वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने गणतंत्र दिवस पर शहीदो को किया याद, कार्मिकों को ईमानदारी व बेहतर कार्यप्रणाली की बताई बात
उपाध्यक्ष का संदेश राष्ट्रहित सर्वोपरि, ईमानदारी, निष्ठा, पारदर्शिता से कर्तव्य निर्वहन का आह्वान

● वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने गणतंत्र दिवस पर शहीदो को किया याद, कार्मिकों को ईमानदारी व बेहतर कार्यप्रणाली की बताई बात
● संविधान की शपथ, विकास का संकल्प, वीडीए परिसर में 77वें गणतंत्र दिवस की धूम
● संविधान और लोकतंत्र का उत्सव वीडीए में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास और गरिमा के साथ सम्पन्न
● उपाध्यक्ष का संदेश राष्ट्रहित सर्वोपरि, ईमानदारी, निष्ठा, पारदर्शिता से कर्तव्य निर्वहन का आह्वान
● सुनियोजित विकास का रोडमैप वाराणसी के संतुलित, समावेशी और सतत विकास पर जोर
● वीर सपूतों को नमन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का स्मरण, संवैधानिक मूल्यों की पुनः प्रतिज्ञा
● टीमवर्क का संकल्प अधिकारी, कर्मचारी एकजुट होकर कार्य करें
● गरिमामय आयोजन ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और सामूहिक संकल्प से देशभक्ति का संदेश
◆ अमित मौर्य
वाराणसी। गणतंत्र दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय गणराज्य की आत्मा का उत्सव है। संविधान, लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्यों की सामूहिक स्मृति। 26 जनवरी 2026 को वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) परिसर में 77वां गणतंत्र दिवस इसी भाव के साथ पूरे हर्षोल्लास, अनुशासन और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। सुबह 8:30 बजे उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा द्वारा ध्वजारोहण के साथ आयोजन का शुभारंभ हुआ। राष्ट्रध्वज के आरोहण के पश्चात राष्ट्रगान का सामूहिक गायन हुआ, जिसने परिसर को देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत कर दिया। इस अवसर ने यह संदेश स्पष्ट किया कि प्रशासनिक संस्थान केवल नियमों और फाइलों तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे संवैधानिक मूल्यों के जीवंत वाहक होते हैं। गणतंत्र दिवस पर वी़डीए में दिखाई दी सजगता, समयपालन, अनुशासन और समन्वय यह बताने के लिए पर्याप्त था कि लोकतंत्र का सम्मान केवल शब्दों में नहीं, कर्म में भी होना चाहिए। उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने अपने संबोधन में संविधान के मूल सिद्धांतों न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सपूतों के त्याग बलिदान के कारण ही आज भारत एक सशक्त गणराज्य के रूप में खड़ा है, जहां नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराया गया है। उनका संदेश सीधा था कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है, और हर अधिकारी-कर्मचारी का आचरण पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्ठा से संचालित होना चाहिए। कहा कि ऐतिहासिक, आध्यात्मिक शहर का विकास केवल संरचनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि विरासत, पर्यावरण और जनहित के संतुलन का विषय है। वी़डीए की भूमिका यहां निर्णायक बनती है। योजना, नियमन और क्रियान्वयन तीनों स्तरों पर जवाबदेही और संवेदनशीलता अपेक्षित है। गणतंत्र दिवस का मंच इसी आत्ममंथन और संकल्प का अवसर बना। कार्यक्रम में सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा, अपर सचिव गुड़ाकेश शर्मा, नगर नियोजक प्रभात कुमार, अधीक्षण अभियंता अजय पवार, जोनल अधिकारी, अभियंता तथा समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे। सामूहिक संकल्प के क्षण में सभी ने देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए समर्पित रहने का भरोसा जताया।
ध्वजारोहण से राष्ट्रगान तक गरिमा और अनुशासन
सुबह की ठंडी फिजा में जैसे ही राष्ट्रध्वज फहराया गया, परिसर में अनुशासन और गर्व का दृश्य उभरा। राष्ट्रगान के दौरान उपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों की एकाग्रता यह दर्शाती रही कि संवैधानिक प्रतीकों के प्रति सम्मान प्रशासनिक संस्कृति का अभिन्न अंग होना चाहिए।
उपाध्यक्ष का संबोधन कर्तव्य, पारदर्शिता और जवाबदेही
उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गणतंत्र दिवस हमें अधिकारों के साथ कर्तव्यों की याद दिलाता है। उन्होंने प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता, कार्यप्रणाली में ईमानदारी और परिणामों में जवाबदेही को अनिवार्य बताया। उनका कहना था कि विकास तभी टिकाऊ होता है, जब वह जनहित, पर्यावरण और विरासत के संतुलन से जुड़ा हो।
वीर सपूतों को नमन इतिहास से भविष्य तक
संबोधन में स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात-अज्ञात नायकों का स्मरण किया गया। यह संदेश दिया गया कि इतिहास केवल स्मरण के लिए नहीं, मार्गदर्शन के लिए होता है। त्याग, साहस और नैतिकता आज के प्रशासन के लिए भी आदर्श बनें।
वाराणसी का विकास, चुनौतियां और अवसर
वाराणसी के शहरी विकास की जटिलताएं अवैध निर्माण, विरासत संरक्षण, यातायात, हरित क्षेत्र इन सब पर संतुलित दृष्टि की आवश्यकता बताई गई। वी़डीए की योजनाओं में नागरिक सहभागिता, तकनीकी दक्षता और कानूनसम्मत क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने की बात दोहराई गई।
टीम वर्क का संदेश, संस्थागत समन्वय
सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने यह रेखांकित किया कि संस्थागत समन्वय के बिना विकास संभव नहीं। जोनल स्तर से लेकर फील्ड अभियंताओं तक, सभी की भूमिका स्पष्ट की गई। कार्यक्रम में उत्सव के साथ आत्ममंथन भी, विकास के नाम पर अनियमितताओं के विरुद्ध शून्य सहनशीलता, नियमों का निष्पक्ष पालन और जनहित सर्वोपरि यही असली गणतांत्रिक प्रतिबद्धता है।
पर्यावरण और सततता
सतत विकास पर बल देते हुए हरित परियोजनाओं, जल-संरक्षण और सार्वजनिक स्थलों के संवर्द्धन की आवश्यकता बताई गई। यह स्वीकार किया गया कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी आज के निर्णयों से तय होती है।
नागरिक विश्वास और प्रशासन
नागरिकों का विश्वास प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है। पारदर्शी प्रक्रियाएं, स्पष्ट संवाद और समय पर समाधान।इनसे ही यह विश्वास सुदृढ़ होता है। गणतंत्र दिवस का मंच इसी भरोसे की पुनः स्थापना का अवसर बना।
संकल्प का क्षण
कार्यक्रम के अंत में सभी ने देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए संकल्प लिया। यह संकल्प केवल औपचारिक नहीं, बल्कि दैनिक कार्यसंस्कृति में उतारने का संदेश था।
* 26 जनवरी 2026 को वी़डीए परिसर में 77वां गणतंत्र दिवस गरिमामय ढंग से सम्पन्न।
* उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगान का सामूहिक गायन।
* संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता पर जोर।
* ईमानदारी, निष्ठा और पारदर्शिता से कर्तव्य निर्वहन का आह्वान।
* वाराणसी के सुनियोजित, संतुलित और सतत विकास का संकल्प।
* अधिकारी-कर्मचारियों की व्यापक उपस्थिति, टीमवर्क का संदेश।




