Newsई-पेपरनई दिल्लीराजनीति

एप्सटीन फाइल में मोदी व हरदीप पूरी के दामन दागदार,नैतिकता के आधार पर कब इस्तीफा देंगे हमारे ईश्वर के अवतार?

लोकतंत्र का धंधा एप्सटीन के मेल में मोदी-बैनन ‘मीटिंग मंडली’ और भारतीय सत्ता की गिरती शालीनता

एप्सटीन की मेल डायरी में भारतीय सत्ता न्यू इंडिया की नई परिभाषा

पतित कारोबारी अमेरिकी धुर-दक्षिणपंथी और हमारा स्टेट्समैन एक ही चैट बॉक्स में!

मोदी-बैनन मुलाकात की कथित जुगत-एप्सटीन बना राजनयिक दलाल?

सवालों की बाढ़, जवाब की खामोशी शासन की पुरानी आदत कायम

उद्योगपतियों की परछाइयां भी एप्सटीन की मेल में कितने ‘अनिल’, कितनी ‘इंफो’

इजरायल रणनीति, अमेरिकी चुनावी खेल और भारत की विदेश नीति सब एक दलदल में?

हरदीप पुरी के नाम भी दिखे कैलेंडर में कूटनीति या ‘नेटवर्किंग’?

लोकतंत्र की गिरती मर्यादा वैश्विक बदनामी का नया अध्याय


दिल्ली। भारत जब अपने आपको विश्वगुरु घोषित करने में व्यस्त था, दुनिया के एक सबसे कुख्यात यौन, अपराधी जेफ्री एप्सटीन के मेलबॉक्स में हमारे ‘नए भारत’ की सत्ता की झलकियां नाच रही थीं। अंतरराष्ट्रीय अपराध जगत का यह बदनाम दलाल जिसे दुनिया मानव तस्करी और नाबालिग लड़कियों के शोषण के लिए जानती है। उसके इनबॉक्स में अचानक भारतीय राजनीति, बड़े उद्योगपतियों, कूटनीतिक हस्तियों के नाम ऐसे चमकते दिखे जैसे कोई नए भारत का सर्टिफिकेट वही बांट रहा हो। कथित तौर पर एप्सटीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व ट्रंप सलाहकार स्टीव बैनन की मुलाकात सेट करने का दावा किया और यह दावा ऐसे समय में जब देश में पारदर्शिता का पतन अपने चरम पर है। सत्ता पक्ष हर आलोचक को देशद्रोही बताने में ऊर्जा लगाता रहा, लेकिन यहां एक अमेरिकी अपराधी के मेल में भारतीय सत्ता के ‘उच्च’ नाम शामिल मिल रहे हैं, और हमारी सरकार की तरफ से जवाब में वही पुरानी चिर-परिचित चुप्पी। इसमें उद्योगपति अनिल अंबानी के साथ कथित मेल संवाद भी सामने आए, जिसमें इजरायल-भारत रणनीति के नाम पर संवेदनशील चर्चाएं ईमेल के जरिए चलने की बातें उभरती हैं। ऊपर से केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के एप्सटीन कैलेंडर में बार-बार दिखने वाले एंट्री।यह सब मिलकर लोकतंत्र को आईना दिखाते हैं कि असली ‘ग्लोबल इमेज’ किस तरफ जा रही है। विश्वगुरु के नारे से लेकर एप्सटीन के इनबॉक्स तक भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा किस अंधेरी दिशा में बह रही है, यह सवाल अभी भी सत्ता के द्वार पर दस्तक दे रहा है… और जवाब अब भी गायब है।

 

भारतीय सत्ता का भद्दा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबिंब

अमेरिकी हाउस ओवर साइट कमिटी द्वारा जारी ताजा दस्तावेज और ड्रॉप साइट समाचार की रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में एक भूचाल पैदा करने लायक सामग्री सार्वजनिक की है। जेफ्री एप्सटीन दुनिया का कुख्यात यौन अपराधी जिसकी जिंदगी अपराध, ब्लैकमेलिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग की अंधेरी दुनिया में बीती, उसके याहू मेलबॉक्स में भारत के उच्च राजनीतिक हस्तियों से लेकर उद्योगपतियों तक के नामों का आना किसी भी लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला होना चाहिए। लेकिन भारत में तो लोकतंत्र की रीढ़ नारेबाजी से चलती है, न कि जवाबदेही से।

मोदी बैनन मीटिंग की कथित सेटिंग किसका खेल, किसका एजेंडा

रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में एप्सटीन लगातार कोशिश कर रहा था कि स्टीव बैनन और नरेंद्र मोदी की मुलाकात कराई जाए। बैनन जो अमेरिका को फिर से महान बनाओ विचारधारा का चेहरा है। दुनिया भर में उग्र दक्षिणपंथ के प्रचारक माने जाते हैं। एप्सटीन ने कथित तौर पर लिखा आपको मोदी से मिलना चाहिए… मैं तय कर सकता हूं, बैनन का जवाब कृपया। जो सरकार घरेलू आलोचकों का मुंह बंद करने में विशेषज्ञ हो, विपक्ष को ‘अर्बन नक्सल’, पत्रकारों को ‘एजेंडा गैंग’ और कार्यकर्ताओं को ‘टुकड़े टुकड़े मंडली’ कहकर खारिज करती हो उसे क्या जवाब देना है, जब उसके प्रधानमंत्री का नाम एक वैश्विक अपराधी के मेल में घूम रहा हो,
जवाब वही पुराना चुप्पी।

वैश्विक मंच पर भारत की न्यू इमेज टूटता नैरेटिव

ड्रॉप साइट के मुताबिक 2017 में एप्सटीन और एक ईमेल अकाउंट, जो कथित रूप से अनिल अंबानी से जुड़ा बताया गया, के बीच मेल हुए।
मेल का विषय था मोदी की अमेरिका यात्रा की तारीखें, इजरायल रणनीति, और संवेदनशील भू-राजनीतिक संदर्भ। एक मेल में लिखा गया प्रिय जेफरी, सूचना बीआर अनिल, एप्सटीन का जवाब भारत इजराइल कुंजी ‘नॉट फॉर ईमेल’ यह वाक्य अपने आप में एक पूरी कहानी कह देता है। यह महज सूचनात्मक संवाद था या कुछ और? हमारी सरकार इससे भी चुप है, लेकिन यह वही देश है जहां आम नागरिक का व्हाट्सऐप मैसेज भी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का खतरा बना दिया जाता है।

इजरायल भारत रणनीति और एप्सटीन कूटनीति की नींव क्या ऐसे बनाई जाती है?

2017 वह समय था जब भारत-अमेरिका-इजरायल त्रिकोणीय संबंध तेजी से मजबूत हो रहे थे। उसी दौरान एप्सटीन की मेल में इजरायल रणनीति पर चर्चा? एक यौन-अपराधी किसी लोकतंत्र की राजनयिक चर्चाओं का ‘कूरियर बॉय’ भी हो सकता है? अगर हां तो यह लोकतंत्र के पतन का सबसे भयावह प्रमाण है।

हरदीप पुरी का नाम एप्सटीन कैलेंडर में संयोग या संकेत?

एप्सटीन के निजी कैलेंडर में 2014 से 2017 के बीच हरदीप सिंह पुरी के नाम कई बार दर्ज मिले। पुरी तब संयुक्त राष्ट्र में अपने कार्यकाल के बाद न्यूयॉर्क में थे। लेकिन सवाल उठेगा तो उठना चाहिए कैसे, क्यों, और किस संदर्भ में पुरी ने चुप्पी साध रखी है, सरकार मौन है, और भारत के नागरिकों से उम्मीद की जाती है कि वे इस सबको अंतरराष्ट्रीय साजिश मानकर भूल जाएं।

मोदी सरकार की कूटनीति पारदर्शिता खत्म, परदे में खेल कायम

चाहे मामला पेगासस का हो या भाजपा के चुनावी बांड का सत्ता का पैटर्न एक ही है। जो सवाल असहज लगे, उन्हें राष्ट्र-विरोधी करार दो। लेकिन आज सवाल राष्ट्र से बड़ा है, यह देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सवाल है।
यदि एप्सटीन जैसे अपराधी के मेल में भारत के प्रधानमंत्री, वरिष्ठ मंत्रियों या उद्योगपतियों के नाम दिख रहे हैं तो क्या यह फेक न्यूज कहकर निपटाया जा सकता है?

वैश्विक मंच पर भारत की न्यू इमेज टूटता नैरेटिव

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आपको विश्वगुरु छवि में स्थापित करने की कोशिश की। लेकिन दुनिया में खबरें कोई आईटी सेल नहीं लिखता। अपराधी के मेल में भारतीय नेतृत्व का आना भारत की विदेश नीति, लोकतांत्रिक व्यवहार और राजनीतिक शुचिता पर गंभीर दाग है। क्या लोकतंत्र में सत्ता इतनी ऊंची हो जाती है कि उसका नाम अपराधियों की ईमेल डायरी में घूम जाए और देश को फर्क न पड़े? हमारी विदेश नीति का संचालन भी क्या आउटसोर्स हो चुका है। क्या लोकतंत्र की मर्यादा का हर पतन आईटी सेल छुपा लेगा? देश को जवाब चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करनी ही होगी।

* एप्सटीन की मेल में कथित तौर पर मोदी बैनन मीटिंग सेट करने की बातचीत।
* बैनन की 2019 में भारत पर टिप्पणी मैं भारत के लिए मोदी पर एक घंटे का शो कर रहा हूं।
* एप्सटीन का जवाब उनका ध्यान चीन को रोकने पर है।
* अनिल अंबानी से जुड़े ईमेल आईडी से भी कथित संवाद।
* मेल में भारत इजरायल रणनीति पर चर्चाओं का उल्लेख।
* हरदीप पुरी का नाम एप्सटीन के कैलेंडर में बार-बार दर्ज।
* सरकार की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं।
* लोकतंत्र, पारदर्शिता और विदेश नीति पर बड़ा सवाल।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button