परिवहन मंत्री दयाशंकर का एलान, गाँव गाँव बसें पहुँचेगी श्रीमान
योगी सरकार का ‘कनेक्टेड यूपी’ मिशन, अब सफर नहीं रहेगा मुश्किल

● गांवों से शहर तक अब हर सफर होगा आसान
● सिर्फ बसें नहीं, उम्मीदें भी चलेंगी सड़कों पर
● एयरपोर्ट जैसी सुविधा, गांव के यात्रियों के लिए भी
● डिजिटल सेवा से पारदर्शिता और सुविधा दोनों
● हरित परिवहन ई-बसों से बदलेगा यात्रा अनुभव
● गांवों में आएगा रोजगार, बढ़ेगी आवाजाही
● ‘वन स्टेट, वन ट्रांसपोर्ट नेटवर्क’ भविष्य की दिशा
● उत्तर प्रदेश बनेगा देश का ट्रांसपोर्ट मॉडल राज्य
◆ कंचन सिंह
बलिया। उत्तर प्रदेश में विकास की गाड़ी अब सचमुच सड़क पर उतर आई है। वो गांव, जो अब तक सरकारी योजनाओं की फाइलों में ही दर्ज थे, अब बस की आवाज और इंजन की गूंज सुनेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ग्रामीण कनेक्टिविटी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बलिया में घोषणा की कि प्रदेश के 12,200 गांवों को अगले एक साल के भीतर रोडवेज बस सेवा से जोड़ा जाएगा। यह सिर्फ परिवहन विस्तार नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की दिशा में एक बड़े सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत है। अब गांव का किसान, छात्र, मजदूर या महिला किसी को भी शहर तक पहुंचने के लिए निजी गाड़ियों या ठेले-टेम्पो पर निर्भर नहीं रहना होगा। योगी सरकार के इस निर्णय से उत्तर प्रदेश की सड़क परिवहन व्यवस्था एक नए युग में प्रवेश कर रही है।
गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा सफर बनेगा आसान
अब तक जहां रोडवेज की बसें नहीं पहुंची थीं, वहां सरकार ने विकास का पहिया घुमा दिया है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया कि अगले एक वर्ष में 12,200 गांवों को परिवहन सुविधा से जोड़ दिया जाएगा। इसका मतलब है कि लाखों ग्रामीणों को अब मुख्यधारा के शहरों, बाजारों और अस्पतालों से सीधा संपर्क मिलेगा। यह सिर्फ यात्रा की सुविधा नहीं बल्कि ‘समान अवसर’ की गारंटी है शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के लिए ग्रामीण जनता अब परिवहन की कमी से नहीं जूझेगी।
रोडवेज का पुनर्जागरण बसों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि
जब दयाशंकर सिंह ने कार्यभार संभाला था, उस समय उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के पास केवल 8,500 बसें थीं। आज यह संख्या बढ़कर 14,000 से अधिक हो गई है। यह विस्तार यूपी रोडवेज को देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन संस्थाओं में शामिल कर रहा है।
बसों की औसत उम्र भी अब मात्र 5.25 वर्ष है, जो किसी भी राज्य परिवहन निगम के लिए उत्कृष्ट मानक है।
एयरपोर्ट जैसे बनेंगे 23 बस स्टेशन यात्रियों को मिलेगा नया अनुभव
राज्य सरकार ने 23 बस स्टेशनों को एयरपोर्ट मॉडल पर विकसित करने का निर्णय लिया है। इनमें से कई स्टेशनों पर निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। लखनऊ के गोमतीनगर बस स्टेशन को ‘देश का सबसे खूबसूरत बस स्टेशन’ कहा जा रहा है, जबकि चारबाग बस अड्डा 1000 करोड़ की लागत से आधुनिकीकृत किया जा रहा है। ये बस स्टेशन सिर्फ यात्रा का ठिकाना नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधा का नया प्रतीक बनेंगे।
इलेक्ट्रिक बसें अब गांवों तक हरित परिवहन की नई राह
योगी सरकार अब ई-बसों को ग्रामीण और इंटर-सिटी रूट्स पर भी चलाने जा रही है। पहले चरण में 45 जिलों में इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी, और दूसरे चरण में सभी 75 जिलों में यह सेवा विस्तार पायेगी। इससे न केवल डीजल खर्च और प्रदूषण में भारी कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण परिवहन नेटवर्क पर्यावरण के अनुकूल बनेगा। यह कदम उत्तर प्रदेश को हरित परिवहन की दिशा में अग्रणी बनाएगा।
डिजिटल इंडिया के संग यूपी परिवहन का डिजिटलीकरण
प्रदेश के 1.5 लाख जन सेवा केंद्रों को परिवहन विभाग से जोड़ दिया गया है। अब लोग मात्र 30 रुपए शुल्क देकर इन केंद्रों से 49 प्रकार की परिवहन सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। चालान भुगतान, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, टैक्स भुगतान सबकुछ गांव स्तर पर संभव हो गया है। इससे आमजन को अब जिला परिवहन कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।
बस अड्डों का उन्नयन यात्रियों को मिलेगा शहरी स्तर की सुविधा
राज्य सरकार 54 और बस स्टेशनों को अपग्रेड करने की योजना पर काम कर रही है। प्रतीक्षालय, साफ-सुथरे शौचालय, डिजिटल टिकटिंग, फूड कोर्ट, चार्जिंग पॉइंट, और सुरक्षा कैमरों जैसी सुविधाएं अब हर प्रमुख बस अड्डे पर होंगी। यह सुधार यूपी के बस अड्डों को देश के टॉप-ग्रेड ट्रांजिट हब्स में बदल देगा।
रोजगार और स्थानीय विकास बस सेवा बनेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी
बसों का गांवों तक जाना केवल यात्रा सुविधा नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के पुनर्जागरण का सूत्रधार है। बस स्टॉप बनेंगे तो छोटे होटल, दुकानों और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ग्रामीण उत्पाद अब आसानी से बाजार तक पहुंच सकेंगे। यह योजना ग्रामीण आत्मनिर्भरता को भी गति देगी।
भविष्य की दिशा ‘वन स्टेट, वन ट्रांसपोर्ट नेटवर्क’ की ओर
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में ‘वन स्टेट, वन ट्रांसपोर्ट नेटवर्क’ की परिकल्पना को साकार किया जाए।
इसमें बस सेवा, ई-रिक्शा, ई-बाइक, और इंटरसिटी कनेक्टिविटी को एकीकृत किया जाएगा। राज्य परिवहन निगम डिजिटल टिकटिंग, मोबाइल ऐप और जीपीएस आधारित रूट ट्रैकिंग को भी विस्तार दे रहा है। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अब विकास की गति दिखाई दे रही है। योगी सरकार का लक्ष्य केवल बसें चलाना नहीं, बल्कि गांवों को जोड़ना, अवसरों को बढ़ाना और लोगों को सशक्त बनाना है। आज जब भारत ‘विकसित राष्ट्र’ बनने की दिशा में अग्रसर है, तो यह पहल यूपी को उस अभियान में अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा करती है। यूपी रोडवेज अब सिर्फ यात्रा का साधन नहीं, बल्कि ‘समृद्ध गांव सशक्त प्रदेश’ का माध्यम बन चुका है।
* 12200 गांवों को मिलेगा बस कनेक्शन एक साल में पूरा होगा लक्ष्य
* राज्य परिवहन निगम का विस्तार बसों की संख्या 8500 से बढ़कर 14000
* 23 बस स्टेशन एयरपोर्ट जैसे आधुनिक रूप में तैयार
* 45 जिलों में इलेक्ट्रिक बसें जल्द पूरे 75 जिलों में सेवा विस्तार
* 1.5 लाख जनसेवा केंद्रों से जुड़ी परिवहन सेवाएं अब नहीं लगेंगे दफ्तरों के चक्कर
* चारबाग बस स्टेशन का होगा 1000 करोड़ की लागत से आधुनिकीकरण
* रोडवेज बसों की औसत उम्र मात्र 5.25 वर्ष देश में सबसे बेहतर स्थिति
* डिजिटल और हरित परिवहन की दिशा में यूपी का मॉडल बनेगा मिसाल



