पूर्ण बोरा का अवैध प्लाटिंग पर कड़ा प्रहार, भाजपा नेताओ व एक मंत्री के दबाव को किया दरकिनार
वीडीए उपाध्यक्ष ने दिखाए कड़े तेवर, दिया सन्देश गलत काम का नही करते फेवर

● पूर्ण बोरा का अवैध प्लाटिंग पर कड़ा प्रहार, भाजपा नेताओ व एक मंत्री के दबाव को किया दरकिनार
● वीडीए उपाध्यक्ष ने दिखाए कड़े तेवर, दिया सन्देश गलत काम का नही करते फेवर
● लगातार दूसरे दिन 15 बीघा में चला ध्वस्तीकरण अभियान,अवैध प्लाटरो में मचा हड़कंप
● अवैध प्लाटिंग पर वीडीए का बुलडोजर
● 15 बीघा क्षेत्र में चली ध्वस्तीकरण कार्रवाई
● जोन-1 और जोन-3 में एकसाथ बड़ा अभियान
● नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती
● आम जनता के हित में प्राधिकरण की पहल
● सुनियोजित विकास की दिशा में मजबूत कदम
◆ अमित मौर्य
वाराणसी। सुनियोजित विकास की दिशा में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने एक बार फिर सख्त और निर्णायक पहल करते हुए अवैध प्लाटिंग के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया है। शहर के बेतरतीब विस्तार, अवैध कॉलोनियों और नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे भूमि व्यवसाय पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से वीडीए उपाध्यक्ष बोरा के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में जोन-1 और जोन-3 की प्रवर्तन टीमों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए लगभग 15 बीघा क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई न केवल कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण है, बल्कि आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देती है। वाराणसी जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर में अनियंत्रित विकास न केवल बुनियादी ढांचे पर दबाव डालता है, बल्कि भविष्य में गंभीर शहरी संकटों को भी जन्म देता है। ऐसे में वीडीए की यह पहल इस बात का संकेत है कि प्राधिकरण अब केवल कागजी चेतावनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन पर उतरकर नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। अवैध प्लाटिंग का सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को होता है। बिना स्वीकृत ले-आउट के बेचे गए प्लॉट्स पर न तो भविष्य में मानचित्र स्वीकृति मिलती है और न ही सड़क, सीवर, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की गारंटी रहती है। वर्षों की मेहनत की कमाई लगाने के बाद भी लोग कानूनी उलझनों में फंस जाते हैं। इसी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बार-बार आम जनमानस से अपील की है कि भूमि क्रय से पूर्व लैंडयूज की जांच अवश्य करें और केवल प्राधिकरण से स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट ही खरीदें। 16 दिसंबर 2025 को की गई यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-27 के तहत की गई, जो यह स्पष्ट करता है कि प्राधिकरण कानून के दायरे में रहकर, पारदर्शी तरीके से और बिना किसी भेदभाव के अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा रहा है। यह अभियान केवल ध्वस्तीकरण नहीं, बल्कि शहर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भविष्य के लिए तैयार बनाने की एक ठोस पहल है। जब से उपाध्यक्ष ने अवैध प्लाटरो के खिलाफ अभियान चलाया है कुछ भाजपा नेताओं व वरुणापार के एक मंत्री जो कि पियरका चचा के कम्पटीटर भी है उन्होंने उपाध्यक्ष व सचिव को अर्दब में लेने की कोशिश की लेकिन दोनों अधिकारीयों ने दो टूक कह दिया जो गलत है तो कार्यवाही तो होनी तय है।
सुनियोजित तरीके से अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध हुई अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई
वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के निर्देशानुसार जोन-1 और जोन-3 की प्रवर्तन टीमों ने मंगलवार को सुनियोजित तरीके से अलग-अलग क्षेत्रों में कार्रवाई की। जोन-1 अंतर्गत वार्ड शिवपुर, मौजा अहिरान चमांव में कलावती देवी, आशुतोष सिंह एवं अजय यादव सहित अन्य द्वारा लगभग 2.19 बीघा भूमि में बिना ले-आउट स्वीकृति के अवैध प्लाटिंग विकसित की जा रही थी। इसके अलावा पिसौर पेट्रोल पंप टंकी के पास, पिसौर क्षेत्र में अज्ञात व्यक्ति द्वारा लगभग 1.5 बीघा भूमि में नियमों को दरकिनार कर प्लाटिंग की जा रही थी। जोन-3 के अंतर्गत वार्ड दशाश्वमेध, मौजा छितौनी में आनंद पटेल द्वारा लगभग 5 बीघा तथा विनोद यादव और अनिल मिश्रा द्वारा लगभग 6 बीघा भूमि में अवैध रूप से कॉलोनी विकसित की जा रही थी। सभी मामलों में यह पाया गया कि न तो ले-आउट स्वीकृत कराया गया था और न ही नियमानुसार पहुंच मार्ग, लैंडयूज और अन्य आवश्यक मानकों का पालन किया गया था। प्रवर्तन टीम ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी और अन्य संसाधनों की मदद से सड़कों, प्लॉट सीमांकन और अन्य संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात रहा।
लैंडयूज भूमि आवासीय होना अनिवार्य
वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वाराणसी के विकास के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भूमि का लैंडयूज आवासीय होना अनिवार्य है और पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 9 मीटर होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्लॉटिंग एवं विक्रय केवल ले-आउट स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किया जा सकता है। उन्होंने यह जानकारी भी साझा की कि ले-आउट जमा करने के उपरांत प्राधिकरण द्वारा 7 दिवस के भीतर स्वीकृति प्रदान कर दी जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नियमों का पालन करना कठिन नहीं है, बल्कि इच्छाशक्ति की कमी के कारण ही लोग अवैध रास्ता अपनाते हैं। कार्रवाई के दौरान जोनल अधिकारी सौरभ देव प्रजापति, शिवाजी मिश्रा, अवर अभियंता रविन्द्र प्रकाश सहित प्रवर्तन दल के सभी सुपरवाइजर और पुलिस बल मौके पर उपस्थित रहे। पूरी कार्रवाई को पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से अंजाम दिया गया।
वीडीए उपाध्यक्ष की अपील ले-आउट वाले प्लॉट ही खरीदें
वीडीए की इस कार्रवाई को स्थानीय स्तर पर सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कुछ भूमाफिया बिना किसी स्वीकृति के कॉलोनियां विकसित कर भोले-भाले लोगों को ठग रहे हैं। अब प्राधिकरण की सख्ती से ऐसे तत्वों में हड़कंप है और आम नागरिकों में भरोसा बढ़ा है कि प्रशासन उनके हितों की रक्षा के लिए गंभीर है। वीडीए उपाध्यक्ष ने आम जनमानस से पुनः अपील की कि वाराणसी विकास प्राधिकरण से स्वीकृत ले-आउट वाले प्लॉट ही खरीदें और मानचित्र स्वीकृत कराए बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न करें। अन्यथा की स्थिति में प्राधिकरण द्वारा कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान आने वाले समय में भी निरंतर जारी रहेगा। प्राधिकरण का स्पष्ट उद्देश्य है कि वाराणसी को अवैध निर्माण मुक्त, सुरक्षित और नियोजित शहर के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर शहरी वातावरण मिल सके।
* वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई
* जोन-1 और जोन-3 में लगभग 15 बीघा अवैध प्लाटिंग ध्वस्त
* उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा-27 के तहत कार्रवाई
* बिना ले-आउट स्वीकृति के विकसित की जा रही थीं कॉलोनियां
* लैंडयूज और 9 मीटर मार्ग अनिवार्य होने पर दिया गया जोर
* आम जनता से केवल स्वीकृत प्लॉट खरीदने की अपील




