कर्तव्य की शहादत का डीजीपी राजीव कृष्ण ने रखा मान, आन ड्यूटी जान गवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों का बढ़ा दिया सम्मान
ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले 8 पुलिसकर्मियों के परिजनों को 14.15 करोड़ रुपए की सहायता

● कर्तव्य की शहादत का डीजीपी राजीव कृष्ण ने रखा मान, आन ड्यूटी जान गवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों का बढ़ा दिया सम्मान
● ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले 8 पुलिसकर्मियों के परिजनों को 14.15 करोड़ रुपए की सहायता
● बैंक ऑफ बड़ौदा सैलरी पैकेज के तहत मिला आर्थिक सुरक्षा कवच
● डीजीपी राजीव कृष्णा ने सौंपे चेक, कहा पुलिस परिवार अकेले नहीं
● सड़क हादसों में शहीद हुए जवानों के परिवारों को 1.70 से 2.12 करोड़ रुपए तक की राशि
● पुलिस मुख्यालय में मेधावी छात्र-छात्राओं का ए.के.दास मेडल से सम्मान
● पुलिसकर्मियों के बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहन, 10-10 हजार की छात्रवृत्ति
◆ शुभम श्रीवास्तव
लखनऊ। पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार 12 दिसंबर 2025 का दिन उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए संवेदना, सम्मान और संबल का प्रतीक बनकर सामने आया। वर्दी की गरिमा को निभाते हुए ड्यूटी के दौरान प्राणों की आहुति देने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए यह दिन सिर्फ आर्थिक सहायता का नहीं, बल्कि भरोसे और जिम्मेदारी के सार्वजनिक निर्वहन का संदेश लेकर आया। डीजीपी राजीव कृष्णा ने न केवल शोक संतप्त परिवारों को करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता सौंपी, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस अपने जवानों और उनके परिजनों को कभी अकेला नहीं छोड़ती। ड्यूटी के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले आठ पुलिसकर्मियों के परिजनों को बैंक ऑफ बड़ौदा के पुलिस सैलरी पैकेज के तहत कुल 14.15 करोड़ रुपये के चेक वितरित किए गए। यह वह क्षण था जब सरकारी घोषणाएं जमीनी हकीकत में बदलती दिखीं। हर चेक के साथ एक परिवार के टूटे सपनों को सहारा मिला, बच्चों के भविष्य को सुरक्षा मिली और यह भरोसा मजबूत हुआ कि शहादत का सम्मान सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है। समारोह में एक और सकारात्मक संदेश भी सामने आया। पुलिसकर्मियों के बच्चों की प्रतिभा और मेहनत को पहचान देते हुए दो मेधावी छात्र-छात्राओं को ए.के.दास मेडल फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया। यह संदेश साफ था कि पुलिस की अगली पीढ़ी को सिर्फ संवेदना नहीं, अवसर और प्रेरणा भी दी जाएगी। यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर व्यवस्था की आलोचना के बीच ऐसे सकारात्मक उदाहरण अनदेखे रह जाते हैं, जबकि यही उदाहरण बताते हैं कि संस्थाएं जब जिम्मेदारी निभाती हैं तो भरोसा लौटता है। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत एक गंभीर लेकिन गरिमामय वातावरण में हुई। डीजीपी राजीव कृष्णा ने सबसे पहले उन पुलिसकर्मियों को नमन किया, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की नौकरी जोखिमों से भरी है और सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने जवानों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
14.15 करोड़ की वित्तीय सहायता, 8 परिवारों को संबल
बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ हुए करार के तहत पुलिस सैलरी पैकेज में आकस्मिक दुर्घटना बीमा की सुविधा प्रदान की जाती है। इसी योजना के अंतर्गत शुक्रवार को आठ पुलिसकर्मियों के आश्रितों को चेक वितरित किए गए। निरीक्षक वीरेंद्र प्रताप (प्रयागराज कमिश्नरेट)
12 जुलाई 2025 को ड्यूटी के दौरान डंपर से टक्कर में उनका निधन हुआ था। उनके परिवार को 2.12 करोड़ रुपये का चेक प्रदान किया गया। उप-निरीक्षक सुरेश प्रसाद गोंड (महराजगंज) 1 अप्रैल 2025 को पुलिस कार्यालय जाते समय ट्रैक्टर से टक्कर में जान गई। परिजनों को 1.70 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। उप-निरीक्षक मंजीत सिंह (अमेठी) दबिश के बाद लौटते समय 20 जून 2025 को अनियंत्रित बस से टक्कर में मृत्यु। परिवार को 1.70 करोड़ रुपये। उप-निरीक्षक मोहित कुमार (शाहजहांपुर) 1 फरवरी 2025 को पीछे से आ रहे ट्रक ने कार को टक्कर मारी। परिजनों को 1.70 करोड़ रुपये। मुख्य आरक्षी सुरेन्द्र सिंह (12वीं पीएसी) 5 अप्रैल 2025 को फतेहपुर लौटते समय अज्ञात वाहन से टक्कर में निधन। परिवार को 1.85 करोड़ रुपये। मुख्य आरक्षी अनुज कुमार (गाजियाबाद कमिश्नरेट) 11 अगस्त 2025 को पीआरवी वैन से बॉक्स निकालते समय ट्रक की टक्कर से मृत्यु। परिजनों को 1.70 करोड़ रुपये। आरक्षी बीर बहादुर (चंदौली) 6 अगस्त 2025 को ड्यूटी के कार्य से जाते समय ट्रक की टक्कर से जान गई। परिवार को 1.70 करोड़ रुपये। आरक्षी राज गुप्ता (सिद्धार्थनगर) सिर में गंभीर चोट के बाद इलाज के दौरान 29 अप्रैल 2025 को निधन। परिजनों को 1.70 करोड़ रुपये प्रदान किए। डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि यह सहायता किसी भी तरह से उस क्षति की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन यह सरकार की ओर से एक ठोस प्रयास है कि शहीद पुलिसकर्मियों के परिवार आर्थिक असुरक्षा से न जूझें।
पुलिस परिवारों के साथ खड़ा सिस्टम
इस मौके पर अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन प्रशांत कुमार, आईजी भवन एवं कल्याण आर.के. भारद्वाज, आईजी कार्मिक शलभ माथुर सहित बैंक ऑफ बड़ौदा के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैंक के उप महाप्रबंधक कमलेश राठौर और शाखा प्रबंधक शशिकांत सिंह ने बताया कि पुलिस सैलरी पैकेज को और मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में परिवारों को समय पर और पारदर्शी सहायता मिल सके।
शिक्षा को भी सम्मान: ए.के.दास मेडल
इसी कार्यक्रम में एक दूसरा भावनात्मक लेकिन प्रेरक अध्याय जुड़ा। डीजीपी राजीव कृष्णा ने दो मेधावी छात्र-छात्राओं को ए.के.दास मेडल फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस से सम्मानित किया। प्रिया कुमारी, आरक्षी जयपाल सिंह की पुत्री, जिन्होंने इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2025 में 94 फीसदी अंक प्राप्त किए। अदरेश सिंह, आरक्षी राघवेन्द्र सिंह के पुत्र, जिन्होंने 92.8 फीसदी अंक हासिल किए। दोनों को 10-10 हजार रुपये की छात्रवृत्ति और मेडल प्रदान किए गए।
डॉ.अमृता दास का योगदान
यह पुरस्कार वर्ष 2016 से इंस्टीट्यूट फॉर कैरियर स्टडीज, महानगर लखनऊ की संस्थापक निदेशक डॉ. अमृता दास द्वारा अपने पिता, पूर्व डीजीपी ए.के. दास की स्मृति में दिया जा रहा है। डॉ. अमृता दास ने कहा कि पुलिसकर्मियों के बच्चे कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हैं और उनकी मेहनत को पहचान मिलना जरूरी है। यह कार्यक्रम दिखाता है कि यदि नीतियां ईमानदारी से लागू हों तो वे सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती हैं।
* 8 शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को 14.15 करोड़ की सहायता
* बैंक ऑफ बड़ौदा सैलरी पैकेज से मिला आर्थिक सुरक्षा कवच
* डीजीपी राजीव कृष्णा ने स्वयं चेक सौंपकर दिया भरोसा
* सड़क दुर्घटनाओं में शहादत पाने वाले जवानों को सम्मान
* पुलिसकर्मियों के बच्चों की शिक्षा को विशेष प्रोत्साहन
* ए.के.दास मेडल से दो मेधावी छात्र-छात्रा सम्मानित




