चन्दौली

चन्दौली के डीओ का कुकर्म: आबकारी आयुक्त आदर्श समेत जिला आबकारी अधिकारी सुभाष को हुआ अंखमुदवा रोग, शीर्ष अधिकारी गांजे से प्राप्त लक्ष्मी का कर रहे भोग

नशामुक्ति के नारे, गांजा का साम्राज्य और आबकारी की चुप्पी

● चन्दौली के डीओ का कुकर्म

● आबकारी आयुक्त आदर्श समेत जिला आबकारी अधिकारी सुभाष को हुआ अंखमुदवा रोग, शीर्ष अधिकारी गांजे से प्राप्त लक्ष्मी का कर रहे भोग

● नशामुक्ति के नारे, गांजा का साम्राज्य और आबकारी की चुप्पी

● चंदौली में जिला आबकारी अधिकारी सुबाष चंद्र के इर्द-गिर्द तस्करी के आरोपों का जाल

● नशामुक्ति अभियान बनाम जमीनी हकीकत

● फुटकर नहीं, कथित सिंडिकेट का खेल

● हर गांव में गांजा, क्या विभाग अनजान है?

● मुगलसराय सबसे बड़ा हॉटस्पॉट?

● खेत, झाड़ियां और खाली मकान बने अड्डे

● किशोरों तक पहुंचता नशे का जाल

● आबकारी विभाग और कारखास सिस्टम

● सवालों के घेरे में जिला आबकारी अधिकारी

 

चंदौली। प्रदेश सरकार नशामुक्त जिस सपने को पोस्टर, बैनर, नारों और सरकारी अभियानों के सहारे गढ़ रही है, उसकी असलियत चंदौली जनपद की गलियों, खेतों, झाड़ियों और रेलवे ट्रैक के आसपास बिखरी पड़ी है। यहां नशा कोई छिपा हुआ अपराध नहीं रहा, बल्कि कथित तौर पर एक ऐसा खुला कारोबार बन चुका है, जिसे देखकर आम लोग नहीं, बल्कि सवाल पूछने की हिम्मत रखने वाले भी खामोश हो जा रहे हैं। सरकारी मंचों से दावा किया जाता है कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है। स्कूलों में बच्चों को शपथ दिलाई जा रही है, पंचायतों में भाषण हो रहे हैं, कॉलेजों में सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। लेकिन चंदौली की ज़मीनी तस्वीर इन नारों को मुंह चिढ़ाती दिखाई देती है। ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और अभिभावकों का दावा है कि जिले के कई थाना क्षेत्रों में गांजा न सिर्फ उपलब्ध है, बल्कि कथित रूप से नियमित सप्लाई और खुलेआम बिक्री के रूप में फैल चुका है। यह सवाल अब फुसफुसाहट नहीं, बल्कि गली-चौराहों पर उठने वाली आवाज बन चुका है कि जब गांजा हर दूसरे गांव, कस्बे और मोहल्ले में मिल रहा है, तो क्या यह महज छोटे-मोटे नशेड़ियों या फुटकर विक्रेताओं का खेल हो सकता है? या फिर इसके पीछे कोई संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसकी जड़ें पुलिस से लेकर आबकारी विभाग तक फैली हुई हैं?

स्थानीय लोगों के आरोपों के केंद्र में जिला आबकारी अधिकारी सुबाष चंद्र का नाम बार-बार सामने आ रहा है। सवाल यह नहीं है कि आरोप सही हैं या गलत, सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर नशे का नेटवर्क कैसे फल-फूल रहा है और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे क्यों बैठे हैं? आबकारी विभाग, जिसका काम शराब की एक-एक बोतल पर नजर रखना है, वह गांजा जैसे अवैध नशीले पदार्थ की कथित खुलेआम बिक्री से अनजान कैसे हो सकता है? मुगलसराय, अलीनगर, धानापुर, धीना और सैयदराजा थाना क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, हर जगह एक ही कहानी सुनाई देती है। सबको पता है, लेकिन कोई कुछ बोल नहीं रहा। स्थानीय लोग कहते हैं कि पहले गांजा चोरी-छिपे बिकता था, अब पुड़िया हाथ में लेकर लोग घूमते हैं। यह बदलाव केवल नशे के बाजार का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे के ढीले पड़ने का भी संकेत देता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस कथित नशे के नेटवर्क की चपेट में अब किशोर और युवा तेजी से आ रहे हैं। स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों के बारे में अभिभावकों का कहना है कि वे पढ़ाई छोड़कर नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं। परिवार टूट रहे हैं, लेकिन शिकायतों का अंजाम अक्सर देख लेंगे या कार्रवाई चल रही है तक सिमट जाता है। चर्चा यह भी है कि आबकारी विभाग के भीतर एक कथित कारखास या बिचौलिया तंत्र सक्रिय है, जो सूचनाओं को मैनेज करता है, अवैध कारोबारियों से संपर्क साधता है और अफसरों तक सब कुछ सेट रखता है। अफसर बदलते हैं, लेकिन सिस्टम जस का तस बना रहता है। यह आरोप अब आम हो चला है। यह रिपोर्ट किसी अदालत का फैसला नहीं, बल्कि चंदौली की सड़कों, गांवों और मोहल्लों से उठ रही उन आवाजों का दस्तावेज है, जो पूछ रही है क्या नशामुक्ति का दावा केवल कागजों तक सीमित है और क्या चंदौली में गांजा तस्करी बिना संरक्षण के संभव है।

गांजा का साम्राज्य और आबकारी विभाग की चुप्पी

नशामुक्त प्रदेश का दावा और चंदौली की स्याह हकीकत
उत्तर प्रदेश सरकार नशामुक्त प्रदेश को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। मुख्यमंत्री से लेकर जिला स्तर के अफसर तक मंचों से यह दावा करते नहीं थकते कि नशे के अवैध कारोबार पर ऐतिहासिक सख्ती की जा रही है। विद्यालयों में बच्चों को शपथ दिलाई जा रही है, पंचायतों में पोस्टर लगाए जा रहे हैं और सरकारी विज्ञापनों में नशे के खिलाफ जंग की तस्वीर पेश की जा रही है। लेकिन चंदौली जनपद की जमीनी हकीकत इन दावों को खोखला साबित करती नजर आ रही है। यहां नशे के खिलाफ जंग नहीं, बल्कि कथित तौर पर नशे का साम्राज्य फल-फूल रहा है। गांजा अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि लोगों के आरोपों के मुताबिक खुलेआम, नियमित और संगठित तरीके से बिक रहा है। सवाल यह है कि यदि सरकार सचमुच नशे के खिलाफ गंभीर है, तो चंदौली में यह कारोबार कैसे फल-फूल रहा है?

फुटकर नहीं, कथित संगठित सिंडिकेट का खेल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांजा केवल इक्का-दुक्का जगहों पर बिकता, तो इसे छोटे अपराधियों का मामला माना जा सकता था। लेकिन जब जिले के कई थाना क्षेत्रों, गांवों, कस्बों और बाजारों में इसकी उपलब्धता सामान्य बात बन जाए, तो यह संकेत देता है कि इसके पीछे कोई बड़ा और संगठित नेटवर्क सक्रिय है। ग्रामीणों का सवाल है कि गांजा कहां से आता है, कैसे स्टोर होता है और किसके संरक्षण में इलाके-इलाके में सप्लाई किया जाता है? यह काम किसी अकेले व्यक्ति या छोटे गिरोह के बस का नहीं माना जा सकता। आरोप है कि यह एक ऐसा सिंडिकेट है, जिसमें नीचे से ऊपर तक मैनेजमेंट बैठा हुआ है।

पुलिस ही नहीं, आबकारी विभाग भी सवालों के घेरे में

अब तक नशे के मामलों में सारा ठीकरा पुलिस पर फोड़ा जाता रहा है, लेकिन चंदौली में उठ रहे सवाल इससे आगे जाते हैं। स्थानीय लोगों के आरोपों के केंद्र में आबकारी विभाग भी है। लोगों का तर्क सीधा है जब शराब की एक बोतल पर आबकारी विभाग की नजर रहती है, तो गांजा जैसे अवैध नशीले पदार्थ की खुलेआम बिक्री कैसे अनदेखी रह जाती है? लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग केवल राजस्व वसूली तक सीमित रह गया है और अवैध नशे के खिलाफ उसकी भूमिका संदिग्ध होती जा रही है। यदि विभाग सचमुच सक्रिय होता, तो गांजा बिक्री इतनी निर्भीकता से नहीं हो पाती।

मुगलसराय गांजा कारोबार का कथित केंद्र

स्थानीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा मुगलसराय क्षेत्र को लेकर है। यहां चतुर्भुजपुर, कैली, सहजौर, गोधना मोड़, धर्मशाला रोड, खोवा मंडी, दुल्हीपुर और साहुपुरी जैसे इलाकों के नाम बार-बार सामने आ रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों और रेलवे क्षेत्र से जुड़े लोगों का दावा है कि इन इलाकों में सुबह से देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां देखी जाती हैं। एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां सबको पता है किस गली में क्या मिलेगा। इतना खुला काम बिना किसी संरक्षण के नहीं चल सकता। यह बयान अपने आप में प्रशासनिक दावों पर सवालिया निशान है।

अलीनगर, धानापुर, धीना और सैयदराजा भी अछूते नहीं

मुगलसराय के अलावा अलीनगर थाना क्षेत्र के धपरी, घूस, गंजबसनी, लवंडा, भरछा और गगेहरा गांवों से भी गांजा बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों, खाली मकानों और झाड़ियों के आसपास अवैध गतिविधियां होती हैं। धानापुर क्षेत्र के रमरजा, सीतापोखरी, हिंगुतरगढ़ और शहीदगांव को लेकर आरोप है कि यहां गांजा भंडारण कर आसपास के गांवों में सप्लाई की जाती है। धीना थाना क्षेत्र के कमालपुर और पांडेपुर तथा सैयदराजा थाना क्षेत्र के नेवादा, महाराजगंज और दुधारी में भी यही कहानी दोहराई जा रही है।

आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल

गांजा खुलेआम बिकता है, फिर भी बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं? क्या छिटपुट गिरफ्तारी केवल दिखावा है? क्या शराब पर सख्ती और गांजा पर चुप्पी एक नीति है?
मुगलसराय में आबकारी अमले पर आरोप स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि आबकारी इंस्पेक्टर संगीता जायसवाल की तैनाती के दौरान भी गांजा बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई। इसके साथ ही कारखास बताए जा रहे संतोष यादव के नाम की चर्चा भी आम है, जिन पर कथित तौर पर मैनेजमेंट का आरोप लगाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कारखास या बिचौलिया तंत्र: सिस्टम का स्थायी चेहरा

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर एक कथित कारखास या बिचौलिया तंत्र सक्रिय है। यही तंत्र सूचनाओं को नियंत्रित करता है, अवैध कारोबारियों से संपर्क बनाए रखता है और कथित तौर पर वसूली की भूमिका निभाता है। एक स्थानीय व्यक्ति का कहना है कि असली खेल यही लोग खेलते हैं। अफसर बदलते हैं, लेकिन सिस्टम वही रहता है। यह कथन शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जिला आबकारी अधिकारी सुबाष चंद्र पर उठते सवाल

पूरे मामले में जिला आबकारी अधिकारी सुबाष चंद्र की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि यदि गांजा इतनी बड़ी मात्रा में जिले में बिक रहा है, तो क्या यह उनकी जानकारी से बाहर है? और यदि जानकारी में है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही?
यह रिपोर्ट किसी पर सीधा आरोप नहीं लगाती, लेकिन यह सवाल जरूर पूछती है कि जवाबदेही किसकी है?

सबसे ज्यादा शिकायतें

मुगलसराय : चतुर्भुजपुर, कैली, सहजौर, गोधना मोड़, धर्मशाला रोड, खोवा मंडी, दुल्हीपुर, साहुपुरी

अलीनगर : धपरी, घूस, गंजबसनी, लवंडा, भरछा, गगेहरा

धानापुर : रमरजा, सीतापोखरी, हिंगुतरगढ़, शहीदगांव
धीना: कमालपुर, पांडेपुर

सैयदराजा : नेवादा, महाराजगंज, दुधारी

* स्थानीय लोगों के अनुसार इन इलाकों में संदिग्ध गतिविधियां दिन-रात देखी जाती हैं।
* नशामुक्त प्रदेश के दावे और चंदौली की जमीनी हकीकत में भारी विरोधाभास
* गांजा बिक्री को लेकर कई थाना क्षेत्रों से लगातार शिकायतें
* फुटकर नहीं, कथित संगठित नेटवर्क की आशंका
* आबकारी विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल
* मुगलसराय क्षेत्र सबसे बड़ा केंद्र बताया जा रहा
किशोर और युवा नशे की चपेट में
* कारखास/बिचौलिया तंत्र के आरोप
* जिला आबकारी अधिकारी सुबाष चंद्र के नाम पर उठते सवाल

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