Newsई-पेपरउत्तर प्रदेशवाराणसीशासन प्रशासन

वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने चार माह में पास किये 474 लेआउट,अवैध प्लाटिंग वालो को कर दिया गेटआउट

 

  • चार माह में 474 लेआउट मानचित्र स्वीकृत, सुनियोजित विकास को मिली रफ्तार
  • चार माह में 474 मानचित्र‑लेआउट स्वीकृत, वैधानिक निर्माण को बढ़ावा
  • ऑनलाइन न्यू बिल्डिंग मानचित्र 15 दिवस में, पारदर्शी प्रक्रिया
  • शमन मानचित्रों की स्वीकृति में 200 फीसदी तक वृद्धि
  • अवैध निर्माण पर सख्त संदेश, लेकिन वैधीकरण का अवसर भी
  • निजी कॉलोनियों के नियोजन से सुरक्षित निवेश का भरोसा
  • वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के नेतृत्व में बदला प्रशासनिक चेहरा

अमित मौर्य

वाराणसी। काशी सदियों से आस्था, संस्कृति और परंपरा की जीवंत प्रयोगशाला रही है। लेकिन किसी भी प्राचीन शहर की सबसे बड़ी चुनौती होती है परंपरा के साथ आधुनिकता का संतुलन। यही संतुलन जब नीति, नियोजन और प्रशासनिक इच्छाशक्ति से मिलता है, तो विकास केवल ईंट‑सीमेंट का विस्तार नहीं रहता, बल्कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भविष्य‑उन्मुख शहर की नींव बनता है। बीते चार महीनों में वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा 474 लेआउट एवं भवन मानचित्रों की स्वीकृति इसी बदले हुए प्रशासनिक मिज़ाज और सुनियोजित विकास की ठोस मिसाल है। अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर और जनवरी में जिस तेजी, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ 247 कम्पाउडिंग मानचित्र, 31 निजी कॉलोनी लेआउट तथा 196 ऑनलाइन न्यू बिल्डिंग मानचित्र स्वीकृत किए गए, उसने न सिर्फ निर्माण क्षेत्र को वैधानिक रास्ते पर लौटाया है, बल्कि आम नागरिकों के मन से वर्षों पुरानी वह आशंका भी कम की है कि ‘मानचित्र स्वीकृति’ एक जटिल और अंतहीन प्रक्रिया है। यह बदलाव संयोग नहीं, बल्कि नीति, निगरानी और नेतृत्व का परिणाम है। वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के नेतृत्व में प्राधिकरण ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून पालन विकास का दुश्मन नहीं, बल्कि उसका सबसे मजबूत आधार है। जहां पहले बिना अनुमति निर्माण, अवैध कॉलोनियों और अनियमित विस्तार ने शहर की संरचना को क्षति पहुंचाई, वहीं अब स्वीकृत लेआउट और मानचित्रों के जरिये काशी को एक सुरक्षित, नियोजित और निवेश‑अनुकूल शहर के रूप में गढ़ने की कोशिश तेज हुई है। यह भी उल्लेखनीय है कि डिजिटल प्रक्रियाओं के विस्तार के साथ‑साथ मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम किया गया है। ऑनलाइन न्यू बिल्डिंग मानचित्रों की 15 दिवस में स्वीकृति बशर्ते सभी अनापत्तियां समय पर उपलब्ध हों यह बताती है कि प्रशासनिक तंत्र अब समय की कीमत समझता है। यही वजह है कि वैधानिक प्रक्रियाओं के प्रति नागरिकों की जागरूकता बढ़ी है और लोग जोखिम भरे अवैध निर्माण की जगह नियमों के दायरे में रहकर निर्माण को प्राथमिकता दे रहे हैं। काशी जैसे घनी आबादी वाले ऐतिहासिक शहर में यह बदलाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, यातायात, पर्यावरण और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ा सवाल है। स्वीकृत लेआउट का अर्थ है। सड़कों की चौड़ाई, नालियों की व्यवस्था, हरित क्षेत्र, अग्नि सुरक्षा और भविष्य के विस्तार की संभावनाओं का पहले से आकलन। वीडीए की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए रहने‑योग्य काशी की नींव रखती है।

 

 

चार माह में 474 मानचित्र‑लेआउट स्वीकृत, वैधानिक निर्माण को बढ़ावा

474 स्वीकृत मानचित्र और लेआउट केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि शहर के बदलते व्यवहार का संकेत हैं। 247 कम्पाउडिंग मानचित्र बताते हैं कि पुराने निर्माणों को भी नियमों के दायरे में लाने की गंभीर कोशिश हुई है। 31 निजी कॉलोनी लेआउट यह संकेत देते हैं कि अब कॉलोनाइजर भी अनियोजित विस्तार की बजाय वैधानिक विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं 196 ऑनलाइन न्यू बिल्डिंग मानचित्र डिजिटल सिस्टम पर बढ़ते भरोसे की पुष्टि करते हैं।

पारदर्शिता और समयबद्धता का मॉडल

वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के अनुसार, प्रक्रिया को जानबूझकर सरल किया गया है। अनावश्यक फाइल‑दौड़, अस्पष्ट शर्तें और विलंब इन तीनों पर एक साथ प्रहार किया गया। ऑनलाइन सिस्टम में आवेदन की स्थिति ट्रैक करने की सुविधा ने भ्रष्टाचार की संभावनाओं को सीमित किया है।

15 दिन की समय सीमा कागज पर नहीं, जमीन पर

न्यू बिल्डिंग मानचित्र की 15 दिवस की स्वीकृति कोई खोखला दावा नहीं। आवश्यक अनापत्तियां जैसे अग्निशमन, विद्युत, जल एवं पर्यावरण यदि समय पर उपलब्ध हों, तो वीडीए ने समय सीमा का सख्ती से पालन किया है। यह प्रशासनिक इच्छाशक्ति का उदाहरण है।

शमन प्रक्रिया दंड नहीं, सुधार

पूर्व में बिना अनुमति बने भवनों के लिए शमन प्रक्रिया को तेज़ करना एक व्यावहारिक निर्णय है। पिछले दो महीनों में शमन मानचित्रों की स्वीकृति में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि लोग वैध रास्ते पर लौटना चाहते हैं। यह नीति शहर को ध्वस्तीकरण के भय से नहीं, नियोजन के भरोसे आगे बढ़ाती है।

कानून का स्पष्ट संदेश

उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 14 और 15 के तहत बिना स्वीकृति निर्माण अवैध है। वहीं धारा 27 और 28 वीडीए को सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई का अधिकार देती हैं। उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने दो टूक कहा है कि नियम तोड़ने पर सख़्ती तय है, लेकिन नियम मानने वालों के लिए रास्ता आसान।

निवेश सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी

वीडीए की अपील साफ है कि प्लॉट खरीदने या निर्माण शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि लेआउट स्वीकृत है। यह न केवल निवेश को सुरक्षित करता है, बल्कि शहर को अवैध कॉलोनियों के जाल से बचाता है।

काशी का भविष्य नियोजित विस्तार

नये विकास क्षेत्रों का नियोजन, हरित पट्टियों की सुरक्षा, यातायात दबाव का संतुलन ये सब तभी संभव हैं जब विकास नियमों के अनुसार हो। वीडीए की हालिया उपलब्धि काशी को एक आधुनिक, सुरक्षित और संतुलित शहर की दिशा में ले जाती है।

नेतृत्व की भूमिका

कहा जाए तो यह उपलब्धि किसी एक फाइल की नहीं, बल्कि नेतृत्व की है। पुर्ण बोरा ने स्पष्ट दृष्टि, प्रशासनिक अनुशासन और संवाद के जरिये वीडीए की छवि को ‘निरोधक संस्था’ से ‘सहयोगी नियोजक’ में बदला है। 474 स्वीकृत मानचित्र‑लेआउट इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन ईमानदार हो, प्रक्रिया पारदर्शी हो और नागरिक जागरूक हों तो काशी जैसे प्राचीन शहर में भी आधुनिक, सुरक्षित और सुनियोजित विकास संभव है। यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में वाराणसी न सिर्फ आस्था की, बल्कि नियोजन की भी मिसाल बनेगी।

* वीडीए ने चार माह में 474 लेआउट व भवन मानचित्र स्वीकृत कर सुनियोजित विकास को नई गति दी
* अक्टूबर से जनवरी के बीच 247 कम्पाउडिंग, 31 निजी कॉलोनी लेआउट और 196 ऑनलाइन न्यू बिल्डिंग मानचित्र स्वीकृत
* वैधानिक निर्माण को बढ़ावा, अवैध व अनियोजित निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण
* वीडीए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के नेतृत्व में मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया हुई पारदर्शी, सरल और समयबद्ध
* शमन मानचित्रों की स्वीकृति में पिछले दो माह में लगभग 200 फीसदी की वृद्धि
* बिना अनुमति बने भवनों को वैध करने का अवसर, दंडात्मक कार्रवाई से पहले सुधार की नीति
* अवैध निर्माण पर स्पष्ट चेतावनी धारा 27 व 28 के तहत सीलिंग व ध्वस्तीकरण का अधिकार
* स्वीकृत लेआउट से सड़क चौड़ाई, नाली, हरित क्षेत्र, अग्नि सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का सुनिश्चित नियोजन
* घनी आबादी वाले ऐतिहासिक शहर काशी में आपदा प्रबंधन और जीवन सुरक्षा को प्राथमिकता
* काशी को नियोजित, सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख शहर बनाने की दिशा में ठोस पहल

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button