वाराणसी

वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा का किसानों के साथ संवाद, ताकि आगे न हो व्यर्थ का विवाद

लैण्ड पूलिंग से बदलेगी किसानों की किस्मत, बढ़ता भूमि मूल्य गंजारी-मढ़नी में वीडीए की पहल

● वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा का किसानों के साथ संवाद, ताकि आगे न हो व्यर्थ का विवाद

● लैण्ड पूलिंग से बदलेगी किसानों की किस्मत, बढ़ता भूमि मूल्य गंजारी-मढ़नी में वीडीए की पहल

● गंजारी व मढ़नी क्षेत्र के किसानों संग वीडीए की सीधी संवाद बैठक

● वीडीए उपाध्यक्ष ने लैण्ड पूलिंग योजना को बताया पारदर्शी व किसान-हितैषी

● भूमि लेकर विकसित कर पुनः किसानों को लौटाने का मॉडल समझाया

● सड़क, सीवर, जलनिकासी, हरित क्षेत्र व सामुदायिक सुविधाओं पर जोर

● किसानों की शंकाओं का प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समाधान

● अफवाहों से दूर रहकर सीधे वीडीए से संवाद की अपील

 

अमित मौर्य

वाराणसी। काशी के तेजी से फैलते शहरी दायरे में यदि किसी एक प्रश्न ने सबसे अधिक बेचैनी पैदा की है, तो वह है विकास और किसान के अधिकार के बीच संतुलन। बीते वर्षों में जहां अनियोजित कॉलोनियों, अवैध प्लॉटिंग और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने शहर की विकास धारा को अवरुद्ध किया, वहीं दूसरी ओर किसानों के मन में यह आशंका भी घर करती रही कि विकास योजनाओं की आड़ में कहीं उनकी जमीन और भविष्य दोनों ही छिन न जाएं। इसी पृष्ठभूमि में वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा गंजारी एवं मढ़नी क्षेत्र के किसानों के साथ आयोजित संवाद बैठक को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास बहाली की पहल के रूप में देखा जा रहा है। उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा की अध्यक्षता में आहूत इस बैठक का उद्देश्य स्पष्ट था कि किसानों को लैण्ड पूलिंग योजना की वास्तविकता, प्रक्रिया और लाभ सीधे, सरल और पारदर्शी ढंग से समझाना। बैठक में मौजूद किसानों की आंखों में जहां सवाल थे, वहीं वर्षों से सुनी जा रही अफवाहों का बोझ भी साफ दिखाई दे रहा था। किसी को डर था कि जमीन चली जाएगी, किसी को मुआवजे की चिंता थी, तो किसी को यह आशंका कि विकास का लाभ केवल बिल्डरों और पूंजीपतियों तक सीमित रह जाएगा। ऐसे माहौल में उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने अपने संबोधन की शुरुआत थी कि यह योजना जमीन छीनने की नहीं, जमीन का मूल्य बढ़ाने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लैण्ड पूलिंग योजना किसी जबरन अधिग्रहण का नाम नहीं, बल्कि किसानों की सहमति पर आधारित सहभागी विकास मॉडल है। योजना का मूल सिद्धांत है। किसान अपनी भूमि विकास के लिए देता है, प्राधिकरण उस पर समुचित अधोसंरचना विकसित करता है और फिर उसी किसान को विकसित भूखंड लौटाता है, जिसकी कीमत पहले की तुलना में कई गुना अधिक होती है। उपाध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि वाराणसी जैसे ऐतिहासिक शहर में अब विकास का पुराना तरीका काम नहीं करेगा। यहां आवश्यकता है नियोजित, टिकाऊ और भविष्य को ध्यान में रखकर किए गए विकास की, जिसमें सड़कें संकरी न हों, जलभराव न हो, सीवर और बिजली की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित हो और हरित क्षेत्र भी पर्याप्त हों। बैठक में किसानों की भागीदारी केवल श्रोता तक सीमित नहीं रही। सवाल-जवाब के दौर में किसानों ने खुलकर अपनी जिज्ञासाएं और शंकाएं रखीं। यही वह बिंदु था, जहां यह बैठक सरकारी भाषण से आगे बढ़कर संवाद में बदल गई।

लैण्ड पूलिंग क्या है और क्यों है जरूरी

वीडीए अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से किसानों को समझाया कि लैण्ड पूलिंग योजना दरअसल शहरी विकास की एक आधुनिक व्यवस्था है, जिसे देश के कई बड़े शहरों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। इस योजना में किसान अपनी भूमि विकास के लिए देते हैं। प्राधिकरण उस भूमि पर सड़क, नाली, सीवर, बिजली, पार्क, सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं विकसित करता है। इसके बाद विकसित भूमि का एक हिस्सा किसान को वापस सौंप दिया जाता है। यह लौटाई गई भूमि न केवल पहले से अधिक उपयोगी होती है, बल्कि उसका बाजार मूल्य कई गुना बढ़ जाता है।

किसानों की सहमति सर्वोपरि

उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने दो टूक कहा कि बिना किसान की सहमति के बिना लैण्ड पूलिंग संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह योजना तभी आगे बढ़ेगी, जब किसान स्वयं इसे अपने हित में समझेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का दबाव, जबरदस्ती या अपारदर्शी प्रक्रिया इस योजना का हिस्सा नहीं है।

मुआवजा नहीं, भागीदारी का मॉडल

बैठक में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी सामने आया कि लैण्ड पूलिंग को केवल मुआवजे के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। यह भागीदारी विकास मॉडल है, जिसमें किसान सिर्फ जमीन देने वाला नहीं, बल्कि विकास का साझेदार होता है।

रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर

वीडीए अधिकारियों ने बताया कि नियोजित विकास से केवल सड़क-नाली ही नहीं बनती, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार, छोटे व्यवसायों को बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं का विस्तार जैसे लाभ भी स्वतः उत्पन्न होते हैं।

अफवाहों से सावधान रहने की अपील

उपाध्यक्ष ने किसानों को आगाह किया कि सोशल मीडिया और असत्यापित स्रोतों से फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान न दें। किसी भी जानकारी के लिए सीधे वीडीए कार्यालय या अधिकृत अधिकारियों से संपर्क करें। बैठक में सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा, अपर सचिव गुड़ाकेश शर्मा सहित प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने तकनीकी पहलुओं को सरल भाषा में समझाकर किसानों का भरोसा बढ़ाने का प्रयास किया। गंजारी-मढ़नी में हुई यह बैठक बताती है कि यदि विकास योजनाओं को संवाद, पारदर्शिता और सम्मान के साथ रखा जाए, तो किसान विरोध नहीं, बल्कि भागीदार बन सकता है। सवाल यह नहीं कि विकास होगा या नहीं, सवाल यह है कि विकास किसके साथ और किसके लिए होगा। वीडीए की यह पहल यदि कागज से निकलकर ज़मीन पर ईमानदारी से उतरी, तो यह मॉडल वाराणसी ही नहीं, पूरे पूर्वांचल के लिए मिसाल बन सकता है।

* लैण्ड पूलिंग जबरन अधिग्रहण नहीं, सहभागी विकास
किसान की सहमति योजना की आधारशिला
* विकसित भूखंड लौटाकर भूमि मूल्य में कई गुना वृद्धि
नियोजित विकास से अवैध कॉलोनियों पर लगाम
* रोजगार, व्यवसाय और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
* अफवाहों के खिलाफ सीधे संवाद पर जोर

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