
– केंद्रीय मंत्रियों, दिल्ली सरकार के मंत्री समेत भाजपा नेता भी शामिल
– केंद्र सरकार ने गैरकानूनी रूप से आयोजकों को दिए 63 लाख रुपए
– भारत से मुस्लिम आबादी को पाकिस्तानी बताकर खदेड़ने की हुई मांग
– अभी एक लाख हिंदू सम्मेलनों का आयोजन कराएगी आरएसएस

नई दिल्ली। मुसलमानों के खिलाफ हिंदू संगठनों के आग उगलते सम्मेलनों का प्रायोजन अमूमन दक्षिणपंथी संगठन करते आए हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि इस तरह के किसी अलगाववादी कार्यक्रम का खर्च केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने खुद उठाया हो और वह भी देश की राजधानी दिल्ली में सत्ता की नाक के ठीक नीचे।दिल्ली में बीते साल 13-14 दिसंबर को सनातन संस्था ने भारत मंडपम में सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्व का आयोजन किया गया था। इसमें भारत की 25 फीसदी मुस्लिम आबादी को खदेड़ने और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग की गई। जहर उगलने वाले भाषण दिए गए और नफरत से भरे इस कार्यक्रम के लिए केंद्र की नरेद्र मोदी सरकार ने 63 लाख रुपए का फंड दिया।
केंद्रीय मंत्रियों ने हिस्सा लिया था
केंद्र की मोदी सरकार के इस प्रायोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, श्रीपाद नाइक और संजय सेठ के अलावा दिल्ली सरकार में पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने भी भाग लिया था। एक अंग्रेजी मीडिया प्लैटफॉर्म ने इसके बाद केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी कि क्या इस कार्यक्रम के लिए कोई सरकारी फंड मिला या नहीं ? मालूम चला कि केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के लिए 63 लाख रुपए का फंड सनातन संस्था को दिया गया था। खुद केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इसका लिखित जवाब दिया है।

नफरती भाषणों के लिए मिला चंदा
इस मामले के सामने आने के बाद दिल्ली के पर्यटन मंत्री चुप्पी साध गए हैं। उन्होंने सरकारी प्रायोजन से मुस्लिम विरोधी इस कार्यक्रम को लेकर किसी भी सवाल का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। कार्यक्रम के मंच से वक्ताओं ने मुस्लिमों को लेकर किस कदर जहर उगला, इसकी एक बनगी देखिए। एक दक्षिणपंथी टीवी चैनल के संचालक सुरेश चव्हाणके ने भारत में रह रहे 25 फीसदी मुसलमानों को घुसपैठिया, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी और अफगानी बताकर उन्हें एनआसी के माध्यम से देश से बाहर करने की वकालत की। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि भारत में मुसलमानों की जनसंख्या पर एक सीमा तक रोक लगनी चाहिए।
वक्ताओं के बिगड़े बोल
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने अपने भाषण में कहा कि अगर भारत का हर एक हिंदू एक मुसलमान को घर वापसी, यानी धर्म परिवर्तन का टारगेट बना ले तो सारे मुसलमान हिंदू धर्म अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में हजारों व्यापारी है। अगर वे सभी अपने मुसलमान कर्मियों का धर्म परिवर्तन करा सकते हैं। हिंदू फंड के नेता राहुल दीवान ने कहा कि हमें अपनी रणनीति को आक्रामक बनाना होगा। हमें भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र बनाना होगा। अगर मुसलमान अपने लड्डुओं में अमोनियम नाइट्रेट मिलाकर हिंदुओं को खिला दें तो लाखों लोग मारे जाएंगे। ऐसे ही कई वक्ताओं ने दो दिन तक चले इस आयोजन में नफरत से भरे भाषण दिए। इसके बावजूद दिल्ली सरकार के पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय जवाब देने को तैयार नहीं है।
करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग
सवाल यह नहीं है कि दो दिन के इस कार्यक्रम के लिए 63 लाख रुपए का चंदा कम है या नहीं। मूल सवाल यह है कि इस तरह के सांप्रदायिक आयोजन को आम लोगों के टैक्स के पैसे से करवाना कितना जायज है? केंद्र सरकार का एक मंत्रालय ऐसे किसी भी आयोजन के लिए फंड कैसे जारी कर सकता है और किस नियम के तहत इतनी बड़ी धनराशि जारी की गई ?
एक लाख हिंदू सम्मेलनों का होगा आयोजन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर एक लाख से अधिक हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इन सम्मेलनों में सामाजिक समरसता और एकता पर जोर देने की बात कही गई है। लेकिन इसका दुरुपयोग कट्टर हिंदू संगठन अपने मुस्लिम विरोधी एजेंडा को सेट करने के लिए कर रहे हैं। हालांत इसलिए चिंताजनक हैं, क्योंकि केंद्र और राज्यों की भाजपा सत्ता, पुलिस और प्रशासन से लेकर आरएसएस तक ऐसे भड़काऊ सम्मेलनों पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। दिल्ली के भारत मंडपम में हुए सम्मेलन को फंडिंग देकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने यह साबित कर दिया है कि इस मामले में बिना कुछ बोले भी वह दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों के साथ है।
संस्कृति और अध्यात्म के नाम पर कट्टरवाद
दिल्ली में बीते दिसंबर का हिंदू सम्मेलन सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन और सनातन संस्था ने अपने हीरक जयंती के मौके पर किया था। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय संस्कृति तथा आध्यात्मिक मूल्यों को केंद्र में रखकर किया गया था। लेकिन इसमें घातक हथियारों की प्रदर्शनी और उनकी खुलेआम नुमाइश की गई थी। प्रदर्शनी हॉल 12 में 13 से 15 दिसंबर तक एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था, जिसमें घातक हथियारों को दिखाया गया था। सम्मेलन में वक्ताओं के भड़काऊ भाषणों और साथ में हथियारों की प्रदर्शनी कहीं न कहीं सरकारी पैसे से लोगों को सांप्रदायिकता के लिए उकसाने का भी काम करती है। भारत के संविधान के मुताबिक, यह पूरी तरह से गैरकानूनी है और इसे रोकना सरकार और पुलिस-प्रशासन जैसी एजेंसियों की जिम्मेदारी है। लेकिन ये सभी दो दिन के कार्यक्रम में बिल्कुल निष्क्रिय रहीं, जिससे यह बात साफ हो गई कि दिल्ली सरकार ने इस कार्यक्रम में आयोजकों का पूरा सहयोग किया।

