Newsई-पेपरउत्तर प्रदेशवाराणसीशासन प्रशासन

पीएम के क्षेत्र में सट्टा माफ़िया पंकज आर्या क्यो न करे करोड़ो का काला कारोबार,जब कानून के जिम्मेदार ही बन गए हिस्सेदार

  • मोदी के संसदीय क्षेत्र में सट्टे का काला साम्राज्य
  • कानून से बड़ा हो गया सत्ता माफियाओं का ‘नेटवर्क’
  • टी20 विश्व कप 2026 की आड़ में वाराणसी में कथित सट्टा कारोबार पर गंभीर सवाल
  • हर गेंद, हर रन और पावरप्ले तक पर लग रहा दांव, डिजिटल प्लेटफॉर्म बने हथियार
  • सोशल मीडिया पर दिखती शान-ओ-शौकत ने खड़े किए नए प्रश्न
  • युवाओं को रातों-रात अमीर बनने का झांसा, कर्ज और बर्बादी की आशंका
  • 100 से 50 हजार तक छोटे दांव, बड़े मुकाबलों में लाखों-करोड़ों की चर्चा
  • विदेशी सर्वर और एन्क्रिप्टेड ग्रुप से संचालित कथित नेटवर्क
  • पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
  • संगठित अपराध का नया चेहरा सट्टा और नशे का समानांतर इकोसिस्टम


वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में इन दिनों क्रिकेट का रोमांच जितना चरम पर है, उतने ही तीखे सवाल कानून-व्यवस्था को लेकर उठ खड़े हुए हैं। आईसीसी मेंस टी 20 विश्वकप 2026 के मैचों ने देश भर में उत्साह की लहर पैदा की है, लेकिन इसी उत्साह की आड़ में सट्टेबाजी के कथित नेटवर्क के सक्रिय होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के आधार पर यह आरोप सामने आ रहे हैं कि शहर और पूर्वांचल के कई हिस्सों में मैच के नतीजों से लेकर हर रन, हर विकेट, हर ओवर और यहां तक कि पावरप्ले तक पर दांव लगाए जा रहे हैं। चर्चाओं के केंद्र में एक नाम पंकज आर्या लगातार उछल रहा है। आरोप है कि वह पूर्व में आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है और अब कथित तौर पर एक बड़े सट्टा सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और तस्वीरों में दिखाई जा रही कथित आलीशान जीवनशैली विदेश यात्राएं, महंगी गाड़ियां, ब्रांडेड परिधान ने युवाओं के बीच एक भ्रम पैदा किया है कि कम समय में बड़ी कमाई संभव है। सवाल यह है कि यह वैभव किस स्रोत से आया? क्या यह वैध कारोबार का परिणाम है या फिर अवैध सट्टा नेटवर्क की कमाई का हिस्सा? सूत्रों का दावा है कि छोटे दांव 100 या 500 रुपये से शुरू होकर 50 हजार रुपये या उससे अधिक तक पहुंच रहे हैं। बड़े मैचों में लाखों और करोड़ों रुपये तक की बाजी लगने की भी चर्चा है। कुछ जानकारों का कहना है कि करीब 150 से अधिक बुकी कथित तौर पर अलग-अलग जिलों में सक्रिय हैं। यदि यह सही है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि एक संगठित तंत्र का संकेत है। सबसे गंभीर प्रश्न प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को लेकर है। मुख्यमंत्री योगी कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात बार-बार कहते हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में इस तरह के आरोपों का उठना सरकार की छवि पर भी असर डाल सकता है। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
विश्लेषकों का कहना है कि सट्टा बाजार अब पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ग्रुप और विदेशी सर्वर के जरिए यह कथित नेटवर्क संचालित हो रहा है। यही कारण है कि निगरानी एजेंसियों के सामने तकनीकी चुनौती बढ़ गई है। लगातार बदलते सिमकार्ड, फर्जी बैंक खातों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की चर्चाएं इस नेटवर्क को और जटिल बनाती हैं। इस कथित कारोबार का सामाजिक असर भी चिंताजनक बताया जा रहा है। आरोप है कि कई युवा कर्ज में डूब गए, कुछ ने संपत्ति गिरवी रखी, तो कुछ को खाली वचन पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। सामाजिक अपमान और आर्थिक संकट की वजह से आत्महत्या जैसी घटनाओं की चर्चाएं भी सामने आई हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
यह मामला केवल अवैध सट्टेबाजी का नहीं, बल्कि शासन की विश्वसनीयता, डिजिटल अपराध की नई चुनौती और युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह संगठित अपराध का ऐसा चेहरा है जो कानून से तेज भाग रहा है। और यदि आरोप निराधार हैं, तो प्रशासन के लिए पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाब देना उतना ही आवश्यक है।

रोमांच बनाम अपराध का साया

क्रिकेट हमेशा से भारत में केवल खेल नहीं, बल्कि भावना रहा है। टी20 प्रारूप ने इसे और भी रोमांचक बना दिया। लेकिन जब हर गेंद दांव में बदल जाए और हर रन पैसों के तराजू पर तौला जाने लगे, तब खेल का उत्सव अपराध के साए में बदल जाता है। वाराणसी में कथित रूप से यही होता दिख रहा है। सूत्र बताते हैं कि सट्टेबाजी अब परंपरागत चौपालों या अंधेरी गलियों तक सीमित नहीं रही। यह मोबाइल स्क्रीन पर आ चुकी है। एन्क्रिप्टेड ऐप, निजी टेलीग्राम ग्रुप, व्हाट्सएप ब्रॉडकास्ट और विदेशी सर्वर से जुड़े प्लेटफॉर्म ये सब मिलकर एक ऐसा डिजिटल जाल बुन रहे हैं जिसे पकड़ना आसान नहीं।

एक नाम, कई सवाल

पंकज आर्या का नाम चर्चाओं में है। आरोप हैं कि वह पहले भी आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है। सोशल मीडिया पर उसके वीडियो और तस्वीरें लगातार साझा हो रही हैं। आलीशान गाड़ियां, विदेशी लोकेशन, महंगे होटल ये सब एक संदेश देते हैं सफलता। लेकिन सफलता का स्रोत क्या है? यदि यह वैध व्यापार है तो पारदर्शिता क्यों नहीं? और यदि अवैध नेटवर्क का हिस्सा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं? यही वे प्रश्न हैं जो जनता पूछ रही है।

युवाओं का फंसता भविष्य

सबसे चिंताजनक पहलू युवाओं की भागीदारी है। पढ़े-लिखे छात्र, नौकरी की तलाश में भटकते युवा, छोटे व्यापारी सभी तेज कमाई के झांसे में आ रहे हैं। 100 रुपये से शुरू हुआ दांव कब 50 हजार या उससे अधिक में बदल जाता है, पता नहीं चलता। आरोप है कि हारने के बाद कई लोगों को कर्ज पर कर्ज लेना पड़ा। कुछ ने सोना गिरवी रखा, कुछ ने जमीन के कागज। यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक विघटन का संकेत है।

पुलिस पर सवाल

सबसे बड़ा प्रश्न यही है क्या पुलिस को भनक नहीं? यदि नेटवर्क दर्जनों जिलों तक फैला है, तो स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र क्यों असफल दिख रहा है? सूत्रों कि मानें तो छापे से पहले सूचना लीक हो जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि आवश्यक है। पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान आने तक यह एकतरफा दावा ही माना जाएगा।

संगठित अपराध का ढांचा

सट्टा नेटवर्क की कार्यशैली संगठित अपराध जैसी बताई जा रही है। छोटे एजेंट, जिला स्तर के बुकी, ऊपर फाइनेंसर और उससे ऊपर कथित मास्टरमाइंड। पैसा हवाला या डिजिटल वॉलेट के जरिये घूमता है। सिमकार्ड बदलते हैं, खाते बदलते हैं, लेकिन नेटवर्क चलता रहता है। नेपाल, श्रीलंका और दुबई तक तार जुड़े होने की चर्चा करते हैं। यदि यह सच है, तो मामला केवल स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय आयाम वाला हो सकता है।

कोडीन और सट्टा दो जहर

पूर्वांचल में पहले भी कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध नेटवर्क की चर्चा रही है। नशे और सट्टे के ये दो समानांतर कारोबार युवाओं को दो तरफ से घेरते हैं। एक शरीर को खोखला करता है, दूसरा जेब और मानसिक संतुलन को। दोनों में समानताएं हैं संगठित ढांचा, तकनीकी इस्तेमाल और संरक्षण के आरोप।

प्रशासन की अग्निपरीक्षा

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की सख्त छवि के बीच यदि ऐसा नेटवर्क पनपता है, तो यह शासन के लिए चुनौती है। कार्रवाई केवल छापेमारी से नहीं होगी। डिजिटल ट्रैकिंग, वित्तीय जांच, साइबर विशेषज्ञता और सामाजिक जागरूकता इन सबका समन्वय आवश्यक है।

समाज के लिए चेतावनी

यह केवल कानून का मसला नहीं। यह समाज की आत्मा का प्रश्न है। तेज कमाई का भ्रम युवाओं को अंधे कुएं में धकेल रहा है। यदि आरोप सही हैं, तो कठोर कार्रवाई अनिवार्य है। और यदि आरोप गलत हैं, तो पारदर्शी जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए।

* वाराणसी में टी-20 विश्व कप 2026 के दौरान कथित सट्टा नेटवर्क सक्रिय होने के आरोप
* एक नाम पर केंद्रित चर्चा, आधिकारिक पुष्टि शेष
* डिजिटल प्लेटफॉर्म और विदेशी सर्वर से संचालन की आशंका
* युवाओं में बढ़ती प्रवृत्ति, कर्ज और सामाजिक संकट की खबरें
* पुलिस की भूमिका और सूचना तंत्र पर सवाल
* संगठित अपराध जैसा ढांचा, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की चर्चा
* प्रशासन के लिए तकनीकी और नैतिक चुनौती
* समाज और शासन दोनों के लिए चेतावनी संकेत

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button