वाराणसी

काशी के व्यापार को रफ्तार देने की पहल यातायात, पार्किंग और सुरक्षा पर प्रशासन व्यापारी संवाद

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल की वाराणसी इकाई ने जनसंवाद संगोष्ठी का किया आयोजन

● काशी के व्यापार को रफ्तार देने की पहल यातायात, पार्किंग और सुरक्षा पर प्रशासन व्यापारी संवाद

● फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल की वाराणसी इकाई ने जनसंवाद संगोष्ठी का किया आयोजन

● एडीसीपी यातायात ने व्यापारियों की समस्याएं गंभीरता से सुना और समाधान का दिया भरोसा

● रोपवे निर्माण के चलते गोदौलिया, लक्सा, गिरिजाघर मार्ग बंद होने से व्यापार पर पड़े असर का रहा मुद्दा

● व्यस्त बाजारों में छोटी-छोटी पार्किंग, ई-रिक्शा, ऑटो के कड़े नियंत्रण की उठी मांग

● स्कूल-कॉलेजों में सायं 4 बजे के बाद पार्किंग व्यवस्था लागू करने का दिया सुझाव

● शहर के 15 प्रमुख चौराहों पर व्यापारियों की 5 सदस्यीय निगरानी समितियों के गठन का आश्वासन

● 35 युवा व्यापारियों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण कर संगठन विस्तार को मजबूती दी

● प्रशासन व्यापारी सहयोग से सुगम यातायात और सुरक्षित बाजार व्यवस्था का संकल्प दोहराया

 

वाराणसी। काशी शहर आस्था, परंपरा, संस्कृति और व्यापार का साझा संगम है। यहां की गलियों में जितनी गूंज मंदिरों की घंटियों की है, उतनी ही रौनक बाजारों की भी। लेकिन बीते कुछ वर्षों में विकास परियोजनाओं, यातायात दबाव, अनियंत्रित ई-रिक्शा, पार्किंग अव्यवस्था और कानून व्यवस्था से जुड़े सवालों ने काशी के पारंपरिक व्यापार को गंभीर चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। इन्हीं चुनौतियों के बीच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (फैम) की वाराणसी जिला इकाई ने एक सार्थक पहल करते हुए प्रशासन और व्यापारियों को आमने-सामने बैठाकर जनसंवाद का मंच तैयार किया। 19 जनवरी 2025, सोमवार को होटल हरि विलास के सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी का उद्देश्य केवल शिकायतों की सूची पढ़ना नहीं था, बल्कि समस्याओं के जमीनी समाधान तलाशना और संगठनात्मक मजबूती के साथ व्यापारिक हितों की रक्षा करना था। यातायात, पार्किंग, कानून व्यवस्था, रोपवे निर्माण से प्रभावित बाजार, तीर्थयात्रियों और ग्राहकों की आवाजाही, तथा संगठन विस्तार जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि एडीसीपी यातायात रहे, विशिष्ट अतिथि के रूप में फैम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेम मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग व्यापारों से जुड़े 35 युवा व्यापारियों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण कर यह संदेश दिया कि काशी का व्यापारी अब केवल अपने प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि शहर की समग्र व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी निभाने को तैयार है।
इस संवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि व्यापारियों ने अपनी बात भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और समाधानपरक तरीके से रखी। रोपवे निर्माण के चलते गोदौलिया, लक्सा और गिरिजाघर मार्ग के लंबे समय से बंद रहने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और ग्राहकों की संख्या में आई गिरावट को व्यापारियों ने आंकड़ों और अनुभवों के साथ सामने रखा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि यातायात और पार्किंग की समस्या का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो काशी के पारंपरिक बाजार अपनी जीवंतता खो सकते हैं। एडीसीपी यातायात ने भी स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया कि काशी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक शहर में यातायात प्रबंधन केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन और व्यापारियों के साझा सहयोग से ही संभव है। इसी भावना के साथ उन्होंने कई ठोस आश्वासन दिए, जिनमें प्रमुख 15 चौराहों पर व्यापारियों की निगरानी समितियों का गठन, छोटी पार्किंग स्थलों की पहचान और गोदौलिया मार्ग को जल्द सुचारु करने की दिशा में पहल शामिल है। संगोष्ठी उस सोच का प्रतीक बनी, जिसमें टकराव नहीं, बल्कि संवाद के जरिए समाधान खोजने की कोशिश दिखाई दी। जहां व्यापारी सिर्फ शिकायतकर्ता नहीं, बल्कि समाधान का साझेदार बनने की भूमिका में दिखे।

काशी केवल आध्यात्मिक नगरी नहीं, बल्कि एक जीवंत व्यापारिक केंद्र

वाराणसी की पहचान सदियों से केवल आध्यात्मिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत व्यापारिक केंद्र के रूप में भी रही है। काशी के बाजार चाहे वह गोदौलिया हो, विश्वनाथ गली हो, चौक-ठठेरी बाजार हो या लक्सा सिर्फ खरीद-बिक्री के स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद के केंद्र भी हैं। लेकिन आधुनिक शहरी दबाव, बेतरतीब यातायात, पार्किंग की कमी और योजनाओं के अधूरे क्रियान्वयन ने इन बाजारों की सांसें घोंटनी शुरू कर दी हैं। इसी पृष्ठभूमि में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल की वाराणसी जिला इकाई द्वारा आयोजित जनसंवाद, व्यापारिक समस्याएं, यातायात एवं कानून व्यवस्था व संगठन विस्तार संगोष्ठी को केवल एक औपचारिक बैठक कहना, इस पहल के महत्व को कम करके आंकना होगा। यह आयोजन प्रशासन और व्यापारियों के बीच विश्वास बहाली की एक गंभीर कोशिश के रूप में सामने आया।

रोपवे निर्माण विकास या अवरोध?

संगोष्ठी में सबसे मुखर मुद्दा रहा रोपवे निर्माण के चलते गोदौलिया आने वाले लक्सा से गिरिजाघर मार्ग का महीनों से पूरी तरह बंद रहना। व्यापारियों का कहना था कि यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि काशी के व्यापार की जीवनरेखा है। इसके बंद होने से न सिर्फ स्थानीय ग्राहकों की आवाजाही रुकी, बल्कि श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों और विदेशी पर्यटकों का रुझान भी दूसरे इलाकों की ओर मुड़ गया। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि क्या विकास परियोजनाओं की कीमत पारंपरिक व्यापार को खत्म करके चुकाई जाएगी? क्या रोपवे जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ वैकल्पिक मार्ग और अस्थायी व्यवस्था की योजना पहले से नहीं बननी चाहिए थी? यह सवाल केवल व्यापार का नहीं, बल्कि शहरी नियोजन की संवेदनशीलता का भी है।

पार्किंग सबसे बड़ी बाधा

काशी के व्यस्ततम बाजारों में पार्किंग की समस्या वर्षों से नासूर बनी हुई है। संगोष्ठी में व्यापारियों ने एक सुर में मांग उठाई कि नगर निगम की उपलब्ध जमीनों पर छोटी-छोटी पार्किंग विकसित की जाए। उनका तर्क सीधा था। ग्राहक अगर वाहन खड़ा नहीं कर पाएगा, तो बाजार तक पहुंचेगा ही नहीं। क्या स्मार्ट सिटी और विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स में व्यापारिक जरूरतों को प्राथमिकता दी गई? या फिर चमक-दमक के नाम पर जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर दिया गया?

ई-रिक्शा और ऑटो का अनियंत्रित संचालन

व्यापारियों ने पूर्व की तरह केवल बारकोडिंग वाले ई-रिक्शा और ऑटो के संचालन को सख्ती से लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि अनियंत्रित ई-रिक्शा न केवल जाम बढ़ा रहे हैं, बल्कि पैदल यात्रियों और दुकानदारों के लिए भी खतरा बन चुके हैं।
एडीसीपी यातायात ने इस मुद्दे पर स्वीकार किया कि नियमों का पालन सख्ती से कराया जाएगा, लेकिन साथ ही व्यापारियों से भी सहयोग की अपील की। यह स्वीकारोक्ति अपने आप में अहम है, क्योंकि अक्सर प्रशासन नियमों के नाम पर जिम्मेदारी से बचता नजर आता है।

स्कूल कॉलेज और शाम का जाम

शहर के स्कूल और कॉलेज छुट्टी के समय जाम के बड़े कारण बनते हैं। व्यापारियों ने सुझाव दिया कि सायं 4 बजे के बाद स्कूल कॉलेज परिसरों में ही पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो। यह सुझाव बताता है कि व्यापारी केवल समस्या नहीं गिना रहे, बल्कि समाधान भी सुझा रहे हैं।

15 चौराहों पर निगरानी समितियां नई पहल

एडीसीपी यातायात ने पुलिस कमिश्नर के निर्देशन में शहर के 15 प्रमुख चौराहों पर व्यापारियों की 5 सदस्यीय समितियों द्वारा निगरानी का भरोसा दिया। यह कदम अगर ईमानदारी से लागू होता है, तो यह प्रशासन और व्यापारियों के बीच साझेदारी का एक नया मॉडल बन सकता है।

संगठन विस्तार 35 युवा व्यापारियों की भागीदारी

इस संगोष्ठी का एक और महत्वपूर्ण पहलू रहा 35 युवा व्यापारियों का संगठन से जुड़ना। यह केवल सदस्यता अभियान नहीं, बल्कि काशी के व्यापारिक भविष्य में युवा नेतृत्व की भूमिका का संकेत है। वरिष्ठ व्यापारी जहां अनुभव लाते हैं, वहीं युवा ऊर्जा और नए विचारों के साथ संगठन को मजबूत करते हैं।

फैम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संदेश

फैम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेम मिश्रा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि काशी जैसे शहर में व्यापार और संस्कृति को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। यदि व्यापार कमजोर होगा, तो शहर की आर्थिक रीढ़ टूटेगी। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और प्रशासन से निरंतर संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।

प्रशासन का आश्वासन और जिम्मेदारी

एडीसीपी यातायात ने अपने उद्बोधन में कहा कि काशी प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं और ग्राहकों का भार उठाती है। सुगम यातायात और सुदृढ़ पार्किंग के बिना यह संभव नहीं। उन्होंने गोदौलिया मार्ग को जल्द सुचारु करने, पार्किंग स्थलों की पहचान और व्यापारियों के साथ मिलकर समाधान निकालने का भरोसा दिया।
लेकिन ‘अचूक संघर्ष’ की शैली में सवाल यहीं खत्म नहीं होते। क्या यह भरोसा कागजों तक सीमित रहेगा, या जमीन पर भी दिखेगा? क्या पूर्व की तरह आश्वासन देकर फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी, या इस बार काशी के व्यापारी सचमुच राहत महसूस करेंगे?

संवाद ही रास्ता

संगोष्ठी इस बात का प्रमाण है कि टकराव नहीं, संवाद ही समाधान का रास्ता है। लेकिन संवाद तभी सार्थक होगा, जब उसके परिणाम जमीन पर दिखें। काशी का व्यापारी अब सिर्फ सहने के मूड में नहीं है। वह सवाल भी पूछेगा, सुझाव भी देगा और जरूरत पड़ी तो संघर्ष भी करेगा लेकिन जनहित और शहर की बेहतरी के लिए।

* फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल की जनसंवाद संगोष्ठी का आयोजन
* यातायात, पार्किंग और कानून व्यवस्था पर खुली चर्चा
* रोपवे निर्माण से प्रभावित बाजारों का मुद्दा प्रमुख
* छोटी पार्किंग और ई-रिक्शा नियंत्रण की मांग
* 15 प्रमुख चौराहों पर व्यापारियों की निगरानी समितियां
* 35 युवा व्यापारियों की संगठन में भागीदारी
* प्रशासन-व्यापारी सहयोग से समाधान का आश्वासन
* काशी के व्यापारिक भविष्य के लिए सकारात्मक पहल

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