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एसपी चन्दौली आदित्य लांग्हे के आदेश के बावजूद नही रुक रहा गांजे का काला कारोबार,क्या जिम्मेदार बन गए हिस्सेदार?

जिला आबकारी अधिकारी चन्दौली को हो गया है अंखमुदवा रोग,गांजे की अवैध वसूली का कर रहे जमकर भोग

धरना गांव का वीडियो वायरल, गोधना मोड़ से साहूपूरी तक फैला नशे का धंधा

चंदौली। जिले में अवैध कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस कप्तान आदित्य लांग्हे
की ओर से बार-बार सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में नाजायज गांजे की बिक्री थमने का नाम नहीं ले रही है। धरना गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें खुलेआम गांजे की बिक्री होती दिखाई दे रही है। यह वीडियो न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

कागजों तक सिमटी कार्रवाई

स्थानीय लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है। धरातल पर न तो छापेमारी होती है और न ही कारोबारियों पर ठोस कार्रवाई। सूत्र बताते हैं कि विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी भलीभांति है, लेकिन सिस्टम और सिंडिकेट के गठजोड़ के कारण अधिकारी चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझते हैं।

गोधना मोड़ से साहूपूरी तक बने नशे के अड्डे

मुगलसराय क्षेत्र के गोधना मोड़, खोवा मंडी, दुल्हीपुर, पड़ाव और साहूपूरी जैसे स्थान आज खुलेआम नशे के अड्डों में तब्दील हो चुके हैं। इन इलाकों में दिन-दहाड़े गांजे की बिक्री होती है, लेकिन विभाग आंखें मूंदे हुए है। लोगों का कहना है कि पुलिस की गश्त और विभागीय कार्रवाई केवल दिखावे तक ही सीमित है।

युवाओं का भविष्य खतरे में

गांव और कस्बों में फैलते इस नशे के जाल से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। पढ़ाई-लिखाई छोड़ कई किशोर नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। अभिभावकों में गहरी चिंता है कि यदि जल्द ही इस धंधे पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाली पीढ़ी नशे की लत में डूबकर अंधकार की ओर चली जाएगी।

कप्तान के आदेश की अनदेखी

कप्तान साहब ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले में किसी भी तरह का अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद धरना गांव से लेकर गोधना मोड़ और साहूपूरी तक गांजे की बिक्री यह दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अफसर कप्तान के आदेशों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।

जनता में नाराजगी, कार्रवाई पर सवाल

धरना गांव का वायरल वीडियो देखने के बाद आम लोगों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब सोशल मीडिया पर सबूत मौजूद हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या यह विभागीय मिलीभगत का नतीजा है या फिर सिस्टम की कमजोरी?

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मामला उजागर होने के बाद विभाग कोई ठोस कदम उठाता है या फिर हमेशा की तरह इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। सवाल यह भी है कि जब कप्तान साहब के आदेशों की अनदेखी हो रही है तो आखिर जिम्मेदारी तय कौन करेगा?

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