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उमाशंकर सिंह पर छापे के बहाने,योगी पर निशाने

योगी की सप्लाई लाइन काटने का पूरा बहाना, चुनाव से पहले यूपी में सियासी भूचाल लाएगा यह छापा

*  उमाशंकर सिंह पर इनकम टैक्स के छापे की टाइमिंग को लेकर उठे सवाल
* क्या संकेत देना चाहता है भाजपा आलाकमान? योगी की फाइल खुल गई?
* क्या चुनावी फंडिंग जुटाने सिंगापुर और जापान गए हैं योगी आदित्यनाथ?
* कहीं यह छापा सीएम के ठाकुरवाद के खिलाफ ब्राह्मणवाद का करारा जवाब तो नहीं ?

लखनऊ। उत्तरप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह पर बुधवार सुबह मारे गए इनकम टैक्स के छापे में अभी तक 3 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए हैं। चूंकि यह छापा केंद्र सरकार की एजेंसी इनकम टैक्स विभाग की ओर से मारा गया, इसलिए इस मामले के तार केंद्र सरकार से जोड़े जा रहे हैं। साथ ही केंद्र बनाम योगी सरकार की इस कश्मकश के बहुत ही गहरे सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। उमाशंकर सिंह भले ही बसपा के विधायक हों, लेकिन उनके ठिकानों पर मारे गए छापों में करीब 100 इनकम टैक्स अफसरों की फौज यह बताती है कि केंद्र सरकार को राज्य के पीडब्लूडी और खनन विभागों में एक बड़े घोटाले का न केवल पता था, बल्कि यह भी कि इसमें शामिल भ्रष्टाचार का पैसा किस तक पहुंच रहा था। राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मारे गए इस छापे से अब यह बात साफ होती जा रही है कि कहीं न कहीं केंद्र सरकार सीएम योगी आदित्यनाथ की सप्लाई लाइन को काटकर उन्हें बातचीत की टेबल तक लाना चाहती है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र का सूबे की राजनीति पर पूरा नियंत्रण रहे।

छापे की टाइमिंग देखिए

अगर आप उमाशंकर सिंह पर छापे की टाइमिंग देखें तो भी काफी कुछ समझ आता है। सीएम योगी आदित्यनाथ को सिंगापुर और जापान जाना था। अभी भी वे जापान में हैं। इस यात्रा की अनुमति भी केंद्र सरकार ही देती है और ऐन वक्त पर सीएम के यूपी से बाहर होते ही छापे की कार्रवाई की जाती है। इसका मतलब साफ है। भाजपा आलाकमान की चुनावी रणनीति की योगी सरकार लगातार अवहेलना कर रही है। शंकराचार्य मुद्दे पर प्रदेश की ब्राह्मण लॉबी के लामबंद होने को पार्टी आलाकमान ने बहुत गंभीरता से लिया है। इससे आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को करीब 15 फीसदी सीटों पर खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यानी लगभग 100 से ज्यादा सीटों का नुकसान भाजपा इस समय झेलने की स्थिति में नहीं है। छापे की कार्रवाई यह भी साफ दर्शा रही है कि भाजपा आलाकमान किसी तरीके से योगी सरकार की सबसे कमजोर नस, यानी भ्रष्टाचार और कुशासन को आगे रखकर दबाना चाहती है, ताकि वक्त आने पर उनसे पार्टी लाइन को मनवाया जा सके। इसके अलावा भाजपा आलाकमान को यह भी लग रहा है कि योगी की सिंगापुर और जापान यात्रा केवल निवेश लाने के लिए नहीं, आगामी चुनाव के लिए फंडिंग जुटाने का भी एक जरिया है। अमूमन, इस तरह का काम चुनाव से पहले प्रदेश को लाखों करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात के रूप में बांटने का काम भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पीएम नरेंद्र मोदी से करवाता रहा है। इससे पार्टी की विकासवादी छवि को मजबूती मिलती है। लेकिन अब सीएम की सिंगापुर और जापान यात्रा से आलाकमान को ऐसा लग रहा है कि कहीं सीएम योगी चुनावी फंडिंग का श्रेय लेने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं? अचूक संघर्ष ने अपनी पिछली रिपोर्ट में यह बताया था कि किसी तरह सीएम योगी पीएम मोदी के नक्शेकदम पर चलने का प्रयास कर रहे हैं और यह बात भाजपा नेृत्व को नागवार गुजर सकती है।

पीडब्लूडी और खनन दोनों सीएम के पास

बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई अभी जारी है। प्रदेश में पुल और सड़क बनाने का काम करने वाली पीडब्लूडी औरी माइनिंग विभागों में उमाशंकर सिंह का एकछत्र राज माना जाता रहा है। दोनों विभागों से करोड़ों के टेंडर जारी हुए और वह भी नियम-कानूनों को ताक पर रखकर। ढेरों सवाल उठे। मीडिया ने भी इन टेंडरों पर सवाल उठाते हुए रिपोर्ट छापीं, लेकिन योगी सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। बताया जाता है कि उमाशंकर सिंह के ठाकुर होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि दोनों ही विभाग सीएम के पास है। उमशंकर सिंह के समधी दिनेश प्रपताप सिंह यूपी सरकार में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री हैं। प्रिंस यूकेश सिंह, उमाशंकर सिंह के इकलौते बेटे हैं। वे परिवार की निर्माण कंपनी सीएस इन्फ्रा कंस्ट्रक्शंस लिमिटेड चलाते हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने खुद को कंपनी का सीईओ बताया है। 2024 में उनकी शादी हुई, जो काफी चर्चित रही क्योंकि इसमें बसपा सुप्रीमो मायावती खुद शामिल हुईं। अब छापे में उमाशंकर सिंह की कंपनी साईं राम इंटरप्राइजेस पर 33 हजार घनमीटर से ज्यादा इलाके में अवैध खनन का मामला सामने आया है। हालांकि, इसके बारे में सीएजी से पहले ही आपत्ति जताई थी, लेकिन सीएम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब दिनेश प्रताप सिंह और मायावती खुलकर उमाशंकर सिंह पर छापे का विरोध करने के लिए सामने आ चुके हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने इनकम टैक्स रेड की टाइमिंग पर सवाल खड़े किये हैं. राज्यमंत्री दिनेश सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और गृहमंत्री खुद विधायक उमाशंकर सिंह के अमेरिका में चल रहे इलाज की मॉनिटिरिंग कर रहे हैं। उमाशंकर सिंह चौथे स्टेज के कैंसर से लड़ रहे हैं। ऐसे में इनकम टैक्स विभाग को कार्रवाई से बचना चाहिए था। इस कार्यवाही से अगर उनको कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदार एजेंसी होगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस कार्रवाई को “बहुत दुखद और अमानवीय” बताया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि आयकर विभाग को छापेमारी कहां करनी है, ये कौन तय करता है? उन्होंने कहा कि बीजेपी को खुश रखोगे तो कभी छापा नहीं पड़ेगा। बीजेपी के लोग ऐसे छापों से बच जाते हैं।

करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं उमाशंकर

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की ओर से चुनाव आयोग को दिए गए एफिडेविट में बताया गया था कि 2017 में उनकी कुल संपत्ति 40 करोड़ 19 लाख 86 हजार 172 रुपये थी। जो कि 2012 में 20 करोड़ 75 लाख 63 हजार 588 रुपये थी। उमाशंकर सिंह की कुल संपत्ति पांच सालों में बहुत तेजी से बढ़ी। वहीं, उमाशंकर सिंह की ओर इनकम टैक्स रिटर्न के अनुसार 2020-21 में उनकी कुछ संपत्ति 36 लाख 69 हजार रुपये थी। 2019-20 में 37 लाख 53 हजार 880 रुपये थी। 2018-19 में 37 लाख 69 हजार 386 रपये थी। 2017-18 में 1 करोड़ 43 लाख 42 हजार 31 रुपये थी। 2016-17 में 2 करोड़ 11 लाख 45 हजार 774 रुपये थी। हालांकि, उमाशंकर ने 2017 में अपनी संपत्ति का आंकड़ा दिया है, यानी 9 साल पहले का। लेकिन उसके बाद से अब तक हालांत बहुत बदल चुके हैं। खासतौर पर योगी सरकार की तीसरी पारी में उमशंकर सिंह ने पुलों और सड़कों के जमकर ठेके लिए और खूब पैसा कमाया। उमशंकर सिंह के विरोधी इस सच्चाई को मानने से कभी भी इनकार नहीं करते। उनका दावा है कि ठाकुर होने के कारण उमाशंकर को योगी सरकार से पुख्ता संरक्षण मिला हुआ था, जिसके कारण उनकी कमाई में लगातार इजाफा होता रहा।

ठाकुरवाद बनाम ब्राह्मणवाद ?

सियासी हल्कों में इस पूरे मामले को यूपी में योगी सरकार के ठाकुरवाद बनाम ब्राह्मणवाद के रूप में भी देखा जा रहा है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों की पहले चोटी पकड़कर पिटाई और फिर शंकराचार्य पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एमआईआर दर्ज करने का बवाल अभी और तेज हो रहा है। इन हालात में केंद्र सरकार की एजेंसी इनकम टैक्स विभाग का उमाशंकर सिंह पर छापा कहीं न कहीं योगी सरकार के कथित ठाकुरवाद के खिलाफ ब्राह्मणवाद का सीधा प्रहार माना जा रहा है। इसीलिए इस छापे के दूरगामी सियासी परिणामों की आशंका जाहिर की जा रही है। दिल्ली में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब सांड बेकाबू हो जाए तो उसके नथुनों में नकेल डालनी पड़ती है। उनके इस बयान से इशारा साफ है कि भाजपा आलकमान ने चुनाव से ठीक पहले योगी सरकार पर नकेल डालने का प्रयास किया है। इस पर भी अगर सीएम अपनी जिद पर अड़े रहते हैं तो पार्टी नेतृत्व को वह कदम उठाना पड़ सकता है, जो वह नहीं चाहती।

एक ही कंपनी से दोबारा डील

योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सिंगापुर में एआईएसएटीएस कंपनी के साथ जेवर एयरपोर्ट पर कार्गो हब बनाने के लिए अनुबंध साइन किया गया था। हालांकि, इसी कंपनी के साथ जेवर एयरपोर्ट में कार्गो हब बनाने की डील 2023 में भी की गई थी। मुकिन है कि उस समय परदे के पीछे कमीशन का पैसा भाजपा के पार्टी फंड में देने की बात हुई हो। लेकिन, अब इसी कंपनी के साथ दोबारा एमओयू साइन करने के पीछे का राज गहरा रहा है। सवाल यह है कि कहीं सीएम योगी इस डील से कमीशन का पैसा आगामी विधानसभा चुनाव की फंडिंग में तो तब्दील नहीं करना चाहते? मुमकिन है कि भाजपा आलाकमान को इस मामले के परदे के पीछे की कहानी पता हो। अगर ऐसा है तो यह पार्टी नेतृत्व को योगी का डबल क्रॉस माना जा सकता है।

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