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सीपी मोहित अग्रवाल के आदेश की उड़ी धज्जियां,कानून के जिम्मेदार बटोर रहे नोटों की गड्डियां

पुलिस आयुक्त का आदेश कूड़ेदान में, सारनाथ थाने की मनमानी से सड़क बनी बारातघर

* एंबुलेंस फंसी जाम में तड़पता रहा मरीज

* सड़क को पार्किंग बनाकर चल रहा अवैध लान, पुलिस मूकदर्शक

* पुलिस आयुक्त के सख्त निर्देशों को सारनाथ थाने ने बनाया मजाक

* जाम में फंसी एंबुलेंस, पर लान संचालक के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी

* शिकायत पर थानाप्रभारी ने काट दिया फोन, कार्रवाई शून्य

* डीसीपी के निर्देश के बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर

* पंचक्रोशी रोड पर हर बारात में घंटों लगता है जाम

* कॉलेज परिसर में अवैध रूप से चल रहा लान, प्रशासन मौन

* पुलिस की निष्क्रियता से जनता का भरोसा डगमगाया

वाराणसी। पीएम के संसदीय क्षेत्र में कानून का राज चलेगा या स्थानीय पुलिस की मनमानी यह सवाल एक बार फिर सारनाथ क्षेत्र की घटना ने खड़ा कर दिया है। पुलिस आयुक्त द्वारा जारी सख्त निर्देशों के बावजूद पंचक्रोशी रोड स्थित पैगम्बरपुर में एक अवैध लान संचालक खुलेआम सड़क को पार्किंग में बदलकर प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक तथ्य यह है कि इस पूरे मामले में सारनाथ थाना प्रभारी की भूमिका गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। विगत दिनों पुलिस आयुक्त ने शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम और विवाह समारोहों के दौरान सड़कों पर अवैध पार्किंग की समस्या को देखते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किया था कि कोई भी लान संचालक सड़क पर वाहनों की पार्किंग नहीं कराएगा। प्रत्येक लान संचालक को अपने परिसर में पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो संबंधित लान संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यह आदेश सारनाथ क्षेत्र में कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है। पंचक्रोशी रोड के पैगम्बरपुर इलाके में स्थित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के परिसर में अवैध रूप से लान संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि कॉलेज के प्रबंधक महेंद्र जायसवाल द्वारा लंबे समय से इस परिसर में विवाह समारोह आयोजित कराए जाते हैं, लेकिन पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की जाती। नतीजतन शादी-समारोह में आने वाले सैकड़ों वाहन सीधे सड़क पर खड़े कर दिए जाते हैं और पूरी सड़क जाम में तब्दील हो जाती है। 27 फरवरी 2026 की रात यह स्थिति भयावह रूप ले चुकी थी। लगभग रात 8 बजे कॉलेज परिसर में चल रहे वैवाहिक समारोह के दौरान पंचक्रोशी रोड पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सड़क के दोनों तरफ कारों और अन्य वाहनों की अवैध पार्किंग के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इसी दौरान ‘अचूक संघर्ष’ के संपादक अमित मौर्या किसी अत्यंत आवश्यक कार्य से वहां से गुजर रहे थे, लेकिन जाम इतना भीषण था कि वे करीब एक घंटे तक वहीं फंसे रहे। स्थिति तब और भयावह हो गई जब एक एंबुलेंस भी इसी जाम में फंस गई। एंबुलेंस में एक गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को परिजन अस्पताल ले जा रहे थे। परिजनों ने कई बार लान संचालक और वहां मौजूद लोगों से अनुरोध किया कि वाहनों को हटाकर रास्ता साफ कराया जाए, लेकिन आरोप है कि किसी ने भी मानवीय संवेदना नहीं दिखाई। एंबुलेंस में मरीज की हालत बिगड़ती रही और सड़क पर खड़े वाहनों की वजह से उसे रास्ता नहीं मिल सका। जब हालात असहनीय हो गई तो अचूक संघर्ष के संपादक ने इस पूरे मामले की सूचना तत्काल सारनाथ थाना प्रभारी को मोबाइल फोन के माध्यम से दी। शिकायत में पुलिस आयुक्त के आदेश का हवाला देते हुए अवैध पार्किंग और जाम की स्थिति की जानकारी दी गई तथा लान संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। लेकिन आरोप है कि थानाप्रभारी ने शिकायत सुनने के बजाय फोन ही काट दिया। इसके बाद मामले की सूचना वरुणा जोन के डीसीपी को दी गई। उन्होंने बताया कि सारनाथ थाना प्रभारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद आज तक न तो कोई प्राथमिकी दर्ज हुई और न ही लान संचालक के खिलाफ कोई वैधानिक कार्रवाई की गई। इस पूरे प्रकरण ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि यदि निचले स्तर पर ही आदेशों की अवहेलना होने लगे तो कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता किस तरह प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस आयुक्त के स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिक आखिर किससे न्याय की उम्मीद करे।

आदेश ऊपर से, मनमानी नीचे से

वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद यह दावा किया गया था कि अब शहर में कानून व्यवस्था और ट्रैफिक नियंत्रण की स्थिति पहले से बेहतर होगी। पुलिस आयुक्त के स्तर से लगातार दिशा-निर्देश भी जारी किए जाते रहे हैं ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों को झुठलाती नजर आती है। सारनाथ क्षेत्र की यह घटना इसी विडंबना का ताजा उदाहरण बनकर सामने आई है। पुलिस आयुक्त के स्पष्ट आदेश के बावजूद सड़क को पार्किंग में बदल देना और उसके बाद भी पुलिस का निष्क्रिय रहना इस बात का संकेत है कि आदेश जारी करना एक बात है और उसे लागू कराना दूसरी।

कॉलेज परिसर बना अवैध बारातघर

पंचक्रोशी रोड के पैगम्बरपुर इलाके में स्थित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स का नाम शिक्षा संस्थान के रूप में दर्ज है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलेज परिसर का इस्तेमाल लंबे समय से विवाह समारोह और अन्य आयोजनों के लिए किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस आयोजन के लिए न तो पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था है और न ही ट्रैफिक नियंत्रण की कोई योजना। जब भी यहां विवाह समारोह होता है, सैकड़ों वाहन सीधे सड़क पर खड़े कर दिए जाते हैं।
नतीजतन पंचक्रोशी रोड पूरी तरह जाम की गिरफ्त में आ जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह समस्या नई नहीं है। लगभग हर विवाह समारोह के दौरान यही स्थिति बनती है।

27 फरवरी की रात सड़क बन गई पार्किंग

27 फरवरी 2026 की रात भी कुछ ऐसा ही हुआ। कॉलेज परिसर में एक भव्य वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में सैकड़ों मेहमान पहुंचे और उनके वाहन सीधे सड़क पर खड़े कर दिए गए। कुछ ही देर में पंचक्रोशी रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सड़क इतनी संकरी हो गई कि दोपहिया वाहन भी मुश्किल से निकल पा रहे थे।

जाम में फंसी एंबुलेंस

इसी बीच एक एंबुलेंस भी उसी रास्ते से गुजर रही थी। एंबुलेंस में गंभीर रूप से बीमार मरीज को अस्पताल ले जाया जा रहा था। परिजनों ने कई बार आसपास खड़े लोगों से रास्ता साफ करने की गुहार लगाई, लेकिन कथित रूप से लान संचालक और कार्यक्रम से जुड़े लोगों ने कोई विशेष पहल नहीं की। जो न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण था, बल्कि मानवीय संवेदनहीनता का भी।

शिकायत पर पुलिस की बेरुखी

स्थिति बिगड़ती देख मामले की सूचना तत्काल सारनाथ थाना प्रभारी को दी गई। उनसे अपेक्षा की गई कि वे पुलिस आयुक्त के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करेंगे।
लेकिन आरोप है कि उन्होंने शिकायत सुनने के बजाय फोन ही काट दिया।

डीसीपी तक पहुंची शिकायत

जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो मामला वरुणा जोन के डीसीपी तक पहुंचा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सारनाथ थाना प्रभारी को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

क्यों नहीं दर्ज हुई एफआईआर

सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस आयुक्त के स्पष्ट आदेश के बावजूद एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई।
क्या स्थानीय पुलिस पर किसी का दबाव है। क्या अवैध लान संचालन के पीछे कोई प्रभावशाली नेटवर्क काम कर रहा है। ये सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं।

जनता का भरोसा टूट रहा

जब आम नागरिक देखता है कि उसकी शिकायत पर भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो उसके मन में व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होना स्वाभाविक है। इस मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। यह पूरा प्रकरण पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है। यदि शीर्ष स्तर से जारी आदेशों का पालन निचले स्तर पर नहीं होगा, तो व्यवस्था की साख पर असर पड़ना तय है।

* पुलिस आयुक्त के आदेश के बावजूद अवैध पार्किंग
* कॉलेज परिसर में बिना अनुमति चल रहा लान
* सड़क पर खड़े वाहनों से लगता है घंटों जाम
* एंबुलेंस जाम में फंसी, मरीज की हालत गंभीर
* शिकायत पर थानाप्रभारी ने काट दिया फोन
* डीसीपी के निर्देश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
* पुलिस की निष्क्रियता से जनता में आक्रोश
* प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना

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