डीजीपी राजीव कृष्ण सड़क सुरक्षा पर बेहद सख्त,लापरवाही पर जिम्मेदारों को कर डेंगे पस्त
सुरक्षित सड़कों की ओर उत्तर प्रदेश जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान से बदलेगी दुर्घटनाओं की तस्वीर

- सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए प्रदेशव्यापी जेडएफडी अभियान
- डीजीपी राजीव कृष्ण का सभी जिलों को सख्त निर्देश
- पहले चरण में 20 जिलों के 233 थाना क्षेत्रों में दिखे सकारात्मक नतीजे
- अब पूरे प्रदेश में ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर होगी निर्णायक कार्रवाई
- जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यातायात अपराधियों पर सख्ती
- यक्ष ऐप से अपराधियों की पहचान होगी और सटीक
- फेस और वॉयस रिकग्निशन से पुलिसिंग होगी हाईटेक
- कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर लापरवाही पर नहीं होगी कोई छूट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश जहां एक ओर एक्सप्रेस-वे, फोरलेन हाईवे और स्मार्ट सड़कों का जाल तेजी से फैल रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनी हुई हैं। हर साल हजारों परिवार सड़क हादसों में अपने प्रियजनों को खो देते हैं। ऐसे में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का यह दायित्व बनता है कि विकास की रफ्तार के साथ सुरक्षा की गारंटी भी दी जाए। इसी सोच को ज़मीन पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस अब जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान को पूरे प्रदेश में लागू करने जा रही है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने स्पष्ट शब्दों में यह संदेश दिया है कि अब सड़क दुर्घटनाओं को नियति मानकर स्वीकार नहीं किया जाएगा। हर मौत जवाबदेही तय करेगी और हर लापरवाही पर कार्रवाई होगी। डीजीपी के निर्देशों के बाद यह अभियान केवल एक ट्रैफिक ड्राइव नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा का राज्यव्यापी संकल्प बनता जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में डीजीपी ने सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने बताया कि जेडएफडी अभियान के पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों के 233 पुलिस थाना क्षेत्रों को चिन्हित किया गया था। इन क्षेत्रों में सुनियोजित कार्रवाई, सतत निगरानी और सख्त प्रवर्तन के कारण सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इन सकारात्मक अनुभवों के आधार पर सरकार और पुलिस प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि पूरे प्रदेश को चरणबद्ध ढंग से जीरो फैटेलिटी की ओर ले जाया जाए। यह फैसला केवल आंकड़ों की सफलता नहीं, बल्कि उन सैकड़ों जिंदगियों का भरोसा है, जो समय रहते बचाई जा सकीं।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ कहा कि हर जिले की पुलिस को पिछले एक वर्ष में हुई सड़क दुर्घटनाओं का गहन अध्ययन करना होगा। कहां, क्यों और कैसे दुर्घटनाएं हो रही हैं इन सवालों के जवाब खोजे बिना समाधान संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।
यह अभियान प्रशासनिक इच्छाशक्ति, तकनीकी नवाचार और जमीनी पुलिसिंग तीनों का संगम है। यक्ष ऐप जैसे अत्याधुनिक तकनीकी साधनों के जरिये पुलिस अब अपराध और दुर्घटना नियंत्रण में एक नई छलांग लगाने जा रही है। कुल मिलाकर, यह पहल उत्तर प्रदेश को केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

तेज़ रफ्तार पर नियंत्रण
उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की चुनौती कोई नई नहीं है। बढ़ती आबादी, तेज रफ्तार वाहन, नियमों की अनदेखी और कई स्थानों पर अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। लेकिन अब पुलिस प्रशासन इस चुनौती को स्वीकार करने के बजाय उससे निर्णायक मुकाबले के मूड में है।
जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान की पृष्ठभूमि
जेडएफडी अभियान की शुरुआत इस विचार से हुई कि अगर अपराध मुक्त थाना या जिला संभव है, तो दुर्घटना मुक्त जिला क्यों नहीं? पहले चरण में 20 जिलों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया। इन जिलों में 233 थाना क्षेत्रों में विशेष रणनीति के तहत काम किया गया। इस रणनीति में तेज रफ्तार पर नियंत्रण, हेलमेट और सीट बेल्ट की सख्त जांच, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई, संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की स्थायी तैनाती। सीसीटीवी और ट्रैफिक कैमरों की निगरानी इन प्रयासों का नतीजा यह रहा कि कई क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की संख्या और मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
ब्लैक स्पॉट पर फोकस
डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि पिछले एक साल के दुर्घटना आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जाएं। ये वे स्थान होते हैं जहां बार-बार सड़क हादसे होते हैं। कुछ ब्लैक स्पॉट पहले ही परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनकी सूची सभी जिलों को उपलब्ध कराई जाएगी। इन स्थानों पर सड़क इंजीनियरिंग सुधार, संकेतक बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, बेहतर लाइटिंग और स्थायी पुलिस निगरानी जैसे उपाय किए जाएंगे।
जीरो टॉलरेंस नीति
डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ किया कि सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। ओवरस्पीडिंग, रैश ड्राइविंग, नशे में वाहन चलाने और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ बिना किसी दबाव या ढील के कार्रवाई होगी।
उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। चाहे वह आम नागरिक हो या वर्दीधारी।

यक्ष ऐप हाईटेक पुलिसिंग की नई पहचान
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हाल ही में लॉन्च किया गया यक्ष ऐप इस अभियान का तकनीकी आधार बनेगा। इस ऐप में ऑपरेशन पहचान, ऑपरेशन त्रिनेत्र, बीट प्रहरी अभियान का पूरा डाटा समाहित किया गया है। डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित पुलिस कर्मियों को इस ऐप के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाए। इस ऐप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके जरिए पुलिसकर्मी चेहरे और आवाज के आधार पर अपराधियों की पहचान कर सकेंगे। इससे न केवल अपराध नियंत्रण, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े आदतन अपराधियों और लापरवाह चालकों पर भी नजर रखना आसान होगा।
डाटा की शुद्धता और निगरानी
प्रथम चरण में यक्ष ऐप में डाले गए सभी डाटा की जांच के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि न रहे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीक का उपयोग पारदर्शी, सटीक और प्रभावी हो।
कानून-व्यवस्था से सीधा संबंध
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल ट्रैफिक का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे कानून-व्यवस्था और नागरिक जीवन की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित समाज की बुनियाद होती हैं। जन-जागरूकता भी अहम हालांकि प्रशासन सख्ती बरत रहा है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि जब तक नागरिक नियमों को अपनी जिम्मेदारी नहीं मानेंगे, तब तक लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं होगा। इसलिए आने वाले दिनों में जन-जागरूकता अभियानों को भी तेज किया जाएगा।
* पूरे प्रदेश में जेडएफडी अभियान लागू
* पहले चरण में 20 जिलों में मिले सकारात्मक परिणाम
* ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर होगी ठोस कार्रवाई
* जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ट्रैफिक अपराधियों पर सख्ती
* यक्ष ऐप से हाईटेक पुलिसिंग
* फेस और वॉयस रिकग्निशन से अपराध पहचान
* पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण
* सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता




