राहुल गांधी का चुनाव आयोग से पंगा, पूरे देश मे ईसीआई को कर दिया नँगा
वोट की डकैती राहुल गांधी का ‘एटम बम’ व लोकतंत्र का कंगाल होता स्तंभ

~ कांग्रेस का दावा एक सीट पर एक लाख फर्जी वोट, चुनाव आयोग के आंकड़ों से सबूत
~ राहुल बोले यह खेल सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं, महाराष्ट्र-हरियाणा में भी आजमाया गया
~ चुनाव आयोग पर आरोप मशीन-रीडेबल डेटा न देना, ताकि धांधली पकड़ में न आए
~ भाजपा की जीत पर उठे सवाल सात में छह विधानसभा हारे, एक में ‘एकतरफा चमत्कार’
~ सुप्रीम कोर्ट से स्वत संज्ञान की मांग, विपक्षी दल भी आयोग की निष्पक्षता पर उठाने लगे आवाज
~ भाजपा का पलटवार आरोप बेबुनियाद, राहुल को शपथ पत्र देने का नोटिस
~ बड़ा सवाल अगर लोकतंत्र नहीं बचेगा, तो सत्ता में बैठे लोग भी क्या बच पाएंगे!

संसद से लेकर गांव की चौपाल तक 7 अगस्त 2025 की दोपहर भारतीय लोकतंत्र के माथे पर एक और कलंक का निशान बन गया। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा ‘एटम बम’ फोड़ा, जिसकी गूंज सिर्फ कर्नाटक में नहीं, बल्कि पूरे देश की चुनावी प्रणाली को हिला देने के लिए काफी है। उन्होंने चुनाव आयोग के अपने ही आंकड़ों से साबित करने का दावा किया कि महादेवपुरा विधानसभा सीट पर 1,00,250 फर्जी वोट डाले गए वह भी संगठित तरीके से। सवाल सिर्फ एक सीट का नहीं है अगर यह एक जगह हो सकता है, तो क्या यह देशभर में नहीं हुआ होगा और अगर हुआ, तो लोकतंत्र नाम की इस इमारत की नींव अब कितनी बची है।
राहुल गांधी की ‘वोट चोरी’ प्रेस कॉन्फ्रेंस
1 अगस्त को ही राहुल गांधी ने चेतावनी दे दी थी मेरे पास वोट चोरी के पक्के सबूत हैं, जब इन्हें सार्वजनिक करूंगा तो एटम बम फूटेगा। सात अगस्त की दोपहर, उन्होंने वादा पूरा किया। दिल्ली में मीडिया के सामने आए राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के आधिकारिक डेटा की मोटी फाइलें टेबल पर रखीं। सात फीट ऊंचा मतदाता सूची का पुलिंदा जिसे कांग्रेस की एक टीम ने छह महीने तक खंगाला उनके दावों का आधार बना। महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा बेंगलुरु मध्य लोकसभा सीट के सात में से छह विधानसभा क्षेत्रों में पीछे रही, लेकिन महादेवपुरा में उसे ‘एकतरफा चमत्कार’ मिल गया। यही ‘चमत्कार’ अब विवाद का केंद्र है।
धांधली का गणित आंकड़ों में खुलासा
कांग्रेस के मुताबिक, महादेवपुरा में 11,965 डुप्लीकेट वोटर बनाए गए, 40,009 फर्जी पतों का इस्तेमाल हुआ। 10,452 वोटर बड़ी संख्या में एक ही पते पर रजिस्टर्ड, 4,132 वोटर बिना फोटो या अवैध फोटो के, 33,692 नए वोटर फॉर्म-6 के गलत इस्तेमाल से जोड़े गए। मतदाता सूची में कई जगह एक ही पते पर 40-50 वोटर मिले। कहीं एक ही नाम से अलग-अलग राज्यों के पते वाले कार्ड। कई कार्ड में पिता के नाम के अक्षर अजीबोगरीब क्रम में, तो कहीं मकानों के पते पर ‘शून्य’ लिखा हुआ। फॉर्म-6 जो 18 साल के नए वोटरों के लिए है में 70-80 साल के ‘नए मतदाता’ दर्ज कर दिए गए।
चुनाव आयोग पर सीधा हमला
राहुल गांधी का आरोप साफ था निर्वाचन आयोग मशीन-रीडेबल डेटा नहीं दे रहा, ताकि धांधली पकड़ी न जा सके। उन्होंने कहा कि अगर यह डेटा डिजिटल और मशीन रीडेबल रूप में दिया जाता, तो जांच आसान होती। इतिहास गवाह है कि आयोग पर पहले भी पारदर्शिता की कमी और सत्ता के दबाव में काम करने के आरोप लगे हैं। लेकिन इस बार आरोप सीधे आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित हैं जो आयोग को जवाब देना और भी मुश्किल बना देता है।
भाजपा और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
भाजपा ने तुरंत पलटवार किया कहा कि राहुल गांधी के आरोप बेबुनियाद और भ्रम फैलाने वाले हैं। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपात्र मतदाताओं के जुड़ने और पात्र नाम हटाने के आरोप पर शपथ पत्र मांगा। साथ ही 9 अगस्त को 1 से 3 बजे तक मिलने का समय भी दिया। राहुल गांधी ने जवाब में कहा मैं जो कहता हूं, वह मेरा वचन है। इसे शपथ मानिए। यह उनका डेटा है, हमारा नहीं।
- यह पहला मौका नहीं जब भारतीय चुनावी प्रणाली पर सवाल खड़े हुए हों
- वर्ष 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द किया था, चुनावी भ्रष्टाचार के आरोप में
- 2009-2019 कई बार ईवीएम की पारदर्शिता और वीवीपैट की गिनती को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए
- वर्ष 2022 त्रिपुरा और मणिपुर में फर्जी मतदाता सूची के आरोप लगे
- हर बार, चुनाव आयोग ने खुद को ‘निष्पक्ष’ बताने की कोशिश की, लेकिन ठोस पारदर्शी व्यवस्था कभी लागू नहीं की
कानूनी पहलू और सुप्रीम कोर्ट का रुख
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का अधिकार है। लेकिन अगर मतदाता सूची में गड़बड़ी साबित होती है, तो यह न केवल जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 का उल्लंघन है, बल्कि यह धारा 171एफ बीएनएस के तहत दंडनीय अपराध भी है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियाद है। अब सवाल प्रश्न यब है कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेगा!
लोकतंत्र पर खतरा असली मुद्दा क्या है!
राहुल गांधी ने चेतावनी दी नरेन्द्र मोदी जिन 25 सीटों के कारण प्रधानमंत्री बने, वे भी संदिग्ध हैं। अगर यह सच है, तो न केवल लोकसभा का जनादेश संदिग्ध होगा, बल्कि राज्य विधानसभा चुनावों की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
यह सिर्फ कांग्रेस बनाम भाजपा की लड़ाई नहीं, यह उस तंत्र के अस्तित्व का सवाल है, जिसके सहारे हम खुद को लोकतंत्र कहते हैं।
- भविष्य की लड़ाई और जनता की भूमिका
- चुनाव आयोग तत्काल स्वतंत्र जांच कराए
- मतदाता सूची पूरी तरह डिजिटल और मशीन रीडेबल रूप में उपलब्ध कराई जाए
- सभी ईवीएम के साथ वीवीपैट की 100 फीसदी गिनती हो
- फर्जी वोट बनाने वाले अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे हों
- अगर यह नहीं हुआ, तो अगला चुनाव शायद चुनाव न होकर सिर्फ सत्ता का ‘पुनर्नियुक्ति समारोह’ होगा
लोकतंत्र ही चोरी हो गया, तो सत्ता में बैठे लोग कब तक बचेंगे!
अगर लोकतंत्र ही चोरी हो गया, तो सत्ता में बैठे लोग भी कब तक बचे रहेंगे! यह लड़ाई राहुल गांधी की नहीं, हर उस नागरिक की है, जो मानता है कि उसका वोट उसकी ताकत है। अगर वह ताकत फर्जी सूचियों में डूब गई, तो फिर चुनावी लोकतंत्र सिर्फ कागज पर बचेगा असल में नहीं।
- ये आंकड़े गिनती नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हत्या के सबूत हैं।
- मैं जो कहता हूं, वही मेरा शपथ है-राहुल गांधी यह उनका डेटा है, मेरा नहीं।
- अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को स्वतंत्र चुनाव कराने का अधिकार
- जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 फर्जी नाम जोड़ना गैरकानूनी
- सुप्रीम कोर्ट मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियाद
- अगर ये आरोप सही साबित होते हैं तो लोकसभा का जनादेश संदिग्ध
- महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों की वैधता पर सवाल
- जनता का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा टूटना
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक साख को चोट
- दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे
- सुप्रीम कोर्ट निगरानी में ऑडिट
- वोटर सत्यापन में बायोमेट्रिक का इस्तेमाल
चुनाव आयोग बेहयाई पर आमादा
राहुल गांधी “वोट चोरी” को देश दुनिया को तमाम सबूतों के साथ दिखा चुके हैं तो इसके बाद भी केंचुआ तमाम सबूतों पर जवाब देने की बजाय IT cell की तरह मुर्खतापूर्ण जवाब दे रहा है “राहुल गांधी भ्रमित कर रहे हैं” , “राहुल गांधी शपथपत्र दें” “राहुल गांधी देश से माफी मांगे” इत्यादि इत्यादि…यही भाजपा की भी लाइन है।
बताईए भला… राहुल गांधी ने सबूत सार्वजनिक किया है, Epic नंबर दिया है, तमाम फर्जी एड्रेस दिया है, 100250 फर्जी वोटों का ब्योरा दिया है वह गलत है झूठ बोल रहे हैं तो तुम्हारे पास तो सारा रिकॉर्ड डिजिटल फार्मेट में है , एक क्लिक पर सब फिल्टर हो जाएगा…उन्हें झूठा साबित करो , उनपर FIR कराओ और जेल भेजो….. मगर केंचुआ ज़मीन में छिप रहा है..
क्या वेबसाइट बंद कर भागा चुनाव आयोग?
सोशल मीडिया पर बड़ी सनसनीखेज खबर है भारतीय चुनाव आयोग की हरियाणा महाराष्ट्र राजस्थान मध्य प्रदेश कर्नाटक बिहार और उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर अस्थाई रूप से यह लिखा हुआ आ रहा है अभी
इससे संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता!
यह इस बात का सीधा-सीधा संकेत है कि राहुल गांधी ने चुनाव चोरी को लेकर जो आंकड़े प्रस्तुत किए थे उसके बाद पूरे देश के फैक्ट चेकर उनका फैक्ट चेक कर रहे थे और वह फैक्ट सत्यापित हो रहे थे उस से घबराकर और इस बात से डर कर की और नए फैक्ट्स जनता के नॉरेटिव में नहीं आ जाए इलेक्शन कि यह वेबसाइट अभी अपने आप को संबंध स्थापित करने से बाहर बता रही है!
प्रदेशों की वेबसाइट का जो E पेज होता है, डाउन चल रहा है और कई जगह तो लिखा आ रहा है आप बाद में संपर्क करें!
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह आशंका व्यक्त की है की चुनाव आयोग वेबसाइट डाउन कर कर सुधार करने की कोशिश कर रहा है ताकि नई वेबसाइट के माध्यम से वह अपनी निष्पक्षता जाहिर करें! यानी वेबसाइट को संशोधित करने का प्रयास कियाजा रहा है!
अभी प्रमाणित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तय है कि राहुल गांधी का आरोपो ने चुनाव आयोग की नींद हराम कर दी है!
सोशल मीडिया के कई यूजर्स ने लिखा है कि सचमुच कई राज्यों के E पेज डाउन है!
क्या चुनाव आयोग एक नए बहाने के साथ एक नई शरारत के साथ अपने आप को सती सावित्री घोषित करने की कोशिश करेगा!



