
देश के शीर्ष साहित्यकारों, कलाकारों और विचारकों की ऐतिहासिक सहभागिता
कोरल ग्रुप की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को दिया सशक्त आधार
पद्मश्री अनुपम खेर, पियूष मिश्रा, मनोज तिवारी सहित दिग्गजों की मौजूदगी
पियूष मिश्रा का स्टेज शो बना महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण
काव्य पाठ, मुशायरा और संवादों ने जीवंत की काशी की साहित्यिक परंपरा
अतिथि सत्कार से लेकर व्यवस्थाओं तक कोरल ग्रुप की अहम भूमिका
साहित्य प्रेमियों के लिए स्मरणीय बना बीएलएफ का चौथा संस्करण

वाराणसी। काशी जहां शब्द साधना है, विचार आराधना है और साहित्य केवल अभिव्यक्ति नहीं बल्कि जीवन दृष्टि है।उसी काशी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यह नगर केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान का जीवंत सांस्कृतिक केंद्र भी है। 29 जनवरी से 1 फरवरी तक आयोजित बनारस लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे संस्करण ने साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में एक ऐसा मानक स्थापित किया, जिसे आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। चार दिनों तक चले इस साहित्यिक महोत्सव में काशी का हर कोना शब्दों की ऊर्जा, विचारों की उष्मा और रचनात्मकता की चमक से आलोकित रहा। देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, कलाकार, रंगकर्मी, चिंतक और सांस्कृतिक हस्तियां इस मंच पर एकत्र हुईं और उन्होंने अपने विचारों, अनुभवों और रचनाओं के माध्यम से समाज, समय और संवेदना पर गहन संवाद स्थापित किया। इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे जहां आयोजकों की दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता रही, वहीं कोरल ग्रुप की सहभागिता ने इसे धरातल पर साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाई। आयोजन की व्यवस्थाओं से लेकर अतिथि सत्कार, मंचीय समन्वय से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुचारु व्यवस्था तक हर स्तर पर कोरल ग्रुप की सक्रिय मौजूदगी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कोरल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर खालिद अंसारी ने न केवल आयोजन को सहयोग दिया, बल्कि व्यक्तिगत रूप से मंच पर उपस्थित होकर देश की विशिष्ट हस्तियों का स्वागत और सम्मान कर काशी की अतिथि परंपरा को सजीव किया। पद्मश्री अनुपम खेर, पद्मश्री शीन काफ निजाम, सुप्रसिद्ध कलाकार एवं सांसद मनोज तिवारी, अभिनेता-गीतकार एवं रंगकर्मी पियूष मिश्रा जैसे दिग्गजों की उपस्थिति ने महोत्सव की गरिमा को और ऊंचा किया। विशेष रूप से पियूष मिश्रा का स्टेज शो इस संस्करण का यादगार क्षण बनकर उभरा। शब्द, संगीत और अभिनय का उनका संगम दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और यह प्रस्तुति महोत्सव के सबसे चर्चित और सराहे गए आयोजनों में शामिल हो गई। बनारस लिटरेचर फेस्टिवल का चौथा संस्करण इस मायने में भी विशिष्ट रहा कि यहां साहित्य को किसी एक विधा तक सीमित नहीं किया गया। काव्य पाठ, मुशायरा, साहित्यिक संवाद, विचार गोष्ठियां और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने काशी की बहुस्तरीय सांस्कृतिक विरासत को समग्रता में प्रस्तुत किया। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक उत्सव नहीं था, बल्कि यह उस सांस्कृतिक चेतना का उत्सव था, जो काशी की आत्मा में सदियों से प्रवाहित होती रही है। और इसी चेतना को मंच, स्वर और दिशा देने में कोरल ग्रुप की भूमिका उल्लेखनीय रही जिसकी सराहना स्वयं साहित्य जगत के गणमान्य व्यक्तियों ने खुले मंच से की।


चार दिवसीय आयोजन: हर दिन साहित्य का नया आयाम
महोत्सव के चारों दिन 29, 30, 31 जनवरी व 1 फरवरी को अपनी अलग पहचान के साथ सामने आए। हर दिन का कार्यक्रम अलग विषय, अलग दृष्टि और अलग संवेदना के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। कहीं कविता ने समाज की पीड़ा को स्वर दिया, कहीं संवादों ने समकालीन भारत के सवाल उठाए, कहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने परंपरा और आधुनिकता को जोड़ा। यह निरंतरता ही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और कलाकारों की सहभागिता
बीएलएफ के चौथे संस्करण में देश के नामचीन साहित्यकारों, कवियों, कलाकारों और विचारकों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को ऊंचाई दी। यह मंच केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय साहित्यिक संवाद का केंद्र बनकर उभरा। प्रतिभागियों ने साहित्य, समाज, राजनीति, संस्कृति और कला के आपसी संबंधों पर खुलकर विचार रखे। यह संवाद औपचारिक नहीं, बल्कि जीवंत और सार्थक था।
कोरल ग्रुप की सक्रिय भागीदारी: आयोजन की मजबूत रीढ़
इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे जिन संस्थाओं की भूमिका निर्णायक रही, उनमें कोरल ग्रुप का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। कोरल ग्रुप की सहभागिता केवल नाममात्र की नहीं, बल्कि हर स्तर पर सक्रिय और जिम्मेदार रही। आयोजन स्थल की व्यवस्थाएं, अतिथियों का स्वागत एवं समन्वय, कार्यक्रमों का सुचारु संचालन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की समयबद्धता हर मोर्चे पर कोरल ग्रुप की टीम की उपस्थिति और सक्रियता स्पष्ट दिखाई दी।
खालिद अंसारी की भूमिका सहयोग नहीं, साझेदारी
कोरल ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर खालिद अंसारी ने इस आयोजन में केवल एक कॉरपोरेट प्रतिनिधि की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि एक सांस्कृतिक सहभागी के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से विशिष्ट अतिथियों का स्वागत कर काशी की परंपरागत अतिथि-संस्कृति को मंच पर जीवंत किया। यह व्यवहार औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मीय और सम्मानजनक था। जिसकी सराहना स्वयं अतिथियों और आयोजकों ने की।
पद्मश्री अनुपम खेर का सम्मान कला के प्रति सम्मान का प्रतीक
महोत्सव के दौरान पद्मश्री अनुपम खेर जैसे वरिष्ठ कलाकार का मंच पर सम्मान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय कला परंपरा के प्रति आदर का सार्वजनिक संदेश था। अनुपम खेर की उपस्थिति ने यह साबित किया कि बनारस लिटरेचर फेस्टिवल केवल साहित्य तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण सांस्कृतिक संवाद का मंच है। पद्मश्री शीन काफ निजाम की सहभागिता ने उर्दू साहित्य और कविता को वह मंच दिया, जिसकी वह हकदार है। उनकी उपस्थिति ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब को और सशक्त किया। यह संदेश स्पष्ट था कि भाषा कोई दीवार नहीं, बल्कि संवाद का पुल है।
मनोज तिवारी की मौजूदगी लोक, कला और राजनीति का संगम
सुप्रसिद्ध कलाकार एवं सांसद मनोज तिवारी की सहभागिता ने लोक संस्कृति और समकालीन समाज के बीच संवाद स्थापित किया। उनकी उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि कला और जनजीवन को अलग-अलग खांचों में नहीं बांटा जा सकता। बीएलएफ के चौथे संस्करण का सबसे यादगार और चर्चित क्षण रहा पियूष मिश्रा का विशेष स्टेज शो। शब्द, संगीत और अभिनय का यह संगम दर्शकों के लिए एक भावनात्मक यात्रा बन गया। प्रस्तुति केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संवेदना और विचार का अनुभव थी। महोत्सव की सबसे बड़ी सफलता रही दर्शकों की भारी और निरंतर उपस्थिति।
हर आयु वर्ग, हर सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग इस आयोजन का हिस्सा बने। यह साबित करता है कि साहित्य आज भी समाज की धड़कन से जुड़ा हुआ है यदि उसे सही मंच दिया जाए।
साहित्यिक संवाद सवाल, बहस और दृष्टि
विचार गोष्ठियों में साहित्य की भूमिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समकालीन चुनौतियां और भविष्य की दिशा जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। यह संवाद किसी निष्कर्ष को थोपने वाला नहीं, बल्कि सोच को विस्तार देने वाला था।बसांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक, शास्त्रीय और समकालीन प्रस्तुतियों का संतुलित समावेश रहा।
इसने काशी की बहुस्तरीय सांस्कृतिक पहचान को उभारा।
आयोजकों की स्वीकारोक्ति कोरल ग्रुप के बिना असंभव
आयोजकों और साहित्य जगत से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने खुले मंच से यह स्वीकार किया कि
कोरल ग्रुप और खालिद अंसारी का सहयोग इस आयोजन की सफलता का प्रमुख आधार रहा।
यह सराहना औपचारिक नहीं, बल्कि अनुभव जन्य थी।
बीएलएफ का चौथा संस्करण इस बात का प्रमाण बना कि साहित्य केवल बौद्धिक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग से संवाद कर सकता है।
आयोजन की समग्र सफलता एक सांस्कृतिक मॉडल
बीएलएफ का यह संस्करण भविष्य के साहित्यिक आयोजनों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जहां विचार, कला और प्रबंधन का संतुलन दिखा।
बनारस लिटरेचर फेस्टिवल का चौथा संस्करण केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक वक्तव्य बनकर सामने आया। कोरल ग्रुप की सहभागिता, खालिद अंसारी की सक्रिय भूमिका और साहित्यकारों की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। यह संस्करण लंबे समय तक साहित्य प्रेमियों, काशी और सांस्कृतिक समाज की स्मृति में दर्ज रहेगा। बना बनारस
वाराणसी। 29 जनवरी से 1 फरवरी तक आयोजित बनारस लिटरेचर फेस्टिवल का चौथा संस्करण काशी की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया। चार दिनों तक काशी केवल तीर्थ या पर्यटन का केंद्र नहीं रही, बल्कि वह विचारों, संवादों, कविताओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों की राजधानी में बदल गई।
* यह आयोजन इस बात का सशक्त संकेत था कि बनारस की पहचान केवल अतीत की धरोहर नहीं, चार दिवसीय बनारस लिटरेचर फेस्टिवल का सफल आयोजन।
* देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों की सहभागिता
* कोरल ग्रुप की सक्रिय भागीदारी और प्रबंधन में अहम भूमिका
* खालिद अंसारी द्वारा विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
* पियूष मिश्रा का चर्चित और सराहनीय स्टेज शो
* काव्य पाठ, मुशायरा और संवादों की समृद्ध श्रृंखला
* काशी की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत का प्रभावी प्रस्तुतीकरण
* आयोजकों द्वारा कोरल ग्रुप के योगदान की सार्वजनिक सराहना




