वाराणसी

पूर्ण बोरा ने किसानों को समझाया, शहरी विस्तार योजना को धरातल पर उतारने का समय आया

मढ़नी गांव के किसानों के साथ वीडीए की सीधी संवाद पहल लैंड पूलिंग से विकास भी, लाभ भी

● पूर्ण बोरा ने किसानों को समझाया, शहरी विस्तार योजना को धरातल पर उतारने का समय आया

● मढ़नी गांव के किसानों के साथ वीडीए की सीधी संवाद पहल लैंड पूलिंग से विकास भी, लाभ भी

● मढ़नी गांव में किसानों संग वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा की अहम बैठक

● बिना अधिग्रहण लैंड पूलिंग से 5 से 10 गुना तक लाभ का दावा

● लखनऊ आईटी सिटी वेलनेस सिटी मॉडल पर आधारित योजना

● 25 फीसदी पूर्ण विकसित और 50 फीसदी आंशिक विकसित भूमि के दो मॉडल

● किसानों ने रखी न्यूनतम एक-तिहाई विकसित भूमि की मांग

● सहभागिता, पारदर्शिता और आपसी सहमति पर आधारित योजना का भरोसा

 

अमित मौर्य

वाराणसी। काशी के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को लेकर लंबे समय से चला आ रहा अविश्वास, आशंका और टकराव का माहौल अब संवाद और सहभागिता की ओर बढ़ता दिख रहा है। इसी क्रम में वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने मढ़नी गांव के किसानों और काश्तकारों के साथ सीधी बैठक कर लैंड पूलिंग योजना की बारीकियों को न केवल विस्तार से समझाया, बल्कि यह भरोसा भी दिलाने की कोशिश की कि विकास अब जबरन अधिग्रहण नहीं, बल्कि सहमति और साझेदारी के रास्ते से होगा।

 

बैठक का मूल उद्देश्य किसानों को यह समझाना था कि लैंड पूलिंग योजना पारंपरिक भूमि अधिग्रहण से बिल्कुल अलग है। इसमें न तो किसानों की जमीन छीनी जाती है और न ही उन्हें मजबूरी में मुआवजे के लिए संघर्ष करना पड़ता है। बल्कि उनकी जमीन को नियोजित ढंग से विकसित कर, उसी भूमि का एक हिस्सा उन्हें कहीं अधिक मूल्यवान रूप में वापस दिया जाता है। वीडीए उपाध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह योजना किसानों को विस्थापन की पीड़ा से बचाते हुए उन्हें शहरी विकास का साझेदार बनाती है। बैठक के दौरान बताया गया कि प्रस्तावित लैंड पूलिंग मॉडल लखनऊ की आईटी सिटी और वेलनेस सिटी में पहले से लागू उस व्यवस्था पर आधारित है, जहां भूमि स्वामियों को अधिग्रहण की तुलना में 5 से 10 गुना तक का लाभ मिला है। यानी जिस जमीन की कीमत आज खेती के लिहाज से सीमित है, वही जमीन विकसित टाउनशिप का हिस्सा बनकर भविष्य में बहुमूल्य संपत्ति में बदल जाती है। वीडीए की यह पहल ऐसे समय पर सामने आई है जब वाराणसी में विकास परियोजनाओं को लेकर किसानों में लगातार असंतोष और शंकाएं देखी गई हैं। सड़क, रिंग रोड, औद्योगिक क्षेत्र और टाउनशिप योजनाओं के नाम पर जमीन जाने का डर किसानों को लंबे समय से परेशान करता रहा है। ऐसे में मढ़नी गांव में हुई यह बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भरोसा बहाली की एक कोशिश के रूप में देखी जा रही है। हालांकि बैठक में किसानों ने भी अपनी बात मुखरता से रखी। उन्होंने लैंड पूलिंग के तहत न्यूनतम एक-तिहाई विकसित भूमि दिए जाने की मांग सामने रखी और स्पष्ट किया कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने भविष्य और अगली पीढ़ी की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं चाहते। वीडीए उपाध्यक्ष ने किसानों की इस मांग को संज्ञान में लेते हुए आश्वासन दिया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। यह बैठक इस बात का संकेत भी है कि वाराणसी में शहरी विस्तार अब एकतरफा निर्णयों के बजाय संवाद आधारित प्रक्रिया की ओर बढ़ सकता है। सवाल यह है कि क्या यह भरोसा कागजों से निकलकर जमीन पर भी उतरेगा, या फिर यह पहल भी बीते अनुभवों की तरह केवल आश्वासन बनकर रह जाएगी। फिलहाल, मढ़नी गांव की बैठक ने विकास बनाम किसान के टकराव में संवाद की एक नई खिड़की जरूर खोली है।

मढ़नी गांव में संवाद की पहल

मढ़नी गांव में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में किसान, काश्तकार और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने स्वयं किसानों से संवाद करते हुए लैंड पूलिंग योजना की अवधारणा, प्रक्रिया और संभावित लाभों को सरल भाषा में समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि विकास तभी टिकाऊ होता है जब उसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी हो।

वीडीए उपाध्यक्ष ने बताया लैंड पूलिंग क्या है?

लैंड पूलिंग योजना के तहत भूमि स्वामी अपनी जमीन विकास प्राधिकरण के साथ साझा करते हैं। प्राधिकरण उस जमीन का नियोजित विकास करता है जिसमें सड़क, सीवर, जलापूर्ति, पार्क, हरित क्षेत्र, सामुदायिक भवन और अन्य शहरी सुविधाएं शामिल होती हैं। विकास के बाद भूमि का एक हिस्सा भू-स्वामी को वापस कर दिया जाता है, जिसकी कीमत पहले की तुलना में कई गुना अधिक होती है।

लखनऊ मॉडल का उदाहरण

बैठक में लखनऊ की आईटी सिटी और वेलनेस सिटी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वहां इस मॉडल को अपनाकर किसानों को अधिग्रहण की तुलना में कहीं अधिक लाभ मिला। जहां पहले किसान जमीन देने को मजबूर होते थे, वहीं अब वे विकसित भूखंड के मालिक बनकर रियल एस्टेट और शहरी विकास के हिस्सेदार बने हैं।

25 प्रतिशत पूर्ण विकसित भूमि मॉडल

इस मॉडल के तहत पूरी भूमि का विकास वीडीए द्वारा किया जाएगा। किसान को 25 से 30 प्रतिशत तक पूर्ण विकसित भूमि वापस मिलेगी। किसी भी प्रकार का विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा। विकसित भूमि का उपयोग आवासीय या व्यावसायिक रूप से किया जा सकेगा। वीडीए का दावा है कि इस मॉडल में लौटाई गई भूमि की बाजार कीमत मूल भूमि से कई गुना अधिक होगी।

50 प्रतिशत आंशिक विकसित भूमि मॉडल

इस मॉडल में भूमि का बाह्य विकास (सड़क, ड्रेनेज आदि) किया जाएगा। भू-स्वामी को कुल भूमि का 50 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यह मॉडल न्यूनतम 10 एकड़ या उससे अधिक भूमि वाले स्वामियों के लिए प्रस्तावित है जो लखनऊ पैटर्न पर आधारित है।

सेक्टर आधारित और चरणबद्ध विकास

वीडीए ने बताया कि प्रस्तावित टाउनशिप योजनाओं में क्षेत्र को सेक्टरों में विभाजित कर चरणबद्ध तरीके से विकास किया जाएगा। इसमें चौड़ी सड़कें, सीवर और जलापूर्ति, हरित क्षेत्र और पार्क, सामुदायिक केंद्र, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाएं, आधुनिक नागरिक ढांचा होगा।

किसानों की शंकाएं और सवाल

बैठक के दौरान किसानों ने कई सवाल उठाए कहा कि क्या भविष्य में शर्तें बदली जाएंगी? क्या जमीन का वास्तविक मूल्य मिलेगा? क्या छोटे किसानों के साथ भेदभाव होगा? वीडीए उपाध्यक्ष ने इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि योजना पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जाएगा।

एक-तिहाई विकसित भूमि की मांग

किसानों की ओर से यह प्रमुख मांग सामने आई कि लैंड पूलिंग के तहत न्यूनतम 33 प्रतिशत विकसित भूमि सुनिश्चित की जाए। किसानों का कहना था कि इससे उन्हें भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे विकास के लाभार्थी बन सकेंगे, न कि केवल दर्शक।

भरोसे की राजनीति या नीति में बदलाव?

लैंड पूलिंग सच में किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी या यह भी विकास के नाम पर जमीन हड़पने का नया तरीका बन जाएगी। अतीत के अनुभव किसानों को सतर्क बनाते हैं, लेकिन संवाद की यह शुरुआत उम्मीद की एक किरण भी जगाती है। वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने किसानों से अपील की कि वे इस सहभागिता आधारित योजना से जुड़ें और वाराणसी को एक सुव्यवस्थित, आधुनिक और भविष्य उन्मुख शहर बनाने में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक है, जब किसान उसमें अपने भविष्य की तस्वीर देखें।

* मढ़नी गांव में वीडीए-किसान संवाद
* लैंड पूलिंग से बिना अधिग्रहण विकास
* 5 से 10 गुना लाभ का दावा
* दो मॉडल 25 फीसदी पूर्ण विकसित, 50 फीसदी आंशिक विकसित
* सेक्टर आधारित आधुनिक टाउनशिप योजना
* किसानों की न्यूनतम एक-तिहाई भूमि की मांग
* सहभागिता और पारदर्शिता का भरोसा

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