वाराणसी

खाद्य एवं औषधि प्रशासन का हाल: कौशलेंद्र शर्मा जिला अभिहित अधिकारी, एक नम्बर के घूसखोर व भ्र्ष्टाचारी

~ खाद्य सुरक्षा विभाग की कलंक कथा मिठाइयों में जहर परोसने का कारोबार,

~ अभिहित अधिकारी बना सरगना
नकली खोया, सस्ते चीनी के विकल्प में खतरनाक केमिकल्स का उपयोग

~ रसायनों से बनी रंग-बिरंगी मिठाइयां यही है असलियत

~ त्योहारों पर दिखावे की छापेमारी,

~ सालभर बेधड़क चलता मिलावट का गोरखधंधा

~ नामचीन मिठाई दुकानों में मिलावट का खुला खेल, अभिहित अधिकारी का मौन समर्थन

~ सुविधा शुल्क न मिलने पर छापा, मिलने पर ‘साफ-सफाई देखी गई’ जैसी होती है रिपोर्ट

~ सुविधा शुल्क न देने वालों के यहां सैंपल लेकर मीडिया के कैमरे के सामने की जाती है कार्रवाई

~ ‘वसूली प्रबंधन’ का हिस्सा बनी छापेमारी, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का उपाय नहीं!

~ नकली खोया, केमिकल वाली मिठाई से बीमारियां बढ़ीं, खाद्य विभाग बना मूक दर्शक

~ नकली खोया, सस्ते रसायनों से बना मिलावटी घी, रंग-बिरंगे केमिकल से बनती हैं मिठाईयां

~ जनता से विश्वासघात, हर निवाले में जहर परोसने का खेल जारी

 

वाराणसी। देश की आध्यात्मिक राजधानी, भगवान शिव की नगरी, और दुनिया भर से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र। इस नगरी की पहचान सिर्फ गंगा, घाट और मंदिरों से ही नहीं, बल्कि यहां के मिठाई बाजार से भी है। बनारसी रसगुल्ले, लड्डू, बर्फी, पेड़ा, मालपुआ हर गली-कूचे में मिठास का संसार बसा हुआ है। लेकिन अब यही मिठास जहर बनकर लोगों के गले उतर रही है। त्योहारों पर छापेमारी का दिखावा, और पूरे साल जारी मिलावट का खुला खेल यही है वाराणसी के खाद्य सुरक्षा विभाग की असलियत। साल में दीपावली, होली या सावन मेले जैसे अवसरों पर खाद्य विभाग कुछ छापे जरूर मारता है। स्थानीय अखबारों में अधिकारी की तस्वीरें भी छपती हैं, ‘खाद्य सुरक्षा टीम ने की कार्रवाई’ जैसे हेडिंग लगाई जाती है। लेकिन सच यह है कि इन छापों का उद्देश्य वास्तविक मिलावटखोरी पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि मीडिया में मौजूदगी दिखाना है। छोटे दुकानदारों को पकड़ना आसान होता है। असली खेल बड़े नामचीन ब्रांड्स के पीछे चलता है, जिनसे मासिक सुविधा शुल्क के बदले आंखें मूंद ली जाती हैं। इन सब का इकलौता जिम्मेदार जिला अभिहित अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा है जो व्यापारियों के आगे पूरी तरह बिका हुआ है।

 

नामचीन मिठाई दुकानों में मिलावट का खुला खेल, अभिहित अधिकारी का मौन समर्थन

वाराणसी के प्रतिष्ठित मिठाई दुकानों की मिठास दरअसल सिंथेटिक कैमिकल्स और नकली खोये से बनी मिठास है। यहां का खाद्य सुरक्षा विभाग इस गोरखधंधे का मौन साझेदार बन चुका है। गोदौलिया, मैदागिन, लंका, सुंदरपुर, मंडुआडीह, रथयात्रा, सिगरा, चेतगंज, पाण्डेयपुर, कचहरी तक लगभग हर इलाके की बड़ी दुकानों के पीछे विभाग का ‘मौन समर्थन’ खड़ा है। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय मिठाई विक्रेता ने कहा बड़े दुकानदार हर महीने सुविधा शुल्क देते हैं, इसलिए उनके नमूने कभी जांच के लिए नहीं भेजे जाते। छापेमारी भी पहले से तय होती है कि कहां करनी है और कहां नहीं।

 

खाद्य सुरक्षा अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा पर संगीन आरोप, सुविधा शुल्क की खुली मांग

वाराणसी के अभिहित अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा पर सुविधा शुल्क की खुली मांग का आरोप नए नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो स्थानीय व्यापारी संगठनों के बीच यह ‘खुला रहस्य’ है कि हर बड़े मिठाई कारोबारी से मासिक वसूली होती है। जिन दुकानदारों से सुविधा शुल्क नहीं मिलता, उनके खिलाफ ही दिखावे की कार्रवाई होती है। यह भी एक तरह का उपकृत करने का तंत्र बन चुका है ‘जो देगा, वो बचेगा, जो नहीं देगा, वो फंसेगा’। एक पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि खाद्य सुरक्षा विभाग का अधिकांश हिस्सा अब व्यापारियों से वसूली के लिए काम कर रहा है। यहां मिलावट रोकना उद्देश्य नहीं, बल्कि वसूली करना लक्ष्य है।

 

जिन दुकानदारों से नहीं मिलती ‘मासिक वसूली’, उनके खिलाफ ही होती है कार्रवाई

डॉक्टरों का कहना है कि मिठाइयों में सिंथेटिक मिल्क सॉलिड्स और सोडियम बेंजॉएट, ‘ऑक्सीटोसिन’, आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एसेंस’ का इस्तेमाल किया जाता है जिससे कैंसर, लीवर खराब होना और पेट की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा त्योहार के बाद पेट दर्द, उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग के केस बढ़ जाते हैं। इसका मुख्य कारण यही मिलावटी मिठाइयां हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग को सब मालूम, लेकिन आंखें बंद

वाराणसी जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक शहर में यह मिलावटखोरी सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है, यह नैतिक विश्वासघात है। श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर लौटते हैं तो प्रसाद में भी नकली मिठाइयों का सामना करते हैं। मिठाइयों में अब स्वाद नहीं जहर बिक रहा है। इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है, जो भ्रष्टाचार के दलदल में डूब चुका है। एफएसएसएआई कानूनों का खुला उल्लंघन हो रहा है, पर कोई रोकने वाला नहीं। प्रदेश सरकार के ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन’ के दावे वाराणसी में खोखले साबित हो रहे हैं।

  • मिठाइयों, दूध, मावे और खाद्य तेलों में मिलावट आम बात
  • त्योहार आते ही दिखावे के लिए छापेमारी, छोटे दुकानदार निशाने पर
  • खाद्य सुरक्षा अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा पर बड़े दुकानदारों से सुविधा शुल्क लेने का आरोप
  • मीडिया में फोटो खिंचवाकर कार्रवाई दिखाना रूटीन
  • नकली खोया, सिंथेटिक मिठाईयों में उपयोग खतरनाक, कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा
  • त्योहारों पर मिठाई के कारोबार का आंकड़ा करोड़ों में, पर नमूनों की जांच गिनी-चुनी
  • खाद्य सुरक्षा विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें, वसूली तंत्र बना महकमा
  • नामचीन मिठाई दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखाता विभाग
  • खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन
  • धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी में, श्रद्धालुओं और स्थानीय जनता के साथ धोखा
  • स्वास्थ्य विभाग भी आंखें मूंदे बैठा, कई बीमारियों की वजह बन रहीं मिलावटी मिठाइयां
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘भ्रष्टाचार मुक्त शासन’ के दावों की खुली पोल
  • जिलाधिकारी से लेकर खाद्य आयुक्त तक शिकायतों का अंबार, कार्रवाई नहीं

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