डीजी होमगार्ड विजय मौर्य की विदाई यादगार, इनकी कार्यप्रणाली रही बेहद दमदार
कर्तव्य की पूर्णाहुति पर सम्मान, विजय कुमार मौर्य की विदाई एक युगांत का संकेत


- शिक्षा से सेवा तक प्रतिभा की प्रारंभिक उड़ान
- आईआईटी से हॉवर्ड तक की शैक्षणिक यात्रा यात्रा ने पुलिस सेवा को मिला एक दूरदर्शी अधिकारी
- शुरूआती तैनाती में दिखी जमीनी पकड़, छोटे जिलों में जनसंपर्क और अपराध नियंत्रण की मिसाल बने
- अराजकता के विरुध्द दृढ नेतृत्व की मिसाल
- डीआईजी मौर्य ने बारूद पर खड़े जिलों में कानून का राज स्थापित किया
- सीमाओं पर भी निभाया भरोसे का प्रहरी बनकर
- नेपाल और चीन सीमाओं पर राष्ट्र की सुरक्षा के लिए निर्णायक भूमिका भूमिका
- प्रशासनिक उचाइयों पर बेदाग छवि का अधिकारीसंयुक्त राष्ट्र मिशन में भारत की वैश्विक पहचान दिलाई
- पद से विदा, पुलिस सेवा में प्रेरणा बनी रहेगी

वाराणसी। 31 जुलाई 2025 को उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग का एक उज्ज्वल अध्याय औपचारिक रूप से समाप्त हुआ। वर्ष 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी विजय कुमार मौर्य, जिन्होंने अपनी सेवा यात्रा में ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता और उत्कृष्ट नेतृत्व का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, उन्होंने 60 वर्ष की अधिवर्षता आयु पूर्ण कर ‘पुलिस महानिदेशक, होमगार्ड्स’ के पद से गरिमापूर्ण सेवानिवृत्ति ग्रहण की। उनकी विदाई न केवल एक प्रशासनिक परंपरा का निर्वहन थी, बल्कि एक ऐसे अधिकारी की भावपूर्ण विदाई रही, जिन्होंने पूरे करियर को एक मिशन के रूप में जिया। एक मिशन, जो समाज की सुरक्षा, संस्थागत ईमानदारी और प्रशासनिक उत्तरदायित्व से जुड़ा था।
शिक्षा में अपराजेय शुरूआत आईआईटी से हावर्ड तक का सफर
विजय कुमार मौर्य की कहानी एक सामान्य छात्र से लेकर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रशासनिक अधिकारी बनने तक की प्रेरणादायक गाथा है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में द्वितीय स्थान प्राप्त करने के बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से एमटेक व नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर तथा हार्वर्ड वर्ष 1991 में आईपीएस सेवा में चयन के बाद श्री मौर्य ने पुलिस अधीक्षक के रूप में बाराबंकी, अम्बेडकरनगर और हाथरस जिलों में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने अयोध्या, बरेली, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, आगरा और गोरखपुर जैसे संवेदनशील और रणनीतिक जनपदों में उल्लेखनीय कार्य किया।
इन जिलों में उनके कार्यकाल को अपराध नियंत्रण, दंगों पर प्रभावी नियंत्रण, और खुफिया तंत्र की मजबूती के लिए याद किया जाता है। सहज संवाद क्षमता और धरातलीय समझ उन्हें पुलिसिंग केवल औपचारिक ढांचे से आगे ही नहीं ले जाती थी वे प्रशासन और जनता के बीच सेतु भी बनते थे।
डीआईजी जोन के रूप में प्रभावी उपस्थिति अराजक तत्वों पर कहर
आजमगढ़, सहारनपुर और मेरठ जैसे परिक्षेत्रों में बतौर पुलिस उपमहानिरीक्षक उनकी नियुक्ति हुई। यह नियुक्तियां उस समय की गईं जब ये परिक्षेत्र अपराध, जातीय तनाव और आतंकवादी गतिविधियों की दृष्टि से अति संवेदनशील माने जाते थे। श्री मौर्य की रान्निगियां, सूचना तंत्र का स्थानीयकरण, नागरिक सहभागिता को प्राथमिकता देना और तेज न्यायिक कार्रवाई सुनिश्चित करना इन्हें मॉडल के रूप में अपनाया गया। इन परिक्षेत्रों में उनके नेतृत्व में अराजक तत्वों और संगठनों के खिलाफ कई निर्णायक अभियान चलाए गए जिनकी प्रतिध्वनि लंबे समय तक प्रशासनिक हलकों में रही।
भारत-नेपाल और भारत-चीन बार्डर की संभाली कमान
विजय मौर्य को वर्ष 2007 से 2014 के बीच भारत सरकार ने इण्डो-नेपाल सीमा पर बीएसएफ के डीआईजी के रूप में रानीखेत में नियुक्त किया और तत्पश्चात भारत-चीन सीमा पर आईटीबीपी के आईजी के रूप में चंडीगढ़ में तैनात हुए। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में उन्होंने न केवल सीमा सुरक्षा बलों का मनोबल ऊंचा बनाए रखा, बल्कि तस्करी, घुसपैठ और आतंकी लॉजिस्टिक्स पर करारा प्रहार भी किया। सीमाओं पर तैनाती केवल शारीरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं होती, यह कूटनीतिक संतुलनऔर आंतरिक सुरक्षा नीति का भी हिस्सा होती है और मौर्य इसमें पूर्णतः सफल रहे।
राष्ट्रीय जिम्मेदारियां एयर इंडिया से लेकर पुलिस प्रशिक्षण तक
उनकी क्षमता को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें एयर इंडिया में निदेशक सुरक्षा एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया। इसके अतिरिक्त वे अपर पुलिस महानिदेशक के रूप में पुलिस प्रशिक्षण, रेलवे पुलिस और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी नेतृत्वरत रहे। रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, त्वरित संज्ञान और ट्रैकिंग व्यवस्था जैसे उपायों की शुरूआत की। प्रशिक्षण विभाग में उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश पुलिस को नई दिशा, साइबर क्राइम और अत्याधुनिक जांच प्रणाली में दक्षता प्राप्त हुई।
मंच पर अंतरराष्ट्रीय उत्तरदायित्व संयुक्त राष्ट्र मिशन कोसोवो
विजय मौर्य की सेवाएं केवल भारत तक सीमित नहीं रहीं। वर्ष 2000-2001 के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत कोसोवो (यूरोप) में एक वर्ष तक उल्लेखनीय सेवाएं दीं। इस सेवा के लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा पदक (कोसोवो) से सम्मानित किया गया। इस अवधि में उन्होंने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था का पुनर्गठन, नागरिक संवाद की बहाली और न्याय व्यवस्था के संचालन में अहम भूमिका निभाई। उनकी यह भूमिका भारत की साख को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूती प्रदान करती है।
होमगार्ड्स के रूप में अंतिम सेवा मानवीय दृष्टिकोण की छाप
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (होमगार्ड्स) के रूप में उनका कार्यकाल व्यवस्था में अनुशासन, प्रशिक्षण और महिला होमगाडों के सशक्तिकरण के लिए यादगार रहेगा।
उन्होंने पूरे प्रदेश में एक समान कार्य संस्कृति, उत्तरदायित्व और आत्मसम्मान आधारित संगठन की नींव रखी। उनकी यह सोच रही कि होमगार्ड न केवल आपदा प्रबंधन में सहयोगी हों, बल्कि सामाजिक संवाद, सुरक्षा और विश्वास के वाहक भी बनें।
सेवानिवृत्ति से पूर्व विभाग द्वारा आयोजित भव्य विदाई समारोह में यह स्पष्ट दिखा कि होमगार्ड्स विभाग उन्हें केवल एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक संरक्षक के रूप में मानता है।
31 जुलाई 2025 को हुए विदाई समारोह में न केवल अधिकारियों, कर्मचारियों बल्कि उनके अधीनस्थों की आंखें नम थीं। विभिन्न जिलों और सुरक्षा एजेंसियों से आए अफसरों ने मौर्य जी के साथ बिताए क्षणों को याद किया। जिनमें एक ऐसे अधिकारी की छवि उभरती है जो अनुशासनप्रिय, सौम्य, परंतु कठोर निर्णय लेने वाला था। श्री मौर्य की विदाई, दरअसल एक युग की समाप्ति नहीं, बल्कि एक अनुकरणीय विरासत की शुरूआत है। संभावना है कि वे शिक्षा, प्रशासनिक प्रशिक्षण, या नीति निर्धारण के किसी क्षेत्र में अपनी सेवाएं भविष्य में भी जारी रखेंगे। क्योंकि सेवा उनके लिए पद से नहीं, प्रतिबद्धता से परिभाषित होती है।
विजय कुमार मौर्य की सेवा यात्रा
विजय कुमार मौर्य की सेवा यात्रा किसी प्रशासनिक चार्ट से अधिक एक जीवंत दर्शन है जहां शिक्षा, नीति, जमीनी सच्चाई और अंतरराष्ट्रीय मंच का संयोजन दिखाई देता है।
उनकी सेवानिवृत्ति एक भावनात्मक क्षण था। उत्तर प्रदेश पुलिस, भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय मंच उनके योगदान को लंबे समय तक स्मरण करते रहेंगे। एक अधिकारी जिसने विभाग नहीं, पीढियां गढ़ीं। वह भले पद से विदा हो गया, पर उसकी परछाईं प्रेरणा बनकर हमेशा साथ रहेगी।




