प्रशिक्षु डीएसपी को सेवा, समर्पण और साहस का डीजीपी राजीव कृष्ण ने दिया संदेश,सेवा के दौरान किसी से न रखे क्लेश

* पुलिस मुख्यालय में 92वें बैच के प्रशिक्षुओं से संवाद
* 12 उपाधीक्षक 6 महिला, 6 पुरुष नई ऊर्जा का प्रतीक
* पुलिस सेवा गर्व ही नहीं, बड़ी जिम्मेदारी भी
* साइबर अपराध और डिजिटल साक्ष्य पर विशेष जोर
* 32 वर्षों के अनुभव से साझा की पेशेवर सीख
* सहानुभूति और प्रोफेशनलिज्म को बताया सफलता का मंत्र
* प्रशिक्षण के शेष 9 माह को बताया निर्णायक अवसर
* संवेदनशील, निष्पक्ष और जवाबदेह पुलिसिंग का आह्वान

लखनऊ। प्रदेश के पुलिस मुख्यालय में उस समय एक प्रेरक दृश्य देखने को मिला जब उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) के 92वें बैच के 12 प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों से भेंट कर उन्हें न केवल बधाई दी, बल्कि सेवा की मूल भावना का पाठ भी पढ़ाया। यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि अनुभव और ऊर्जा का संगम था। जहां 32 वर्षों की पुलिस सेवा का सार नए अधिकारियों के कंधों पर जिम्मेदारी के रूप में सौंपा गया। छः महिला और छः पुरुष प्रशिक्षुओं का यह संतुलित प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश पुलिस में बदलते सामाजिक परिदृश्य और लैंगिक समानता की दिशा में बढ़ते कदम का संकेत भी है। डीजीपी ने कहा कि पुलिस सेवा में शामिल होना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि जनसेवा के पथ पर एक गंभीर और उत्तरदायी प्रतिबद्धता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की चुनौतियां पूर्व की तुलना में कहीं अधिक जटिल और बहुआयामी हैं। साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी ने पुलिसिंग के स्वरूप को बदल दिया है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को याद दिलाया कि पुलिस की छवि के बारे में आम नागरिक के मन में जो धारणाएं बनती हैं, वे अक्सर अनुभवों, सोशल मीडिया और समाचारों से निर्मित होती हैं। लेकिन जब कोई स्वयं पुलिस का हिस्सा बनता है, तो उसे सही-गलत का वास्तविक आकलन करने और व्यवस्था को भीतर से समझने का अवसर मिलता है।


निरीक्षण से संवाद तक नेतृत्व की सक्रियता
डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस मुख्यालय का निरीक्षण करते हुए प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने प्रांतीय पुलिस सेवा के 92वें बैच के 12 प्रशिक्षु उपाधीक्षकों से भेंट की। यह संवाद औपचारिकता से आगे बढ़कर मार्गदर्शन का सत्र बन गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में पुलिस अधिकारी की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन, शांति और न्याय सुनिश्चित करने तक विस्तृत है।
नई पीढ़ी, नई चुनौतियां
डीजीपी ने अपने 32 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने सेवा शुरू की थी, तब अपराध का स्वरूप अलग था। आज साइबर अपराध, ऑनलाइन वित्तीय ठगी, डिजिटल धोखाधड़ी, सोशल मीडिया दुष्प्रचार और अंतरराज्यीय संगठित अपराध जैसी चुनौतियां सामने हैं। स्पष्ट किया कि विधि और अधिनियमों की गहरी समझ के बिना कोई अधिकारी प्रभावी नहीं बन सकता। साथ ही साइबर अन्वेषण, डिजिटल साक्ष्य के संरक्षण, फॉरेंसिक जांच और पारंपरिक साक्ष्य संकलन के बीच संतुलन आवश्यक है।
प्रोफेशनल नॉलेज सफलता की कुंजी
डीजीपी ने कहा कि वर्तमान समय में प्रोफेशनल नॉलेज ही पुलिस अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत है। विभाग और जनता दोनों की अपेक्षाएं बढ़ चुकी हैं। यदि अधिकारी अद्यतन ज्ञान और तकनीकी दक्षता से लैस नहीं होगा, तो वह बदलती परिस्थितियों में प्रभावी नहीं रह पाएगा। प्रशिक्षुओं को सुझाव दिया कि वे प्रशिक्षण के शेष नौ महीनों का उपयोग विधिक अध्ययन, केस स्टडी, फील्ड विजिट और कौशल विकास में करें।
हौसला और आत्मविश्वास
पुलिस सेवा में साहस और आत्मविश्वास की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि कई बार निर्णय ऐसे होते हैं जिनमें दबाव, जोखिम और आलोचना का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में अधिकारी का प्रशिक्षण, अनुभव और सकारात्मक सोच ही उसका संबल बनते हैं। कहा कि हौसला अभ्यास से विकसित होता है। हर चुनौती आपको बेहतर अधिकारी बनने का अवसर देती है।
संवेदनशीलता और जन-संपर्क
डीजीपी ने विशेष रूप से सहानुभूति और जन-संपर्क कौशल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी प्रत्येक पीड़ित के प्रति संवेदनशील रहेगा, तो जनता का विश्वास स्वतः अर्जित होगा। उन्होंने प्रशिक्षुओं को यह भी स्मरण कराया कि सेवा में आने से पहले एक आम नागरिक के रूप में पुलिस से जो अपेक्षाएं थीं त्वरित सुनवाई, निष्पक्षता, सम्मान अब उन्हें स्वयं पूरा करने का दायित्व है।
लैंगिक संतुलन नई तस्वीर
92वें बैच में छह महिला अधिकारियों की उपस्थिति पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारियों की भागीदारी पुलिस बल को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाती है।
प्रशिक्षण के शेष नौ माह निर्णायक समय
डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षण का यह चरण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि करियर की बुनियाद है। विधिक ज्ञान, व्यवहार कौशल, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को इसी समय मजबूत किया जा सकता है।
स्मृति चिन्ह और भविष्य की शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में पुलिस अकादमी की ओर से प्रशिक्षु उपाधीक्षक ने डीजीपी को स्मृति चिन्ह भेंट किया। डीजीपी ने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की प्रतिष्ठा और जनता का विश्वास बनाए रखना ही सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए।
* डीजीपी राजीव कृष्ण ने 92वें बैच के 12 प्रशिक्षु डीएसपी से की भेंट।
* पुलिस सेवा को बताया गर्व के साथ बड़ी जिम्मेदारी।
साइबर अपराध, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य पर विशेष जोर।
* प्रशिक्षण के शेष 9 माह को करियर की बुनियाद बताया।
* सहानुभूति, निष्पक्षता और त्वरित सुनवाई को पुलिसिंग का मूल मंत्र।
* 6 महिला व 6 पुरुष प्रशिक्षु लैंगिक संतुलन की सकारात्मक तस्वीर।
* प्रोफेशनल नॉलेज और आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी बताया।
* जनता का विश्वास अर्जित करना ही सर्वोच्च लक्ष्य।


