चीन से जुड़ी चिंताओं पर बात होगी। उसके बाद 24 मई को ही एप्सटीन अनिल अंबानी को लिखता है कि मोदी को स्टीव बैनन से मिलकर खुशी होगी। अंबानी का जवाब है- बेशक। इससे साफ जाहिर है कि भारत की विदेश नीति को विदेश मंत्रालय नहीं, भारत के कॉर्पोरेट्स अपने फायदे के लिए तय कर रहे हैं।



