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आईपीएल में सट्टा माफ़िया पंकज आर्या के आगे “बाबा” की पुलिस बेबस लाचार,योगी किस मुँह से कानून की दुहाई देते है सरकार

वाराणसी में बाबा का बेबस कानून और बेलगाम सट्टा माफिया

  • पुलिस और सफेदपोश गठजोड़ के साये में फल-फूल रहा संगठित सट्टा कारोबार
  • ऑनलाइन आईडी, क्यूआर कोड और एजेंट नेटवर्क के जरिए पूरे पूर्वांचल में फैला काला साम्राज्य
  • वाराणसी के चप्पे-चप्पे से आईपीएल मैच में सट्टा, जिला प्रशासन लगा रहा है सीएम की साख पर बट्टा
  • सवाल: प्रधानमंत्री के शहर में सट्टे का साम्राज्य-कौन दे रहा संरक्षण?
  • हर बॉल पर दांव, हर थाने में खेल-वाराणसी बना सट्टे की राजधानी?
  • बैन के बाद भी बेखौफ सट्टा-कानून सो रहा या शामिल है?

1. आईपीएल के साथ शहर में सट्टे का विस्फोट, हर गली बना दांव का अड्डा
2. ब्लॉक हुई वेबसाइट्स फिर सक्रिय- नए नाम, वही पुराना जाल
3. मोबाइल, क्यूआर कोड और फर्जी आईडी से चल रहा डिजिटल सट्टा साम्राज्य
4. पुलिस की ‘खामोशी’ पर सवाल- क्या संरक्षण में चल रहा पूरा नेटवर्क?
5. युवाओं-छात्रों को बनाया जा रहा शिकार, भविष्य दांव पर

वाराणसी की सड़कों पर जितनी रौनक दिखती है, उससे कहीं ज्यादा गहराई में एक ऐसा काला कारोबार पल रहा है, जिसकी जड़ें सत्ता और सिस्टम तक फैली होने के आरोपों से घिरी हैं। हैरानी की बात यह नहीं कि आईपीएल जैसे आयोजनों के दौरान सट्टे का बाजार गर्म हो जाता है-बल्कि यह है कि पुलिस की कथित सहमति और संरक्षण के बिना यह खेल इतने खुलेआम, इतने संगठित तरीके से कैसे फल-फूल रहा है? शहर के हर कोने में, हर थाने की सीमा के भीतर, सट्टा माफियाओं का नेटवर्क न केवल सक्रिय है बल्कि बेखौफ भी दिखाई देता है।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब यह सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह सब संभव हो रहा है। एक तरफ पुलिस पर काली कमाई के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ यह पूरा घटनाक्रम प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साख पर भी सीधा आघात करता नजर आता है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि जिस वाराणसी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने का गौरव प्राप्त है- जहां देश की तमाम खुफिया एजेंसियां हमेशा सक्रिय रहती हैं- वहीं अगर सट्टा माफियाओं का इतना व्यापक और निर्बाध कब्जा कायम है, तो यह केवल एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है।
यह रिपोर्ट उसी स्याह सच्चाई को उजागर करती है, जहां कानून के साए में ही कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है, और शहर की नब्ज पर पंकज आर्या जैसे सट्टेबाजों का कब्जा दिन-ब-दिन मजबूत होता जा रहा है।“

आईपीएल मैच में सट्टे का संगठित साम्राज्य : पंकज आर्या की कमांडिंग में सक्रिय पूरा नेटवर्क
वाराणसी में सट्टे का यह फैलता हुआ जाल अब केवल एक अवैध धंधा नहीं, बल्कि एक संगठित और संरक्षित नेटवर्क का रूप ले चुका है, जहां हर बॉल पर लगने वाला दांव सिर्फ खिलाड़ियों पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी लगाया जा रहा है। इस पूरे खेल के केंद्र में एक नाम बार-बार उभरकर सामने आता है-पंकज आर्या, जिसकी सक्रियता और पकड़ इस काले कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती दिखाई देती है।
बताया जाता है कि पंकज आर्या वही शख्स है, जिसे वाराणसी पुलिस पहले भी सट्टा संचालन के आरोप में जेल भेज चुकी है, लेकिन अब एक बार फिर उसी के इशारों पर शहर में सट्टे का नेटवर्क संगठित तरीके से फैलता नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, पंकज की कथित जुगलबंदी केवल स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं, बल्कि कुछ सफेदपोश तत्वों के साथ भी गहरे तालमेल में जुड़ी बताई जा रही है जिसके चलते यह पूरा नेटवर्क बेखौफ होकर संचालित हो रहा है।
ऑनलाइन वेबसाइट्स, फर्जी आईडी, एजेंटों की श्रृंखला और क्यूआर कोड के जरिए होने वाला लेन-देन, इन सबके पीछे एक सुनियोजित कमांडिंग सिस्टम काम कर रहा है, जिसकी कमान पंकज आर्या के हाथों में होने की चर्चा है। सवाल यह है कि जब पहले से चिन्हित और कार्रवाई झेल चुका व्यक्ति दोबारा इतने बड़े स्तर पर सक्रिय हो जाता है, तो क्या यह महज संयोग है या फिर सिस्टम की मिलीभगत का एक और सजीव उदाहरण?
यह रिपोर्ट उसी गठजोड़ की परतें खोलती है, जहां अपराध, सत्ता और संरक्षण की रेखाएं इतनी धुंधली हो चुकी हैं कि सट्टे का यह काला खेल अब पूरे शहर की पहचान पर ही सवाल खड़ा कर रहा है।

बाबा जी तो इस समय कानून के मुद्दे पर प्रदेश में हसीं का पात्र बन गए है कानून को खुले आम अपराधी पैरों तले रौंद रहे है सट्टा जुआ गांजा अवैध शराब का हब बनता जा रहा है बनारस तो महाराजी वाराणसी के साथ अपनी गरिमा भी बचाइए पंकज आर्या जैसे सट्टा माफ़िया को जेल में डालिये 

 

हर छोटे से छोटे अपराध व अपराधी पर वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल नजर रखते है फिर सट्टा माफ़िया पंकज आर्या आप की पैनी नजर से अभी तक क्यो बचा हुआ है, सवाल तो पूछे जाएंगे न कमिश्नर साहब

 

ये है डीजीपी राजीव कृष्ण जो रोज खाली मीटिंग मीटिंग खेलते है खाली बयान जारी होता है नीचे के अधिकारी अपने मर्जी से कार्य करते है आप के आदेश व निर्देश की धज्जियां उड़ाई जा रही है,आखिर आप की पुलिस सट्टा माफ़िया पंकज आर्या के तलवे क्यो चाट रही है।

 

एसटीएफ यूपी पुलिस की आन बान शान है तमाम बड़े सफेदपोश अपराधियों को जेल में डालकर सूबे में कानून का इकबाल बुलंद करती है अमिताभ यश एसटीएफ के मुखिया है एसटीएफ पूरे प्रदेश के हर जिलों की खबर रखती है तो वाराणसी जिले में पकंज आर्या जो इतना बड़ा सट्टा का नेटवर्क चला रहा है वो कब एसटीएफ की गिरफ्त में आएगा ?

• आईपीएल के दौरान ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट्स पर बढ़ती अवैध गतिविधियों का खुलासा
• सख्ती के बावजूद नए डोमेन, बोनस ऑफर और एजेंट नेटवर्क के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा निशाना।

वाराणसी । भारत में ऑनलाइन सट्टा ऐप्स और वेबसाइट्स पर रोक लगाने के बाद भी इंटरनेट पर इनका कारोबार अब भी बेलगाम है। सुप्रीम कोर्ट की रोक और सरकार द्वारा 7000 से अधिक वेबसाइट्स को ब्लॉक किए जाने के बावजूद, आईपीएल शुरू होते ही इंटरनेट पर ऑनलाइन सट्टा खेलने के लिए कई नई वेबसाइट्स बन चुकी हैं।
इनमें बड़ी आसानी से लॉगिन करने के बाद मैच की हर बॉल पर दांव लगाया जा रहा है। कुछ वेबसाइट्स ऐसी भी हैं जिन्हें पहले ब्लॉक कर दिया गया था, लेकिन अब वे पुराने नामों से मिलते-जुलते नए नामों के साथ फिर से संचालित होने लगी हैं। आईडी खरीदने से लेकर मोबाइल नंबर के जरिए इन सट्टा वेबसाइट्स पर रजिस्टर किया जा रहा है।

20 से अधिक ऐसी वेबसाइट्स गूगल के पहले पेज में मिलीं

वहीं खुले बाजार में भी सट्टा लगाया जा रहा है। अचूक संघर्ष ने जब इंटरनेट पर इन ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट्स की पड़ताल की, तो 20 से अधिक ऐसी वेबसाइट्स गूगल के पहले पेज में मिलीं जिनमें केवल आईपीएल ही नहीं, बल्कि देशभर में हो रहे सभी तरह के खेलों पर सट्टा लगाया जा रहा है। इसके साथ ही, पैसों वाले वो गेम भी इनमें मौजूद हैं जो पहले ऐप्स पर होते थे। सरकार द्वारा उन ऐप्स को बंद किए जाने के बाद अब वे गेम्स वेबसाइट्स पर खेले जा रहे हैं।

वेबसाइट्स आईडी बनाने पर यूजर्स को दिए जाता है बोनस

पड़ताल के दौरान जब अचूक संघर्ष ने इन वेबसाइट्स पर आईडी बनाई, तो चंद सेकंड में ही लॉगिन हो गया। इसमें न तो उम्र पूछी गई और न ही शहर की जानकारी मांगी गई। केवल मोबाइल नंबर या ईमेल के जरिए आईडी बनते ही सीधे मैच पर सट्टा लगाने का विकल्प सामने आ गया। खास बात यह भी है कि, आईपीएल को लेकर कई वेबसाइट्स आईडी बनाने पर यूजर्स को बोनस भी दे रही हैं।

50 रुपए में सीधे 100 का मुनाफा

अचूक संघर्ष ने 4rabet120.com, baterybets, iwebhr और luckkudo life जैसी ऑनलाइन सट्टा वेबसाइट्स की भी पड़ताल की, जो इंटरनेट पर बिल्कुल नई हैं। ये वेबसाइट्स मैच शुरू होने से पहले ही लोगों को हर बॉल, ओवर और चौके-छक्के पर सट्टा लगाने का विकल्प दे रही हैं। अन्य वेबसाइट्स की तरह इनमें भी बोनस दिया जा रहा है, जिससे दांव लगाने में छूट मिल रही है। खास बात यह है कि इनमें 50 रुपए लगाने पर 100 रुपए मिलने, यानी सीधे पैसे डबल होने का लालच दिया जा रहा है। साथ ही, मिलने वाला मुनाफा भी पहले ही बता दिया जाता है। हर जीत पर सौ रुपए लगाने पर 2000 रुपए तक का 5 मुनाफा होने का लालच भी दिया जा रहा है।

डोमेन बदलकर और विदेशी सर्वर का इस्तेमाल:
सरकार द्वारा 2025 में लाए गए ऑनलाइन गेमिंग कानून के तहत रियल मनी बेटिंग को प्रतिबंधित किया गया है।

अन्ना रेड्डी अभी भी एक्टिव
क्यूआर कोड देकर मांग रहे पैसे, फिर दे रहे आईडी:

सट्टा खेलने के लिए अन्ना रेड्डी नाम की वेबसाइट लोगों के बीच काफी चर्चित है। इसमें लॉगिन करने के लिए आईडी की आवश्यकता होती है। इसके लिए वेबसाइट पर एक नंबर भी दिया गया है, जिस पर व्हाट्सएप करके ‘वांट मी आईडी लिखना होता है। अचूक संघर्ष जब इस प्रोसेस में आगे बढ़ा, तो 15 मिनट के बाद उस नंबर से जवाब में एक मैसेज आया कि कम से कम 300 रुपये देने होंगे, जिसके बाद ही आईडी बनाकर दी जाएगी। पैसे भेजने के लिए व्हाट्‌सएप पर बाकायदा एक क्यूआर कोड भी भेजा गया था।

ये है सट्टे की भाषा
• बुकी- डिब्बा
• एजेंट- पंटर
• क्लाइंट- लाइन
• एक लाख- एक पैसा
• सवा लाख- सवा पैसा

पूर्वांचल में वाराणसी सट्टे का सबसे बड़ा बाजार

वाराणसी पूरे पूर्वांचल में सट्टे का सबसे बड़ा बाजार है तो सट्टा माफियाओं का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सूत्र बताते है कि जिला प्रशासन के खुले संरक्षण में वाराणसी अब सट्टा माफियाओं का सबसे प्रिय और सुरक्षित ठिकाना बन गया है। पुलिस की शह पर सट्टा का पूरा खेल अंडरग्राउंड होकर संचालित किया जा रहा है। वाराणसी, जौनपुर,प्रयागराज,भदोही और आजमगढ़ से रोजाना लाखों करोड़ों का सट्टा लग रहा है। अचूक संघर्ष ने वाराणसी के एक प्रमुख सट्टेबाज से बात की तो उसने स्वीकार किया की करोड़ों का सट्टा लग रहा है। सट्टे के खेल में पुराने खिलाड़ियों के साथ ही युवाओं और छात्रों को ज्यादा शामिल किया जा रहा है। इसने बताया कि अब ऑनलाइन साइट पर कई ऐसे ऐप आ गए है जिसके जरिए बुकी के ऐजेंट सट्टा लगाने वालों से रकम लेकर उनकी नई आईडी बनाते हैं और फिर उस आईडी में रकम डालते हैं।

शहर के एक प्रमुख खाइवाल से अचूक संघर्ष की बात चीत में खाइवाल ने बताया

अचूक संघर्ष – आईपीएल में सट्टा कैसे लगाया जाता है, क्या करना होगा
खाइवाल- आईपीएल का सट्टा लाइन पर चलता है। लाइन का नंबर छोटे शहरों में बैठे बुकी के पास होता है। बुकी ही लोगों को सट्टा खिलवाते हैं। मैच शुरू होने के साथ भाव तय होता है। मजबूत और कमजोर टीम के हिसाब से लाइन पर भाव आते हैं। इस भाव के आधार पर ही युवा बुकी के जरिए सट्टे पर रुपए लगाते हैं। इसके अलावा प्रति ओवर, प्रति बाल के हिसाब से भी लोग सट्टा लगाते हैं। सट्टा लगाने वाले व्यक्ति को लाइन कहा जाता है, जो एजेंट यानी पंटर के माध्यम से बुकी (डिब्बे) तक संपर्क करता है। एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है, जिसकी एक लिमिट होती है। खाइवाल ने बताया वाराणसी के चप्पे चप्पे पर पुराने खाइवाल जमे हुए हैं। अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर यह भी बताया कि पुलिस सब जानती है लेकिन पुलिस के समर्थन के बाद भी खेल अंडरकाउंड होकर चल रहा है। वाराणसी के कोतवाली, चौक, चेतगंज, भेलूपुर, लंका, शिवपुर और मंडुआडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत रोजाना लाखों करोड़ों का सट्टा लगता है।

युवाओं और छात्रों को किया जा रहा ज्यादा शामिल

अचूक संघर्ष ने घुरू चेतगंज क्षेत्र के एक प्रमुख सट्टेबाज से बात की तो उसने स्वीकार किया की करोड़ों का सट्टा लग रहा है। सट्टे के खेल में पुराने खिलाड़ियों के साथ ही युवाओं और छात्रों को ज्यादा शामिल किया जा रहा है। इसने बताया कि अब ऑनलाइन साइट पर कई ऐसे ऐप आ गए है जिसके जरिए बुकी के ऐजेंट सट्टा लगाने वालों से रकम लेकर उनकी नई आईडी बनाते हैं और फिर उस आईडी में रकम डालते हैं।
अचूक संघर्ष – सट्टे का भाव कैसे तय होता है, कौन तय करता है?
खाइवाल – सट्टे के भाव को डिब्बे की आवाज बोला जाता है। आईपीएल क्रिकेट में सट्टेबाज 20 ओवर को लंबी पारी, दस ओवर को सेशन और छह ओवर तक सट्टा लगाने को छोटी पारी खेलना कहते हैं। इन पांच ओवरों में खेलने वाली टीम कितने रन बनाएगी और इसके कितने खिलाड़ी आउट होंगे व कौन सा खिलाड़ी कितने रन बनाएगा, सभी पर सट्टा लगा होता है।

अचूक संघर्ष – मैच से पहले ही सट्टे का भाव तय होता है क्या?
खाइवाल- मैच की पहली गेंद से लेकर टीम के जीत तक भाव चढ़ते उतरते हैं। एक लाख को एक पैसा, 50 हजार को अठन्नी, 25 हजार को चवन्नी कहा जाता है। यदि किसी ने दांव लगा दिया और वह कम करना चाहता है तो फोन कर एजेंट को ‘मैंने चवन्नी खा ली’ कहना होता है। टॉस पर भी मोटा सट्टा लगता है।

अचूक संघर्ष – पुलिस पकड़ती नहीं क्या, बचने के लिए क्या करते हो?
खाइवाल – सावधानी बरती जाती है कि एक बार कोई मोबाइल नंबर यूज हो गया तो उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता। पुलिस की नजर से बचने के लिए दर्जनों मोबाइल फोन रखते हैं। फोन टैप होने के डर से हरेक खिलाड़ी का रेट, जीत हार, कुल स्कोर आदि पर लगने वाले सट्टे के रेट एसएमएस से एक दूसरे को भेजे जाते हैं। इसमें नगद लेनदेन नहीं होता। फोन पर ही काल कर सट्टा लगाया जाता है। मोबाइल वालेट और खाता के जरिए पैसे इधर-उधर किए जाते हैं। बुकी मोबाइल लेकर घर पर बैठा है या कहीं और यह जानकारी पुलिस को नहीं मिल पाती।

पूरा नेटवर्क लेपटॉप, मोबाइल पर

चेतगंज के ही एक दूसरे खाइवाल ने बताया कि, यह पूरा नेटवर्क आधुनिक संचार प्रणाली लेपटॉप, मोबाइल, वाइस रिकार्डर आदि पर ही चल रहा है। सटोरियों ने कोड वर्ड ले रखे हैं, जिसमें चांदी व सोने का क्या भाव चल रहा है आदि शामिल हैं। पुलिस से बचने के लिए सटोरिए हर रोज ठिकाना भी बदल लेते हैं। यही नहीं उन्होंने आगे कारिंदे भी रखे हुए हैं ताकि अगर पुलिस कार्रवाई हो तो वे साफ बचकर निकल जाएं। सटोरियों के तार दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से जुड़े हुए हैं। जहां से पल-पल की जानकारी मिलती रहती है।

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