मोदी सरकार ने चुनाव आयोग को बनाया अपना डॉगी, पीम साहब आप का डॉगी ज्ञानेश है बहुत “पाजी”
केंद्र के SIR ने बंगाल में 91 लाख वोटर उड़ाए, इनमें 63% हिंदू ; तृणमूल और भाजपा दोनों घबराए, गेंद अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में, सुनवाई 13 अप्रैल को

* भाजपा ने जारी किया भरोसा पत्र- रुपए बांटने और सातवां वेतनमान देने का वादा
* 40 से ज्यादा सीटों पर पड़ सकता है SIR का असर, ज्यादातर सीटें तृणमूल की
* ममता के मजबूत किलों को खतरा, कोलकाता में भाजपा को कड़ी टक्कर
* चुनाव आयोग ने फ्रीज की मतदाता सूचियां

कोलकाता/वाराणसी। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में SIR के घमासान के बीच भाजपा ने शुक्रवार को अपना भरोसा पत्र जारी किया। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस की नेता और राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने आम वोटरों से 10 प्रतिज्ञा की थी। भाजपा के भरोसा पत्र में एक से पांच तारीख के भीतर हर महिला के खाते में तीन हजार रुपये ट्रांसफर करने, आयुष्मान भारत समेत सभी केंद्रीय योजनाएं बंगाल में लागू करने, छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा कि बंगाल की सीमाओं को घुसपैठ के लिए सील करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि एक भी गौ माता की तस्करी भारत के बाहर न हो।
इस बीच, केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्य की वोटर लिस्ट में 91 लाख से अधिक वोटरों के नाम काटने के बाद मतदाता सूचियों को फ्रीज कर दिया है। इसका मतलब है कि राज्य की वोटर लिस्ट में अब न तो नाम जुड़ेंगे और न ही नाम काटे जा सकेंगे। शुक्रवार को इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में गरमागरम बहस हुई। कोर्ट में एक नई याचिका लगाई गई है, जिसमें कहा गया है कि वोट डालना देश के हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे इस तरह से छीना नहीं जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट SIR से संबधित सभी याचिकाओं पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अब गेंद पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के पाले में है।


बंगाल को सातवें वेतनमान का लालच
अमित शाह ने अपनी पार्टी के संकल्प पत्र में सरकार बनाने के 45 दिन के भीतर सभी सरकारी कर्मचारियों को सातवां वेतनमान देने का वादा किया है। उन्होंने राज्य के बेरोजगार युवाओं को 3 हजार रुपए मासिक भत्ता देने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी यकीन दिलाया। शाह ने पहले सौ दिन में राज्य के औद्योगिक विकास का रोडमैप बनाने, उत्तर बंगाल का औद्योगिक विकास करने, दार्जिलिंग की चाय को विश्व प्रसिद्ध बनाने के लिए प्रयास करने जैसे वादे किए हैं। उन्होंने कहा कि हम ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार के 15 साल पर श्वेतपत्र लाएंगे. यह श्वेतपत्र दो हिस्सों में होगा। अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार घुसपैठ को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर आगे बढ़ेगी। मैं पश्चिम बंगाल की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनवाइए। हम घुसपैठियों को बाहर निकालकर देश और बंगाल को सुरक्षित बनाने का काम करेंगे। शाह ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों का बकाया डीए भुगतान भी सुनिश्चित किया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि यह संकल्प पत्र भरोसे का है। यह सोनार बांग्ला के निर्माण का भरोसा है। उन्होंने कहा कि इस भरोसे के आधार पर रचनात्मक रूप से चुनाव में जाना चाहते हैं।
मुसलमान, महिलाओं और गरीब वोटरों पर SIR की मार
मुसलमान, गरीब और महिला वोटर तृणमूल कांग्रेस के कोर वोटर रहे हैं और SIR की प्रक्रिया में इन तीनों वर्गों के वोटरों के नाम बहुतायत में काटे गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के कई मजबूत गढ़ SIR के बाद कमजोर हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या वर्तमान में 90,83,345 है। मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अधिसूचना जारी होने से पहले, राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी। पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित मतदाताओं की मसौदा सूची में, कुल 58,20,899 नाम हटाए गए थे। 28 फरवरी को जारी की गई अंतिम वोटर लिस्ट में, हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर 63,66,952 हो गई है। सबसे ज्यादा वोटर मुर्शिदाबाद से हटाए गए हैं, जिनकी कुल संख्या 4,55,137 है। इसके बाद उत्तर 24 परगना का नंबर आता है। जहां 3,25,666 नाम हटाए गए हैं।
63 प्रतिशत हिंदुओं के नाम काट दिए
तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि हटाए गए नामों में 63% हिंदू हैं, जिससे भाजपा असहज है। तृणमूल के आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में हटाए गए 58 लाख नामों में 44 लाख हिंदू थे, जबकि मुस्लिम नामों की संख्या करीब 13.5 लाख थी। दूसरे चरण में कटे 5.5 लाख नामों में से 5.28 लाख हिंदू नाम थे। हालांकि, तीसरे चरण में हटाए गए 27 लाख नामों में मुस्लिम समुदाय की संख्या अधिक (17.5 लाख) रही। कुल मिलाकर, हिंदू-मुस्लिम नामों के कटने का अनुपात 2:1 का है। जानकारों का मानना है कि मतुआ बहुल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हिंदू नाम हटने से आगामी चुनावों में भाजपा के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। SIR के बाद 27.16 लाख मतदाताओं को अयोग्य घोषित किया गया। इनमें से लगभग आधे उन जिलों से हैं, जहां टीएमसी ने 2021 चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी। साल 2021 में टीएमसी ने 215 में से 110 सीटें सिर्फ 5 जिलों- दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्दवान और हावड़ा से जीती थीं। पूरे राज्य में कुल 27.16 लाख में से 13.45 लाख (लगभग 49.53%) वोटर सिर्फ इन्हीं 5 जिलों से हैं। इन 5 जिलों में कुल 118 विधानसभा सीटें हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 में जिन 7 जिलों दार्जिलिंग, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, बांकुड़ा और पूर्व मेदिनीपुर में बीजेपी ने टीएमसी के मुकाबले ज्यादा वोट हासिल किए थे, वहां की मतदाता सूची में अयोग्य मतदाता कम पाए गए। बीजेपी के प्रभाव वाले इन सभी 7 जिलों को मिलाकर 2.64 लाख (10%) वोटर ही अयोग्य घोषित हुए।
कोलकाता में भाजपा को भारी टक्कर
SIR के तहत तृणमूल का गढ़ माने जाने वाले कोलकाता की सभी 11 विधानसभा सीटों से लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह संख्या 2024 के लोकसभा चुनाव के जीत-हार के अंतर से कहीं ज्यादा है। ऐसे में माना जा रहा है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। चौरंगी सीट से 80,000 से ज्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। तीन दूसरी सीटों से हर एक से 70,000 से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए गए हैं। एक सीट से 60,000 से ज्यादा, दो सीटों पर हर एक से 50,000 से ज्यादा और बाकी चार सीटों पर हर एक से 40,000 से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए गए हैं। सबसे कम नाम ‘मानिकतला’ से हटाए गए हैं, जिनकी संख्या 42,603 है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के क्षेत्र भवानीपुर में लगभग 47,000 वोट हटाए गए हैं, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां टीएमसी की बढ़त केवल 8,297 वोटों की थी। इसका मतलब है कि यहां मामूली सा स्विंग भी नतीजे बदल सकता है। इस बार BJP के बड़े नेता सुवेंदु अधिकारी इस सीट से ममता बनर्जी को टक्कर देंगे।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान एक वकील ने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों की अपील अभी भी अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है जबकि चुनाव आयोग ने गुरुवार, 9 अप्रैल को मतदाता सूची को फ्रीज कर दिया है। गुरुवार आधी रात को आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए दूसरी और अंतिम मतदाता सूची फ्रीज कर दी गई जबकि वादे के मुताबिक 19 ट्रिब्यूनल कभी अस्तित्व में नहीं आ पाए। निर्णय प्रक्रिया के बाद ‘हटाए गए’ 27,16,393 नामों में से केवल दो मामलों में ही सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें सूची में शामिल किया गया। गुरुवार तक ट्रिब्यूनल में सुनवाई के लिए ऑनलाइन 2 लाख से अधिक अपीलें प्राप्त हो चुकी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कुछ श्रेणियों के हटाए गए मतदाताओं को मतदान की अनुमति देने या मतदाता सूची को फ्रीज न करने की मांग की गई थी।
यूपी: SIR की फाइनल लिस्ट में घटे 2.04 करोड़ वोटर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2.04 करोड़ मतदाता घट गए। यह स्थिति तब है जब इस दौरान 84 लाख 28 हजार 767 नए नाम बढ़े हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने शुक्रवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की। इसमें कुल 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता हैं। इसमें 54.54 प्रतिशत पुरुष हैं, जबकि 45.46 प्रतिशत महिलाएं हैं। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की लखनऊ कैंट सीट पर सबसे ज्यादा 34.18 प्रतिशत नाम कटे हैं।
साढे 3 लाख ने नहीं दिया नोटिस का जवाब
इसमें कुल 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता हैं। इसमें 54.54 प्रतिशत पुरुष हैं, जबकि 45.46 प्रतिशत महिलाएं हैं। सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि 6 जनवरी के बाद से मतदाता सूची से 8 लाख 15 हजार 996 नाम सूची से बाहर किए गए। इनमें 3 लाख 50 हजार 436 ऐसे मतदाता थे, जो नोटिसों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके अलावा 328350 अपने स्थान से अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित मिले। 79076 पहले से कहीं और के मतदाता (ऑलरेडी एनरोल्ड) थे। 55865 की मृत्यु हो चुकी थी। जबकि 2269 नागरिक न होने और 18 वर्ष से कम होने के कारण बाहर किए गए।
कुल मतदाता : 133984792
पुरुष मतदाता : 73071061
महिला मतदाता : 60909525
थर्ड जेंडर : 4206
18-19 आयु वर्ग के मतदाता : 1763360
स्त्री पुरुष अनुपात- 1000 : 834
पांच जिले, जहां सर्वाधिक मतदाता कम हुए
लखनऊ : 914185
प्रयागराज : 826885
कानपुर नगर : 687201
आगरा : 637653
गाजियाबाद : 574478
पांच जिले, जहां प्रतिशत में सर्वाधिक मतदाता कम हुए
लखनऊ : 22.89%
गाजियाबाद : 20.24%
कानपुर नगर : 19.42%
गौतमबुद्धनगर : 19.33%
मेरठ : 18.75%
समाजवादी पार्टी के वोट कटवाए- अखिलेश
समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने यूपी में एसआईआर की फाइनल लिस्ट पर कहा कि बीजेपी जब मुद्दों से हारने लगती है तो वह इंस्टीट्यूशंस के पीछे छिपकर वार करती है। बीजेपी ईडी-इनकम टैक्स और सीबीआई के नाम पर भी पूरी तरह एक्सपोज हो चुकी है। बीजेपी चुनाव आयोग से मिलकर चुनाव लड़ती है। यूपी के उपचुनाव में वोटों की लूट और डकैती हुई थी। एसआईआर के नाम पर फर्जी दस्तखत के जरिए समाजवादी पार्टी के वोट कटवाए गए हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि शिकायतों के बावजूद चुनाव आयोग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। इन सबके बावजूद बीजेपी को जैसे लोकसभा में हराया, वैसे ही 27 के चुनाव में भी हराएंगे। बीजेपी वाले अभी यह समझ नहीं पा रहे हैं। जहां बीजेपी है, वहां पीड़ा है और जहां पीड़ा है, वहां पीडीए है। पीडीए सामाजिक न्याय का राज लाने के लिए काम करता रहेगा। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा अंतिम मतदाता सूची की घोषणा के तुरंत बाद शुक्रवार को लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान अखिलेश ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
लिस्ट में अपना नाम ऐसे खोजें
उत्तर प्रदेश की फाइनल वोटर लिस्ट में आप अपना नाम तीन तरीकों से खोज सकते हैं। पहला तरीका एपिक नंबर के जरिए तलाशने का है। दूसरे तरीके के तहत आपको अपनी कुछ डिटेल भरनी होगी और तीसरा तरीके में आप अपने मोबाइल नंबर से नाम खोज सकते हैं। अगर आपका नाम चुनाव आयोग की तरफ से जारी फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं है, तो आपको फॉर्म 6 भरना होगा। फॉर्म 6 ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरा जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले आप चुनाव आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं। यहां New Voter Registration के कॉलम में आपको दोनों विकल्प मिल जाएंगे। यहां से आप फॉर्म नंबर 6 डाउनलोड भी कर सकते हैं।
वोटर लिस्ट ऐसे हासिल करें
अगर आप वोटर लिस्ट डाउनलोड करना चाहते हैं तो इसका तरीका बेहद आसान है। सबसे पहले आप चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद इस लिंक https://voters.eci.gov.in/download-eroll पर क्लिक करें। नई विंडो खुलने पर राज्य सेक्शन में उत्तर प्रदेश चुनें, साल सेक्शन में 2026 चुनें और रोल टाइप में SIR FinalRoll – 2026 सेलेक्ट करें। ये सब करने के बाद अपना जिला, विधानसभा और भाषा चुनें। कैप्चा कोड डालें। सबसे आखिर में अपनी भाग संख्या चुनने के बाद Download Selected PDFs पर क्लिक कर वोटर लिस्ट डाउन लोड कर लें।



