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विश्वगुरु मोदी का का निकल गया दम,देश मे गैस की आपूर्ति हुई कम

सिर्फ तेल और गैस नहीं, हॉर्मूज के बंद होने से भारत को लगा 98 अरब डॉलर का झटका

 * गुजरात से तमिलनाडु तक देशभर के उद्योगों को करारा फटका
 * गोदी चैनलों ने चलाई झूठी खबर, कहा- ईरान ने भारतीय जहाजों को दी अनुमति, ईरान का खंडन
 * भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी माना कि जयशंकर की बात से कोई हल नहीं निकला
 * भारत में एलपीजी का घनघोर संकट, मोदी सरकार के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं
 * तेल-गैस के साथ पेट्रोकेमिकल्स का संकट भी गहराया, उद्योग बंद होने की कगार पर
 * प्लास्टिक, डिटर्जेंट, टाइल्स और सैनिटरी पाइप के दाम बेतहाशा बढ़ने की आश्ंका
 * गुजरात में 6 लाख कामगारों पर रोजगार छिनने का संकट गहराया

नई दिल्ली। भारत में एलपीजी गैस का संकट हर गुजरते दिन के साथ गहराता जा रहा है। देशभर के होटल और रेस्त्रां उद्योग बंद हो रहे हैं, क्योंकि गैस की सप्लाई बाधित है। रेल्वे ने यात्रियों को खाना देना बंद कर दिया है। पर्यटन क्षेत्र को गहरी मार पड़ी है। नोएडा और यूपी के कई जिलों में गैस सिलेंडर भरवाने की लंबी लाइन लगी है, लोगों के बीच मारा-मारी हो रही है। वहीं, इंडियन ऑयल ने लोगों से अपना इंतजाम खुद करने के लिए कह दिया है।

अब आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल का संकट भी गहरा सकता है। वैसे तो अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत दे दी है, लेकिन रूस अब तेल के नाम पर मोलभाव करने लगा है। तेल का एक टैंकर, जो ईरान से युद्ध शुरू होने से पहले 80 लाख डॉलर का पड़ता था, वही अब चार गुना महंगा होकर 20 से 23 मिलियन, यानी दो करोड़ डॉलर से महंगा बिक रहा है। कच्चे तेल के भाव अब 94 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुके हैं। फिर भी भारतीय मीडिया आम जनता को बेफिक्र करने की कोशिश में झूठी खबर फैला रहा है।

ईरान से परमिशन मिलने की झूठी खबर

विगत सप्ताह एक मीडिया चैनल ने सूत्रों के हवाले से एक झूठी खबर चलाई कि ईरान ने हॉर्मूज से भारतीय झंडे लगे जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी है। लेकिन इसके फौरन बाद ईरानी विदेश मंत्रालय और रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने इन खबरों का खंडन कर दिया। भारतीय मीडिया ने हालाकि यह खबर विदेश मंत्री एस जयशंकर के ईरानी विदेश मंत्री अरागची को किए गए टेलीफोन के बाद चलाई। लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय के खंडन से साफ है कि अरागची ने भारत से इस तरह का कोई वादा नहीं किया है। भारत में पेट्रोल-डीजल की रोज की खपत 5 मिलियन डॉलर की है, जबकि अमेरिका ने रूस से केवल 30 मिलियन डॉलर का तेल खरीदने की इजाजत दी है, जो कि देश का एक सप्ताह का कोटा भी नहीं है। रूस से खरीदा गया तेल भारत को कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव से 8 डॉलर महंगा पड़ रहा है। ईरान ने बुधवार को भारत के लिए तेल ला रहे एक टैंकर जहाज को निशाना बनाकर हमला किया, जिससे उसमें आग लग गई। इस घटना के बाद से कोई भी दूसरा टैंकर मध्य-पूर्व में जाने से बच रहा है, क्योंकि उसे ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों का डर सताने लगा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारत के विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच 3 बार बातचीत हुई है। अंतिम बातचीत में शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अलावा अभी मेरे लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। इससे साफ है भारत का मीडिया सूत्रों के हवाले से झूठी खबरें चला रहा है, ताकि लोगों का ध्यान इस बड़ी समस्या से भटकाया जा सके।

सिर्फ तेल-गैस नहीं, और भी सामान फंसे

हॉर्मूज के बंद होने से भारत का 98 अरब डॉलर का निर्यात फंस गया है। मामला केवल तेल और गैस का ही नहीं है। भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत गैस हॉर्मूज से ही मंगवाता है। ईरानी हमलों के कारण गैस की सप्लाई बंद है। केवल इतना ही नहीं, मिडिल ईस्ट से अहम पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई भी बंद है। ये पेट्रोकेमिकल्स भारत में कपड़ा उद्योग से लेकर इंजीनियरिंग उत्पाद तक बनाने में इस्तेमाल होते हैं। मिसाल के लिए भारत अपना 100 फीसदी एथिलिन ग्लायकॉल हॉर्मूज से होकर निकलने वाले रूट से ही मंगाता है। एक और रसायन है मेथेनॉल, जिसकी 88 प्रतिशत सप्लाई उसी रूट से होती है। उसी रूट से नेप्था भी आता है, जिसका उपयोग प्लास्टिक, पैकेजिंग, पाइप, जरूरी सामान और बहुत से औद्योगिक उत्पादों को बनाने में होता है। तेल-गैस और पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई बंद होने से गुजरात के मोरबी में सैनिटरी वियर्स बनाने का दुनिया का सबसे बड़ा कारखाना बंद हो चुका है, वहीं पटियाला की होजियरी इंडस्ट्री पर इसका खास असर देखने को मिला है।

दाम में 3 से 4 गुना इजाफा

हॉर्मूज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की औद्योगिक इकाईयों के लिए जरूरी पेट्रोकेमिकल्स के दाम 60 से 70 फीसदी बढ़े हैं। एक समय इस रास्ते से एशिया के लिए 24 जहाज गुजरा करते थे, जो अब घटकर केवल 4 रह गए हैं। बेंजीन का भाव 20%, एथिलीन का 5%, प्रोपिलीन का 7% बढ़ा है। इसी तरह पॉलीप्रोपेलीन का भाव 6000 रुपए प्रति टन बढ़ गया है। पीवीसी आदि रसायनों के भाव में पांच से 6 हजार रुपए तक की वृद्धि हुई है। भारत के पास अब पॉलिमर्स का स्टॉक केवल 12 दिन का ही बचा हुआ है, जबकि सऊदी अरब ने एडवांस पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई मार्च आखिर तक बंद करने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में भारत के उद्योग आने वाले दिनों में ठप हो सकते हैं।

अब पड़ेगी डिटर्जेंट उद्योग पर मार

भारत में डिटर्जेंट उद्योग में लीनियर एल्किल बेंजीन सल्फोनिक एसिड नाम के केमिकल का उपयोग होता है। इसी रसायन का उपयोग उन सभी वस्तुओं में किया जाता है, जिससे चीजें साफ की जाती हैं। ये रसायन उन प्रयोशालाओं से प्राप्त होता है, जो बेंजीन और नेफ्था का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं। भारत सऊदी अरब और कतर से यह रसायन मंगवाता रहा है। वहां सप्लाई बंद होने से दाम 70 फीसदी तक बढ़ गए हैं। भारत के छोटे और मझोले उद्योग इतनी ज्यादा कीमत नहीं झेल सकते, जिससे उनके बंद होने का खतरा पैदा हो गया है।

अकेले गुजरात में 6 लाख कामगारों पर संकट

गुजरात के मोरबी में सिरैमिक टाइल्स बनाने वाली 350 से अधिक इकाईयां गैस की सप्लाई बंद होने के कारण मुसीबत में हैं। इन इकाईयों से सालाना 70 हजार करोड़ रुपए का उत्पादन होता है। इनसे जुड़े 6 लाख कर्मचारियों पर अब रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ है। गुजरात में कुल 750 में से 350 फैक्ट्रियों में गैस की सप्लाई बंद है। अगर गैस का संकट लंबा चलता है तो इन इकाईयों के बंद होने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी तरह केरल के कोच्ची में फिनाइल बनाने वाली इकाईयां संकट में हैं। एचओसीएल का कोच्ची प्लांट जरूरी रसायनों की कमी से जूझ रहा है, जिसका असर कल फार्मा कंपनियों पर भी पड़ सकता है।

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