
* भाजपा के उम्मीदवार तृणमूल सेट कर रही
* बंगाल में पूरे घर की नौकरशाही को बदल देने का इरादा है चुनाव आयोग का
* ममता बोलीं- कम से कम हमसे तो सलाह ले लेते, लेकिन पूछा तक नहीं
* राज्य में 23 और 29 अप्रैल को होगा मतदान, 60 लाख वोटरों का भविष्य अधर में
* भाजपा ने जारी की 144 उम्मीदवारों की पहली सूची, विरोध में झंडे जलाए
* सुवेंदु के राट हैंड तृणमूल में आए, अब अपने बॉस के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव
कोलकाता। बंगाल के चुनाव का नाम आते ही यहां एक ही बात कही जाती है- पूरा देश एक तरफ और ममता बनर्जी दूसरी तरफ। वाकई, दिल्ली में एनडीए की पूरी सत्ता, चुनाव आयोग, समूची नौकरशाही, भाजपा/आरएसएस सभी मिलकर जिस एक व्यक्ति से लड़ने जा रहे हैं, उनका नाम है ममता बनर्जी। केंद्रीय चुनाव आयोग ने बंगाल में जैसे ही दो चरणों में चुनाव का ऐलान किया, उधर मीडिया के चैनलों ने पूर्वानुमान जताते हुए ममता बनर्जी की तृणमूल पार्टी को जीत दिला दी।
उसके बाद चुनाव आयोग ने भी राज्य के चीफ सेक्रेट्री, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को बदलकर यह दिखा दिया कि इन सभी का एक ही मकसद होगा किसी भी तरह से ममता बनर्जी को सड़क पर उतरने से रोकना। आगे यह माना जा रहा है कि बंगाल की आतंरिक सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस की टीम, भवानीपुर पुलिस स्टेशन, दक्षिण कोलकाता के पुलिस कमिशनर कार्यालय में बदलाव हो सकता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि चुनावी रैलियों के लिए ममता बनर्जी को हेलीकॉप्टर देने पर भी रोक लगाई जा सकती है। यही नहीं, भाजपा का गढ़ माने जाने वाले उत्तरी बंगाल में ममता को जाने से रोकने की भी कोशिश की जा सकती है।


चप्पल वाली है ममता
लेकिन बंगाल के लोग यह भी कहते हैं कि भाजपा और उनडीए को यह नहीं भूलना चाहिए कि बंगाली वोटर ममता में मां की छवि देखते हैं। उनकी सफेद साड़ी में लगी बंगाल की मिट्टी और उसके स्वभाव में मानुष, यानी इंसानियत को भी बखूबी पहचानते हैं। राज्य के 60 लाख वोटरों के मतदान का अधिकार अभी भी सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। कोर्ट अभी तक इस बात का निर्धारण नहीं कर पाया है कि इन लाखों लोगों को वोट डालने का अधिकार मिलेगा या नहीं, जिनके नाम में गड़बड़ी है और जिसे चुनाव आयोग अभी तक ठीक नहीं करा पाया है। माना जा रहा था कि चुनाव आयोग इस गड़बड़ी को दुरुस्त करवाने के बाद ही चुनाव का ऐलान करेगा। अगर गड़बड़ी दुरुस्त नहीं हुई तो 7 मई को राज्य विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने की तारीख को देखते हुए राज्य में थोड़े समय के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा। लेकिन मां-माटी-मानुष का पर्याय बन चुकी ममता बनर्जी को इससे होने वाले राजनीतिक फायदे को देखते हुए आयोग की ऐसा करने की हिम्मत नहीं हुई और चुनाव का ऐलान करा दिया गया। ममता बनर्जी ने राज्य के प्रशासनिक अमले को बदलने के चुनाव आयोग के कदम पर कोई सवाल नहीं उठाया, क्योंकि चुनाव की घोषणा होते ही माना जाता है कि सूबे का पूरा प्रशासन अनुच्छेद 324 के तहत आयोग के अधीन हो जाता है। ममता यह बखूबी जानती हैं कि राजनीति में शह और मात की बिसात पहले ही बिछ चुकी है। इस बिसात में केंद्र चाहे जितना भी दावा कर ले या उठापटक कर ले, मोहरे तो उन्हीं के बिछे हैं।
हमसे पूछा भी नहीं
सीएम ममता बनर्जी ने केंद्रीय चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि हालांकि, चुनाव का ऐलान हो जाने पर संविधान के अनुसार चुनाव आयोग का यह अधिकार बनता है कि वह राज्य में प्रशासनिक मशीनरी की जमावट अपने मुताबिक करे, लेकिन स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा में इसे लेकर राज्य सरकार से सलाह लिया जाना चाहिए, लेकिन सरकार से इस बारे में पूछा तक नहीं गया और रातों-रात अफसर बदल दिए गए। उन्होंने लिखा है कि परंपरा यही है कि चुनाव आयोग राज्य सरकार से 3 अफसरों का एक पैनल मांगेगा और उनमें से किसी एक का चुनाव नए ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए किया जाएगा। तृणमूल पार्टी के सूत्रों का कहना है कि असल में दिल्ली में बैठा एक व्यक्ति भारत के एक आला नेता से आदेश लेकर बंगाल में नए ट्रांसफर और पोस्टिंग करवा रहा है और पार्टी के नेता खामोशी ने उस नेता का नाम गृह मंत्री अमित शाह के रूप में लेते नहीं हिचकते।
भाजपा की पहली सूची का विरोध
बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव में कुल 152 सीट हैं। भाजपा ने पहले चरण में 144 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 41 वर्तमान और 3 पूर्व विधायकों को टिकट दिया गया है। पहले चरण में 152 सीटें आती हैं, जिनमें 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 93 और भाजपा ने 59 सीटें जीती थीं। अगर बीते लोकसभा चुनाव की बात करें तो इन्हीं 152 सीटों में से टीएमसी को 77 ओर भाजपा को 63 सीटें हासिल हुई थीं। 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण में 142 सीटें आती हैं और इसमें टीएमसी की ताकत अधिक मालूम होती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 123 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को इनमें से केवल 18 सीटें मिली थीं। बीते लोकसभा चुनाव में टीएमसी को इन 142 सीटों में से 115 और भाजपा को 27 सीटें मिली थीं। इससे साफ है कि बीते दो चुनाव में टीएमसी ने इन 142 सीटों पर अपना दबदबा बनाए रखा है। भाजपा की पहली सूची जारी होते ही पार्टी के भीतर असंतोष का आग भड़क उठी है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नेता को टिकट न मिलने से अलीपुरद्वार में झंडे लजलाकर अपने गुस्सा उतारा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस तरह की और भी घटनाएं सामने आ सकती हैं।
भाजपा की सूची में कई बड़े नाम
भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के रचयिता और महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार से संबंध रखने वाले सौमित्र चट्टोपाध्याय को नैहाटी से उम्मीदवार नामित किया गया है। बीजेपी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को खड़गपुर सदर से मैदान में उतारा है। बीजेपी ने अपनी फायरब्रांड महिला नेता अग्निमित्रा पॉल को आसनसोल दक्षिण से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है, जबकि पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। बीजेपी ने कालीगंज से बापन घोष, डायमंड हार्बर से दीपक कुमार हलदर, आसनसोल उत्तर से कृष्णेंदु मुकर्जी, हासन से निखिल बनर्जी, कूचबिहार उत्तर से सुकुमार रॉय और सिलीगुड़ी से शंकर घोष को मैदान में उतारा है। भाजपा की पहली लिस्ट में 57 ऐसे उम्मीदवार हैं जो प्रोफेशनल और सोशल बैकग्राउंड से आते हैं. पार्टी ने इन चेहरों को प्रमुखता देते हुए शिक्षा, सामाजिक सेवा और पेशेवर अनुभव वाले लोगों को मैदान में उतारा है। भगवा पार्टी ने छह वकीलों को भी मैदान में उतारा है। इनमें बिराज बिस्वास (करंदीघी), विद्युत कुमार रॉय (बालुरघाट), नारायण चंद्र मंडल (बसीरहाट उत्तर), बिलेश्वर सिन्हा (बरजोड़ा), जितेंद्र तिवारी (पांडाबेश्वर) और दिलीप कुमार घोष (बोलपुर) शामिल हैं। बीजेपी ने पांच डॉक्टरों को भी टिकट दिया है। इनमें डॉ. असित कुमार हलदर (पाथरप्रतिमा), डॉ. तरुण आदक (बज बज), डॉ. प्रणत टुडू (बिनपुर – ST), डॉ. बिजन मुखर्जी (जमुरिया) और डॉ. अजय कुमार पोद्दार (कुल्टी) शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी के मुताबिक इन उम्मीदवारों के जरिए समाज के विभिन्न पेशेवर और बौद्धिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है।
सुवेंदु के खास टीएमसी में
बंगाल भाजपा के टॉप नेता सुवेंदु अधिकारी के दाहिने हाथ माने जाने वाले पबित्र कर मंगलवार को टीएमसी में शामिल हो गए। टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उन्हें सदस्यता दिलाई। टीएमसी उन्हें नंदीग्राम ब्लॉक 2 से पार्टी का उम्मीदवार बनाने जा रही है, जो सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ खड़े होंगे। पबित्र ने 2021 और 2024 के चुनाव में इसी विधानसभा सीट पर भाजपा को लीड दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।



