गंगा किनारे अवैध निर्माण पर याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज, वीडीए को मिली राहत
अचूक संघर्ष डेस्क

दिल्ली/वाराणसी। गंगा नदी के दो सौ मीटर क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ दायर जनहित याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है, जिससे वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) को बड़ी राहत मिली है। यह याचिका उत्कर्ष फाउंडेशन और देवाशीष कोटियाल समिति द्वारा 5 जुलाई 2025 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर की गई थी।
प्रकरण में वीडीए की ओर से अधिवक्ता रवि प्रकाश पांडेय ने कोर्ट में ठोस तर्क और तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट किया कि इस विषय पर पूर्व से ही एक वाद कौटिल्य सोसाइटी बनाम भारत संघ के रूप में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT), नई दिल्ली में विचाराधीन है। NGT में गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर (H.F.L.), सुरक्षा, और भारत सरकार की 7 अक्टूबर 2016 की अधिसूचना के तहत जिम्मेदारियों के निर्वहन पर पहले से सुनवाई जारी है।
इस परिस्थिति में एक ही विषय पर समानांतर जनहित याचिका का पुनः दायर किया जाना न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार अवैध और अनुचित था। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए, 9 जुलाई 2025 को प्रथम सुनवाई में ही याचिका को निरर्थक और पोषणीय न होने के आधार पर खारिज कर दिया।
यह निर्णय विकास परियोजनाओं के प्रति न्यायपालिका की स्पष्ट दृष्टिकोण को दर्शाता है और यह भी संकेत देता है कि पहले से चल रहे मामलों में समान मुद्दों पर दोहराव को स्थान नहीं मिलेगा।




