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ममता बनर्जी ने धरा वकील का भेष,भाजपा का बिगाड़ दिया फेस

ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर भाजपा की बोलती बंद की, SIR के मुद्दे पर बंगाल में भाजपा का खेला कर दिया, कोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस

– अपने वकीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं ममता, जिरह में भाग लिया
– कहा- सिर्फ बंगाल में SIR की इतनी हड़बड़ी क्यों? बाकी जगह क्यों नहीं ?
– माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्ति पर उठे सवाल, चुनाव आयोग को नोटिस
– भारत के इतिहास में पहली बार किसी सीएम ने चीफ जस्टिस से कोर्ट में की जिरह

नई दिल्ली। भारत के इतिहास में बुधवार का दिन बहुत ही ऐतिहासिक रहा। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर के मामले में खुद पेश होकर चीफ जस्टिस की बेंच के सामने बतौर याचिकाकर्ता खुद ही जिरह की।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ममता की मौजूदगी पर कहा कि मैडम सीएम आज कोर्ट में पेश हुई हैं। मुझे उम्मीद करनी चाहिए कि पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में चुनाव आयोग की किस तरह मदद कर सकेगी। जवाब में ममता बनर्जी ने बोलने के लिए पांच मिनट की मोहलत मांगी।

 

 

कोर्ट में क्या बोलीं ममता

ममता ने कहा कि जब एसआईआर की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है, हमें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा है। मैंने इस बारे में चुनाव आयोग को कई बार लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि बंगाल सरकार ने इस मामले में रिट याचिका दायर की है। देश के सबसे अच्छे वकील राज्य सरकार की ओर से पेश हुए हैं। ये सभी कोई कोटे को इस मामले में मदद करेंगे। ममता ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि एक विवाहित महिला का नाम वोटर लिस्ट से इसलिए काट दिया गया, क्योंकि उसके पति के उपनाम को नहीं दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया लोगों को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि बांटने के लिए चलाई गई है। उन्होंने चीफ जस्टिस के पूर्व के फैसले की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब आपने आधार कार्ड को अनिवार्य किया तो बंगाल के लोग खुश थे, लेकिन चुनाव आयोग ने उसे भी मना कर दिया। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग ने केवल बंगाल को ही निशाना बनाया। एसआईआर करने में इतनी जल्दबाजी की क्या जरूरत थी, जबकि इस प्रक्रिया में दो साल का समय लगता है ? लोगों को त्योहारों के समय नोटिस भेजे गए। 100 बीएलओ मारे गए हैं। ऐसा केवल बंगाल में ही क्यों किया गया, असम में क्यों नहीं ? ममता ने कोर्ट में दावा किया कि चुनाव आयोग ने जिन माइक्रो ऑब्जर्वरों को उएसआईआर में मदद के लिए नियुक्त किया है, उनके आने से वोटरों के नाम और ज्यादा कट रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के पहले ड्राफ्ट में 58 लाख वोटरों के नाम पहले ही काट दिए गए थे। अब 40 लाख और वोटरों के नाम में गड़बड़ी कर काटे गए हैं। इस पर चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील राकेश धवन ने आरोप लगाया कि बंगाल सरकार एसआईआर की प्रक्रिया में चुनाव आयोग के साथ सहयोग नहीं कर रही है। माइक्रो ऑब्जर्वरों की नियुक्तियां इसीलिए की गई हैं, ताकि वे चुनाव आयोग की मदद कर सकें। लेकिन ममता के वकीलों ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने जो भी जानकारी मांगी, वह दी गई। ऐसे में यह कहना गलत है कि सरकार उन्हें सहयोग नहीं कर रही है। कोर्ट में ममता का यह कहना काम कर गया कि चुनाव आयोग से केवल बंगाल में ही माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति की है। बाकी 12 राज्यों में जहां भी एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है, उनमें कहीं भी इनकी नियुक्ति क्यों नहीं हुई ?
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी। इससे पहले भाजपा के सूत्रों ने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ममता बनर्जी को जिरह में शामिल होने की इजाजत नहीं देगा और उन्हें दर्शक दीर्घा में बैठकर अदालत की कार्यवाही देखनी होगी। लेकिन ममता ने तमाम अफवाहों को दरकिनार करते हुए अपने वकीलों के साथ न केवल मामले की सुनवाई में हिस्सा लिया और पांच मिनट की मोहलत मांगकर तीन जजों की बेंच को अपने राज्य के लोगों की पीड़ा को पहुंचा दिया।

क्या कहा चीफ जस्टिस ने

चीफ जस्टिस ने कहा कि बंगाल सरकार ने अपनी याचिका में SIR को लेकर कुछ गंभीर समस्याएं उजागर की हैं। सीएम ममता बनर्जी ने भी अपनी ओर से चिंताओं को सामने रखा है। अब चुनाव आयोग को इन समस्याओं को हल करना है। इन सभी प्रक्रियाओं की एक समयावधि होगी। हमने याचिकाकर्ता और चुनाव आयोग की ओर से पेश वकीलों की दलीलों को सुना है। आगे की सुनवाई में भारत के महाधिवक्ता की ओर से एक और बात कही गई है कि इसी मामले को लेकर लगी एक और याचिका और चुनाव आयोग के हलफनामे में उल्लिखित बिदुओं पर भी मेरिट के आधार पर गौर किया जाएगा। अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

3 दिन से दिल्ली में ममता

ये बंगाल के हर एक साधारण नागरिक की आवाज है। हर उस भद्र मानुष की, जिसे एसआईआर के नाम पर बेइज्जत किया गया। ममता ने आज सुप्रीम कोर्ट में खुद को वीवीआईपी नहीं, एक साधारण नागरिक बताया। ममता बनर्जी रविवार शाम को दिल्ली पहुंची थी। उससे पहले तृणमूल कांग्रेस बंगाल से उन 100 लोगों के जत्थे को दिल्ली स्थित बंग भवन पहुंचाया था, जिनका नाम चुनाव आयोग ने मृत बताकर वोटर लिस्ट में से काट दिया था। दिल्ली पहुंचते ही जब ममता ने बंग भवन के दरवाजे पर दिल्ली पुलिस का जत्था देखा तो उन्होंने ललकारा था। जानकार सूत्रों का दावा है कि दिल्ली पुलिस का जत्था उन 100 मृत वोटरों को डराने के लिए भेजा गया था, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में गवाही के दौरान सच्चाई न बता दें। बाद में ममता ने उनकी हिफाजत के लिए बंगाल से एक डीएसपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस के 22 अफसरों की फौज बुला ली और बंग भवन की सुरक्षा उनके हवाले कर दी थी।

ममता की जिरह के सियासी मायने

बंगाल में एसआईआर मामले में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत लगी याचिका में अपने लिए पैरवी की अनुमति मांगकर ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों का दिल जीत लिया है। इससे पश्चिम बंगाल में साफ संदेश गया है कि बतौर सीएम ममता बनर्जी अपने लोगों को न्याय दिलाने के लिए किसी भी मुकाम पर संघर्ष कर सकती हैं। इससे समूचे बंगाल के वोटरों में भाजपा के प्रति एक नाकारात्मक छवि बन चुकी है, जो राज्य के वैधानिक वोटरों से वोट देने का अधिकार छीनना चाहती है। ममता के बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की जिरह में भाग लेने से पश्चिम बंगाल में वोट काटने की सियासी खेल में ममता ने भारी बढ़त बना ली है। अब वे अपने राज्य में लोगों के बीच जाकर यह कह सकती हैं कि उन्होंने केवल जतीन पर ही नहीं, बल्कि अदालत के दरवाजे तक में लोगों के हक की लड़ाई लड़ी। आने वाले चुनाव में भाजपा को ममता की इस हिम्मत के गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे।

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