उत्तर प्रदेश

डीजीपी राजीव कृष्ण महिला अपराध के प्रति बेहद गम्भीर, गलत करने वाले पर चलाएंगे अपना तीर

मिशन शक्ति का असर महिला अपराधों पर सख्ती, भरोसे की जीत

● डीजीपी राजीव कृष्ण महिला अपराध के प्रति बेहद गम्भीर, गलत करने वाले पर चलाएंगे अपना तीर

● मिशन शक्ति का असर महिला अपराधों पर सख्ती, भरोसे की जीत

● अपराध के ग्राफ में गिरावट आंकड़ों ने खोली सख्ती की पोल

● अपहरण और दहेज हत्या पर लगाम जिला मॉडल बना मिसाल

● घरेलू हिंसा में कमी, चुप्पी टूटी, संवाद शुरू

● थाने से पहले समाधान काउंसलिंग बनी सबसे बड़ी ताकत

● हर जिले का अलग प्रयोग, लक्ष्य एक महिला सुरक्षा

● लखनऊ मॉडल जब महिलाएं बनीं सुरक्षा की निगरानीकर्ता

● स्कूलों में शिकायत पेटी डर से बाहर निकलने का रास्ता

● कानून से आगे भरोसा मिशन शक्ति की असली परीक्षा

शुभम श्रीवास्तव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर लंबे समय से उठते सवालों के बीच मिशन शक्ति केन्द्रों की स्थापना अब ज़मीनी बदलाव का संकेत दे रही है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा की अध्यक्षता में हुई प्रदेशव्यापी वीडियो कांफ्रेंसिंग समीक्षा ने यह साफ कर दिया है कि यदि नीयत, निगरानी और समन्वय साथ हों तो सामाजिक अपराधों पर लगाम संभव है। समीक्षा में सामने आए आंकड़े न केवल प्रशासन के लिए राहत की खबर हैं, बल्कि उन लाखों महिलाओं और बच्चियों के लिए भी उम्मीद की किरण हैं, जो अब तक डर, संकोच और सामाजिक दबाव में अपनी पीड़ा को दबाए रहती थी। मिशन शक्ति केन्द्रों की स्थापना से पहले और बाद के तीन महीनों के तुलनात्मक आंकड़े यह साबित करते हैं कि महिला अपराध कोई अपरिवर्तनीय सामाजिक सच्चाई नहीं, बल्कि प्रभावी हस्तक्षेप से नियंत्रित होने वाली समस्या है। बलात्कार, अपहरण, दहेज हत्या और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर अपराधों में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट केवल पुलिसिया सख्ती का परिणाम नहीं, बल्कि संवाद, काउंसलिंग, सामाजिक सहभागिता और सरकारी योजनाओं के समन्वय का नतीजा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मिले परिणाम यह बताते हैं कि मिशन शक्ति केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील व्यवस्था के रूप में उभर रही है। कहीं वृद्ध महिलाओं के बैंक खाते खुल रहे हैं, तो कहीं निर्धन बच्चियों को स्कूल में दाखिला मिल रहा है। कहीं गोपनीय शिकायत पेटियां महिलाओं को बोलने का साहस दे रही हैं, तो कहीं मोहल्लों की महिलाएं स्वयं मिशन शक्ति वालंटियर बनकर सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बन रही हैं। राजीव कृष्णा ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि मिशन शक्ति में पुलिस की भूमिका केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि लीड एजेंसी और समन्वयक की है। उनका यह बयान उस सोच को दर्शाता है जिसमें महिला सुरक्षा को कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में देखा जा रहा है।

अपराधों में गिरावट आंकड़े जो भरोसा दिलाते

समीक्षा में सामने आए आंकड़े अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण हैं। बलात्कार के मामलों में 33.92 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसमें जनपद बाराबंकी सबसे आगे रहा, जहां 76.92 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज हुई। महिलाओं और बच्चियों के अपहरण के मामलों में 17.03 प्रतिशत की कमी आई। अमेठी में यह कमी 42.61 प्रतिशत रही। दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराधों में 12.96 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। बलरामपुर में यह गिरावट 80 प्रतिशत तक पहुंची। घरेलू हिंसा के मामलों में 9.54 प्रतिशत की कमी आई। श्रावस्ती में 35.90 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। ये आंकड़े केवल प्रतिशत नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के टूटने से बचने की कहानी कहते हैं।

शिकायत से समाधान तक काउंसलिंग की ताकत

मिशन शक्ति केन्द्रों की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि विवादों का समाधान थाने तक पहुंचने से पहले ही आपसी बातचीत और काउंसलिंग के माध्यम से हो सका। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए जहां शिकायत दर्ज होते ही परिवारिक और सामाजिक स्तर पर समाधान निकाल लिया गया। जनता की ओर से इस पहल की सराहना यह बताती है कि महिलाएं अब पुलिस को केवल डर की संस्था नहीं, बल्कि सहयोगी तंत्र के रूप में देखने लगी हैं।

जिले में अलग मॉडल लक्ष्य एक

मिशन शक्ति केन्द्रों ने हर परिक्षेत्र में स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम किया बरेली परिक्षेत्र (पीलीभीत) में
वृद्ध और असहाय महिलाओं के बैंक खाते खुलवाए गए।
वृद्धावस्था पेंशन की प्रक्रिया पूरी कराई गई। निर्धन बच्चियों का विद्यालय में दाखिला कराया गया। अयोध्या परिक्षेत्र में केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु बुकलेट तैयार की गई। विभागीय समन्वय से इनका वितरण मिशन शक्ति केन्द्रों के माध्यम से हुआ। झांसी परिक्षेत्र में महिलाओं और बालिकाओं के लिए गोपनीय शिकायत प्रणाली विकसित की गई। हॉटस्पॉट चिन्हित कर वहां कम्प्लेंट बॉक्स लगाए गए।

लखनऊ मॉडल वालंटियर से मजबूत हुई व्यवस्था

लखनऊ परिक्षेत्र में मिशन शक्ति को सामुदायिक आंदोलन का रूप दिया गया। ग्राम, मोहल्ला और बीट स्तर पर सक्रिय महिलाओं को मिशन शक्ति वालंटियर बनाया गया। ये वालंटियर पीड़िताओं की समस्याएं केन्द्र तक पहुंचाने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों संदिग्ध तत्वों और महत्वपूर्ण सूचनाओं का संकलन भी कर रही हैं। यह मॉडल बताता है कि जब महिलाएं स्वयं सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बनती हैं, तो अपराधियों के लिए जगह सिकुड़ने लगती है।

स्कूलों में शिकायत पेटी संकोच तोड़ने की पहल

पुलिस महानिदेशक ने विशेष निर्देश देते हुए कहा कि
जो बालिकाएं संकोचवश शिकायत नहीं कर पातीं, उनके लिए विद्यालय स्तर पर बैठकें आयोजित की जाएं।
प्रधानाचार्य की सहमति से स्कूल परिसर में थाना-स्तरीय शिकायत पेटी लगाई जाए। उस पर मिशन शक्ति केन्द्र और संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से लिखे जाएं। यह पहल उस चुप्पी को तोड़ने की कोशिश है, जो अक्सर अपराध से भी ज्यादा घातक साबित होती है।

पुलिस चौकी से केन्द्र तक हर शिकायत का निस्तारण

डीजीपी ने यह भी निर्देश दिए कि पुलिस चौकी स्तर पर प्राप्त महिला संबंधित शिकायतों का भी त्वरित समाधान किया जाए। यदि किसी जिले में नई बेस्ट प्रैक्टिस से शिकायतों में कमी आ रही है, तो उसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाए। यह निर्देश मिशन शक्ति को स्थिर योजना नहीं, बल्कि लगातार सीखने वाली प्रक्रिया बनाता है।

कानून से आगे सामाजिक भरोसा

मिशन शक्ति केन्द्रों का सबसे बड़ा योगदान यह है कि इन्होंने महिला सुरक्षा को केवल अपराध नियंत्रण का विषय नहीं रहने दिया, बल्कि सामाजिक भरोसे का मुद्दा बनाया। पुलिस, प्रशासन, शिक्षा संस्थान और समाज सभी को एक साझा मंच पर लाकर यह पहल साबित कर रही है कि महिला अपराधों में गिरावट संभव है। मिशन शक्ति केन्द्रों की यह सफलता बताती है कि अगर नीतियां केवल फाइलों में नहीं, बल्कि समाज के बीच उतारी जाएं, तो बदलाव संभव है। क्या यह मॉडल स्थायी बनेगा या आंकड़ों की इस चमक के पीछे फिर वही पुरानी ढिलाई लौट आएगी? महिला सुरक्षा का असली इम्तिहान यही है।

* बलात्कार में 33.92 फीसदी गिरावट
* अपहरण में 17.03 फीसदी कमी
* दहेज हत्या में 12.96 फीसदी गिरावट
* घरेलू हिंसा में 9.54 फीसदी कमी
* काउंसलिंग से विवादों का समाधान
* वालंटियर मॉडल से समुदाय की भागीदारी
* स्कूलों में शिकायत पेटी की नई व्यवस्था

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