लखनऊ

डीजीपी राजीव कृष्ण साइबर अपराध पर बेहद सख्त, डिजिटल अपराधियो की हालत कर देंगे पस्त

साइबर जंग में यूपी पुलिस की निर्णायक बढ़त डीजीपी राजीव कृष्ण की सख्ती

● डीजीपी राजीव कृष्ण साइबर अपराध पर बेहद सख्त, डिजिटल अपराधियो की हालत कर देंगे पस्त

● साइबर जंग में यूपी पुलिस की निर्णायक बढ़त
डीजीपी राजीव कृष्ण की सख्ती

● रणनीति और जागरूकता से साइबर अपराधियों पर शिकंजा

● साइबर ठगी बंदूक नहीं, दिमाग से की जाने वाली वारदात

● पेंशनर्स और वरिष्ठ नागरिक सबसे आसान शिकार क्यों?

● हर थाने पर साइबर हेल्प डेस्क अब शिकायत दबेगी नहीं

● 65 हजार प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तकनीक का जवाब तकनीक से

● 72 फीसदी साइबर अपराध की एक ही जड़ लालच

● एक लाख से ज्यादा जागरूकता बैठकें पुलिस अब क्लासरूम में

● डिजिटल इंडिया तेज, लेकिन सुरक्षा कमजोर क्यों रही?

● साइबर सुरक्षा का मंत्र डर नहीं, सतर्कता

 

शुभम श्रीवास्तव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध अब महज़ मोबाइल, इंटरनेट या तकनीक से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह आम आदमी की आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक भरोसे और मानसिक शांति पर सीधा हमला बन चुका है। डिजिटल लेन-देन के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। अब न हथियार की जरूरत है, न आमने-सामने आने की। एक कॉल, एक लिंक या एक लालच भरा संदेश ही लोगों की जिंदगी भर की कमाई उड़ा देने के लिए काफी साबित हो रहा है। इसी गंभीर पृष्ठभूमि में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी राजीव कृष्ण ने साफ और सख्त संदेश दिया है कि साइबर अपराधियों के लिए अब उत्तर प्रदेश सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा। डीजीपी ने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया कि प्रदेश में कुल अपराधों में जितनी धनराशि लोगों ने गंवाई है, उससे तीन गुना से अधिक रकम साइबर फ्रॉड के जरिए हड़पी गई है। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह बताने के लिए काफी है कि साइबर अपराध अब संगठित आर्थिक लूट का रूप ले चुका है। राजीव कृष्ण के शब्दों में यह केवल अपराध नहीं, बल्कि मेहनतकश जनता की जीवनभर की जमा-पूंजी पर योजनाबद्ध और सुनियोजित हमला है। यही कारण है कि यूपी पुलिस ने इस चुनौती को सामान्य अपराध की तरह लेने के बजाय एक अलग और विशेष रणनीति के तहत निपटने का फैसला किया है। यह रणनीति सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी तैयारी, पुलिस बल का व्यापक प्रशिक्षण, जमीनी स्तर पर साइबर ढांचे का विस्तार और सबसे अहम जनता को मानसिक रूप से सतर्क और जागरूक बनाना शामिल है। डीजीपी की यह चेतावनी महज औपचारिक बयान या आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में साइबर अपराध के खिलाफ छेड़ी जाने वाली निर्णायक जंग का संकेत है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिस तरह साइबर थानों, हेल्प डेस्क, प्रशिक्षित बल और जागरूकता अभियानों का ढांचा खड़ा किया है, वह यह दिखाता है कि राज्य अब डिजिटल अपराध के खतरे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि यूपी में अपनाई जा रही यह रणनीति धीरे-धीरे देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में उभरती दिख रही है।

साइबर अपराध बंदूक नहीं, दिमाग से लड़ी जाने वाली जंग

डीजीपी राजीव कृष्ण के अनुसार साइबर अपराधी आम अपराधियों की तरह हथियार लेकर सामने नहीं आते। वे लोगों की कमजोरियों, लोभ, लत और भय को हथियार बनाते हैं। उन्होंने कहा कि कोई कम समय में पैसा दोगुना करने का सपना दिखाता है। कोई ऑनलाइन गेम और सट्टे की लत में फंसा देता है, तो कोई सीबीआई, ईडी, पुलिस या इनकम टैक्स का डर दिखाकर रकम ऐंठ लेता है। यही कारण है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए यूपी पुलिस ने पारंपरिक पुलिसिंग से अलग रणनीति अपनाई है। दुर्दांत अपराधियों के लिए अलग कार्ययोजना है और साइबर ठगों के लिए अलग।

सबसे ज्यादा शिकार 50 साल से ऊपर के लोग और पेंशनर्स

डीजीपी ने एक बेहद चिंताजनक तथ्य सामने रखते हुए कहा कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और पेंशनर्स साइबर ठगी का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं।
इसके पीछे डिजिटल तकनीक से सीमित परिचय जीवन भर की जमा-पूंजी, सरकारी नोटिस या कॉल से जल्दी डर जाना, बच्चों या परिवार से डिजिटल मामलों में कम सलाह लेना। राजीव कृष्ण ने कहा कि साइबर ठग इसी वर्ग को सॉफ्ट टारगेट मानकर योजनाबद्ध तरीके से निशाना बना रहे हैं। इसलिए पुलिस की रणनीति में अब वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष फोकस है।

हर थाने पर साइबर हेल्प डेस्क शिकायत अब दूर नहीं

प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए जो सबसे ठोस कदम उठाया गया है, वह है हर थाने पर साइबर हेल्प डेस्क की स्थापना। आंकड़े बताते हैं प्रदेश में कुल 1581 थाने हर थाने पर साइबर हेल्प डेस्क, हर जिले में एक समर्पित साइबर थाना है। इसका सीधा मतलब है कि अब साइबर ठगी का शिकार व्यक्ति को बड़े शहर या साइबर मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पास का थाना ही पहली राहत का केंद्र बनेगा।

65 हजार से अधिक पुलिसकर्मी प्रशिक्षित

डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि अब तक 65,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लगातार बैठकें, वर्कशॉप और सम्मेलन आयोजित किए गए। पुलिसकर्मियों को तकनीकी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक ट्रेनिंग भी दी गई
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी जितने तेजी से तरीके बदलते हैं, पुलिस को उससे भी तेज सीखना होगा। यूपी पुलिस अब रिएक्टिव नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव साइबर पुलिसिंग की ओर बढ़ रही है।

72 फीसदी साइबर अपराध की जड़ लालच

डीजीपी द्वारा साझा किए गए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। 72 फीसदी साइबर अपराध केवल लालच के कारण होते हैं। मतलब साफ है कि अगर लालच पर नियंत्रण हो जाए, तो आधे से ज्यादा साइबर अपराध खुद-ब-खुद रुक सकते हैं। इसीलिए यूपी पुलिस अब केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन पर जोर दे रही है।

एक लाख से ज्यादा जागरूकता बैठकें, शॉर्ट फिल्में भी हथियार

राज्य भर में एक लाख से अधिक साइबर जागरूकता बैठकें, स्कूल, कॉलेज, पंचायत, मोहल्ला स्तर पर संवाद
शॉर्ट फिल्मों और डिजिटल कंटेंट के जरिए संदेश प्रसारित किया जाता है। डीजीपी ने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोई भी सरकारी एजेंसी पुलिस, सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स कभी फोन या ऑनलाइन माध्यम से पैसा ट्रांसफर करने को नहीं कहती।

क्या सिस्टम जनता के साथ

यहां सवाल उठता है कि जब साइबर अपराध से लोगों की जिंदगी भर की कमाई लुट रही थी, तब सिस्टम क्यों सुस्त था? सच यह है कि डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज थी, लेकिन डिजिटल सुरक्षा उतनी मजबूत नहीं। आम आदमी तकनीक के भरोसे छोड़ा गया। राजीव कृष्ण के नेतृत्व में यूपी पुलिस की सख्ती इस बात का संकेत है कि अब राज्य जिम्मेदारी स्वीकार कर रहा है। लेकिन यह लड़ाई केवल पुलिस की नहीं हो सकती। जब तक बैंक, टेलीकॉम कंपनियां, डिजिटल प्लेटफॉर्म, जवाबदेह नहीं होंगे, तब तक साइबर अपराध पूरी तरह खत्म नहीं होगा। डीजीपी का संदेश साफ है कि डरें नहीं, लेकिन आंख मूंदकर भरोसा भी न करें। प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ जो रणनीतिक सख्ती शुरू हुई है, वह केवल पुलिसिंग नहीं, बल्कि जन-सुरक्षा आंदोलन का रूप ले सकती है। डीजीपी राजीव कृष्ण का साफ संदेश है कि साइबर अपराधी चाहे जितना स्मार्ट हो, यूपी पुलिस उससे एक कदम आगे रहेगी। अब फैसला जनता के हाथ में भी है लालच या सतर्कता?

* लालच भरे ऑफर से दूरी
* अनजान कॉल/लिंक पर क्लिक न करें
* सरकारी एजेंसी के नाम पर पैसे की मांग, ठगी होने पर तुरंत नजदीकी थाना या साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क
* 1930 साइबर हेल्पलाइन का इस्तेमाल

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