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बीते सप्ताह की उथल-पुथल के बाद सुशीला कार्की के हाथों में नेपाल की कमान,जनविद्रोह पर लग पाएगी लगाम !

अंतरिम सरकार का हुआ गठन, छः माह में कराना होगा चुनाव


काठमांडू। नेपाल में लोकतंत्र का चेहरा पांच दिनों तक आग और खून में जलता रहा। सोशल मीडिया प्रतिबंध से भड़का नौजवानों का गुस्सा राजपथ पर जनविद्रोह बन गया। 20 से अधिक युवा पुलिस-सेना की गोलीबारी में मारे गए, सैकड़ों घायल हुए, राष्ट्रपति आवास और बड़े नेताओं के घर फूंक डाले गए, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल दोनों को इस्तीफा देना पड़ा। सत्ता का शून्य खड़ा हो गया। पांच दिन तक सुलगती राजधानी और अराजकता के बीच अब नेपाल को नया चेहरा मिला है—पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की देश की नई प्रधानमंत्री बनी हैं।

सत्ता का शून्य और कार्की का उदय

ओली और पौडेल के इस्तीफे के बाद नेपाल पांच दिनों तक बिना राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के रहा। संसद भंग होने की स्थिति तक पहुंच चुकी थी। सेना और मुख्य राजनीतिक दलों के दबाव के बीच आम सहमति से पूर्व मुख्य न्यायाधीश और भ्रष्टाचार विरोधी छवि वाली सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में एक छोटा मंत्रिमंडल बनेगा जिसमें केवल 3 से 7 लोग शामिल होंगे। इस बीच, संसद की बहाली और नई चुनावी प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।

लोकतंत्र का भ्रम और जनता का गुस्सा

सोशल मीडिया प्रतिबंध आंदोलन का बहाना बना, लेकिन असली विस्फोट भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ हुआ। 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद जनता ने लोकतांत्रिक गणराज्य का सपना देखा था, लेकिन 17 साल बाद भी वही भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष कायम रहे। यही निराशा आज की पीढ़ी को सड़कों पर ले आई।

नेताओं की रईसी बनाम जनता की भूख

आंदोलन में सबसे बड़ा नारा रहा ‘हमारे टैक्स और तुम्हारी रईसी।’ सोशल मीडिया पर वायरल ‘नेपोकिड’ ट्रेंड ने नेताओं की औलादों की ऐशो-आराम भरी जिंदगी को जनता के सामने रख दिया। लक्ज़री कार, दुबई की छुट्टियां, लाखों की घड़ियां और ब्रांडेड कपड़े—इन सबकी तस्वीरों ने भूख और बेरोजगारी झेल रहे आम युवाओं के गुस्से को विस्फोटक बना दिया।

सत्ता के प्रतीकों पर हमला

राष्ट्रपति पौडेल और प्रधानमंत्री ओली के घर से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड और कई बड़े नेताओं के आवास तक, कहीं भीड़ ने तोड़फोड़ की, कहीं आग लगा दी। इससे यह साफ संदेश गया कि जनता अब नेताओं को अपना सेवक नहीं बल्कि भ्रष्ट सत्ता का ठेकेदार मानती है।

इस्तीफों की झड़ी और सेना की भूमिका

पांच मंत्रियों के इस्तीफे के बाद सेना प्रमुख ने ओली को पद छोड़ने की सलाह दी। इस्तीफों और विद्रोह के दबाव में ओली और पौडेल ने गद्दी छोड़ दी। इससे नेपाल सत्ता-विहीन होकर अराजकता के कगार पर खड़ा हो गया था। ऐसे में सेना, न्यायपालिका और दलों ने मिलकर सुशीला कार्की पर भरोसा जताया।

बालेन शाह की लोकप्रियता और चुनौती

काठमांडू के मेयर बालेन शाह आंदोलन के दौरान युवाओं के प्रतीक बनकर उभरे। सोशल मीडिया पर उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठी। लेकिन राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की कमी को देखते हुए वे इस समय शीर्ष पद तक नहीं पहुँच पाए। फिर भी, युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता भविष्य की राजनीति का संकेत देती है।

दक्षिण एशिया की अस्थिरता और भारत की चिंता

नेपाल का यह विद्रोह श्रीलंका और बांग्लादेश की घटनाओं की याद दिलाता है। दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की अस्थिरता भारत के लिए भी चिंता का विषय है। नेपाल की सीमा बिहार से सटी है, इसलिए इस उथल-पुथल का असर बिहार चुनावों और सीमावर्ती सुरक्षा पर पड़ सकता है। इस बीच चीन-नेपाल सैन्य अभ्यास और सीमा की संवेदनशीलता से भारत की खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं।

लोकतंत्र या अराजकता?

आज नेपाल के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विद्रोह स्थायी लोकतंत्र की राह बनाएगा या फिर अराजकता और राजशाही की वापसी का रास्ता खोलेगा। सुशीला कार्की की ईमानदार छवि उम्मीद जगाती है, लेकिन उनके सामने चुनौती यह होगी कि क्या वे सीमित मंत्रिमंडल और टूटे-फूटे राजनीतिक तंत्र के बीच देश को स्थिरता की राह पर ले जा पाएंगी।

* सोशल मीडिया प्रतिबंध से भड़का नौजवानों का गुस्सा जनविद्रोह में बदला।
* 20 से अधिक नौजवान मरे, सैकड़ों घायल, काठमांडू समेत कई शहरों में हिंसा।
* राष्ट्रपति पौडेल और प्रधानमंत्री ओली ने इस्तीफ़ा दिया, सत्ता का शून्य पैदा हुआ।
* पांच दिन की अराजकता के बाद पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की बनीं प्रधानमंत्री।
* कार्की का मंत्रिमंडल छोटा होगा—3 से 7 लोगों तक सीमित।
* काठमांडू मेयर बालेन शाह युवाओं की उम्मीद बने लेकिन अनुभव की कमी बड़ी चुनौती।
* ‘नेपोकिड’ ट्रेंड और नेताओं की रईसी ने जनता के गुस्से को भड़काया।
* नेपाल की अस्थिरता का असर बिहार चुनाव और भारत की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
* चीन-नेपाल सैन्य अभ्यास और सीमा पर गतिविधियों से भारत सतर्क।
* क्या नेपाल नया लोकतंत्र गढ़ पाएगा या अराजकता और राजशाही की वापसी होगी?

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