परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का पैगाम,योगिराज में विभाग हासिल करेगा एक नम्बर का “मुकाम” सुरक्षित, आधुनिक और हरित परिवहन की ओर निर्णायक कदम

- बजट 2026-27 में परिवहन विभाग को नई उड़ान
- ई-बस क्रांति 400 करोड़ से बदलेगा सार्वजनिक परिवहन का चेहरा
- 150 करोड़ में आधुनिक बस अड्डे यात्रियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
- चार्जिंग स्टेशन पर 50 करोड़ का निवेश हरित परिवहन को मिलेगा बल
- मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा विजन योजना को 50 करोड़ हादसों पर सख्ती
- 55 जिलों में ‘मृत्यु दर शून्य कार्यक्रम’ दुर्घटना नियंत्रण की बड़ी मुहिम
- 16 वर्ष आयु वर्ग को हल्के दोपहिया लाइसेंस पर विचार युवाओं के लिए नई पहल
- सख्त प्रवर्तन लाखों चालान, ओवरस्पीड और बिना हेलमेट पर कड़ा एक्शन
- डीएम की अध्यक्षता में जिला कमेटियां सक्रिय सड़क सुरक्षा पर समन्वित रणनीति

लखनऊ/बलिया/ वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। राज्य सरकार ने इस बार परिवहन विभाग के लिए जो व्यापक और दूरदर्शी प्रावधान किए हैं, वे केवल बजटीय आंकड़े नहीं बल्कि प्रदेश की गतिशीलता, सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता का संकेत हैं। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने विधानसभा में स्पष्ट कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है—और इस दिशा में बजट 2026-27 एक ठोस आधार तैयार कर रहा है। प्रदेश तेजी से शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में परिवहन केवल एक सुविधा नहीं बल्कि विकास की रीढ़ है। सरकार ने ई-बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान कर यह संकेत दिया है कि आने वाला समय हरित और तकनीक-आधारित परिवहन का होगा। यह कदम न केवल यात्रियों को आरामदायक सफर देगा बल्कि वायु प्रदूषण में कमी लाने में भी सहायक होगा।
सार्वजनिक बस अड्डों के आधुनिकीकरण और नए बस अड्डों के निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रदेश की बुनियादी संरचना को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है। साफ-सुथरे प्रतीक्षालय, डिजिटल सूचना प्रणाली, बेहतर शौचालय और यात्री सुविधाएं अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि जिला स्तर तक पहुंचेंगी।।इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बस अड्डों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने हेतु 50 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रदेश को भविष्य के परिवहन मॉडल की ओर अग्रसर करता है। यह निर्णय जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है। मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा विजन योजना के लिए 50 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिसका उद्देश्य सड़क हादसों को कम करना और दुर्घटना के बाद त्वरित राहत व्यवस्था सुनिश्चित करना है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने भी सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में अवैध कट बंद किए जाएंगे और जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में समितियां सक्रिय हैं। राज्य में दुर्घटनाओं की उच्च दर को देखते हुए ‘मृत्यु दर शून्य कार्यक्रम’ को 55 जिलों में लागू करने की तैयारी दर्शाती है कि सरकार समस्या की जड़ पर प्रहार करना चाहती है। साथ ही, 16 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को हल्के दोपहिया वाहनों के लिए लाइसेंस देने पर विचार, युवाओं की परिवहन आवश्यकताओं और कौशल प्रशिक्षण की दिशा में एक नई सोच को दर्शाता है। कुल मिलाकर बजट 2026-27 परिवहन क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार, तकनीकी आधुनिकीकरण और सुरक्षा-संवेदनशील प्रशासन की व्यापक रणनीति प्रस्तुत करता है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ तो उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभर सकता है।

ई-बस क्रांति की ओर बढ़ता प्रदेश
उत्तर प्रदेश का परिवहन तंत्र लंबे समय से जनसंख्या दबाव, शहरी विस्तार, प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं जैसी बहुआयामी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे समय में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि नीति-निर्धारण की एक गंभीर दिशा तय करता दिखाई देता है। 400 करोड़ रुपये की लागत से ई-बसों की खरीद का प्रस्ताव प्रदेश के परिवहन ढांचे को नई ऊर्जा देने वाला है। इलेक्ट्रिक बसें पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में कम प्रदूषणकारी, कम शोर वाली और दीर्घकालिक रूप से किफायती मानी जाती हैं। इस निवेश से न केवल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ वायु गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि सार्वजनिक परिवहन की छवि भी आधुनिक बनेगी। राजधानी लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज जैसे शहरों में ई-बस संचालन से यात्रियों को एसी, जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल टिकटिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
बस अड्डों का कायाकल्प
150 करोड़ रुपये का प्रावधान नए बस अड्डों के निर्माण और पुराने बस अड्डों के उन्नयन के लिए किया गया है। लंबे समय से यात्रियों की शिकायत रही है कि बस स्टैंडों पर स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा की कमी रहती है। सरकार का दावा है कि अब बस अड्डों को मल्टी-फंक्शनल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, महिला सहायता काउंटर, सीसीटीवी निगरानी और स्वच्छ शौचालय अनिवार्य होंगे।
चार्जिंग स्टेशन हरित परिवहन का आधार
50 करोड़ रुपये का निवेश बस अड्डों पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया गया है। इससे निजी इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को भी सुविधा मिलेगी। यह कदम राज्य को भविष्य के ई-मोबिलिटी नेटवर्क की दिशा में तैयार करेगा।
सड़क सुरक्षा पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा विजन योजना के तहत 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था दर्शाती है कि सरकार दुर्घटनाओं को केवल आंकड़ों में नहीं देख रही बल्कि इसे जनजीवन से जुड़ा संकट मान रही है। प्रदेश में दुर्घटनाओं की संख्या राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय रही है। इस संदर्भ में जिला स्तरीय समितियों का गठन, पुलिस-परिवहन-स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्यप्रणाली और मासिक समीक्षा बैठकें प्रशासनिक सक्रियता का संकेत देती हैं।
मृत्यु दर शून्य कार्यक्रम
शीर्ष 20 दुर्घटना-प्रभावित जिलों की पहचान कर ‘मृत्यु दर शून्य कार्यक्रम’ लागू किया गया है। 55 जिलों तक इसका विस्तार करने की तैयारी बताती है कि सरकार दीर्घकालिक रणनीति अपना रही है।
सख्त प्रवर्तन और चालान
1 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच ओवर स्पीड में 2,08,538 चालान, बिना हेलमेट 5.98 लाख, बिना सीट बेल्ट 1.27 लाख, मोबाइल पर बात करने पर 51,365, ड्रंक एंड ड्राइव 4,173, रांग साइड 57,109, अवैध पार्किंग 32 हजार और ओवरलोडिंग 51,959 चालान किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे लापरवाही प्रमुख कारण है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रवर्तन और जागरूकता दोनों साथ-साथ चलेंगे।
16 वर्ष आयु वर्ग को लाइसेंस पर विचार
हल्के दोपहिया वाहन के लिए 16 वर्ष आयु वर्ग को लाइसेंस देने पर विचार युवाओं की गतिशीलता और ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। हालांकि अंतिम अनुमति केंद्र सरकार से अपेक्षित है। बजट प्रावधान जितने प्रभावी दिखते हैं, उनकी सफलता क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। ई-बसों की समयबद्ध खरीद, चार्जिंग नेटवर्क की गुणवत्ता, बस अड्डों के निर्माण में पारदर्शिता और सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों की जमीनी निगरानी ये सभी कारक तय करेंगे कि यह बजट कितना सफल होता है।।लेकिन यह निर्विवाद है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में परिवहन विभाग को जो प्राथमिकता दी गई है, वह प्रदेश के विकास मॉडल में सार्वजनिक परिवहन को केंद्र में स्थापित करती है।
* ई-बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान
* नए बस अड्डों के निर्माण हेतु 150 करोड़ रुपये स्वीकृत
* बस अड्डों पर चार्जिंग स्टेशन के लिए 50 करोड़ रुपये
* मुख्यमंत्री सड़क सुरक्षा विजन योजना के तहत 50 करोड़ रुपये
* 16 वर्ष आयु वर्ग को हल्के दोपहिया लाइसेंस देने पर विचार
* सड़क दुर्घटना नियंत्रण के लिए डीएम की अध्यक्षता में जिला कमेटियां सक्रिय
* ‘मृत्यु दर शून्य कार्यक्रम’ 55 जिलों में लागू करने की तैयारी
* 1 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक लाखों चालान, प्रवर्तन सख्त



