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सदन छोड़ अडानी के लिये मलेशिया यात्रा पर गए हमारे सरकार,यार के लिये देश का भट्टा बैठाने को मोदी है तैयार

अदानी के लिए डील करने संसद सत्र छोड़कर मलेशिया गए पीएम मोदी? सोशल मीडिया पर बवाल, यहां जानें क्या है डील और क्यों उठ रहे हैं सवाल

– पहली बार 2015 में मलेशिया गए थे मोदी, तब भी हुई थी चर्चा
– दो साल बाद अदानी ने बंदरगाह विस्तार के प्रोजेक्टर पर लगाया पैसा
– 3 बिलियन डॉलर के इस समझौते को 9 साल तक सरकार ने छिपाया
– दो साल पहले अदानी ने यह राज खोला, मोदी की यात्रा के बाद अब मिल सकती है मंजूरी

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नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के बीच में पीएम नरेंद्र मोदी का मलेशिया के दो दिवसीय प्रवास पर जाना बहुतों को संदेह पैदा कर गया कि आखिर ऐसी भी क्या जल्दी थी। लेकिन सोमवार को सोशल मीडिया पर यह आशंका जताई गई कि पीएम मोदी खासतौर पर गौतम अदानी के मलेशिया में 3 बिलियन डॉलर के प्रस्तावित निवेश को आगे बढ़ाने के लिए वहां गए हैं।

 

 

पीएम की यात्राओं से अदानी को फायदा-

दरअसल, पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी साल 2015 में पहली बार मलेशिया गए थे। सोशल मीडिया में चल रहीं कयासबाजियों के मुताबिक उसी यात्रा में मलेशिया के कैरी द्वीप में माल ढुलाई के लिए एक बड़ा बंदरगाह बनाने की अदानी समूह की दिलचस्पी का जिक्र हुआ। इस यात्रा के दो साल बाद, यानी 2017 में अदानी समूह ने मलेशिया के सेलांगोर प्रांत के अंतर्गत कैरी द्वीप में चौथे बंदरगाह के विस्तार के लिए वहां की सरकार के साथ एक अनुबंध किया। सोशल मीडिया में ऐसी कई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि इससे पहले भी पीएम मोदी श्रीलंकाश्रीलंका, बांग्लादेश, तंजानिया और इजरायल गए और पीछे वहां अदानी ने भी बंदरगाह की परियोजना लगवा ली। यह दावा इसलिए संदेह से परे नहीं है, क्योंकि वास्तव में अदानी से ऐसा ही किया और इसी के आधार पर सोशल मीडिया में यह कयास लगाते रहे हैं कि पीएम मोदी की कोई भी विदेश यात्रा बिना अदानी का मकसद पूरा किए खत्म नहीं होती।

क्या है अदानी का प्लान

मलेशिया में जिस कैरी द्वीप पर अदानी एक बड़ा बंदरगाह बनाना चाहता है, वह राजधानी कुआलालंपुर से 50 किमी दक्षिण-पश्चिम में क्लांग बंदरगाह के नजदीक है। यह जगह सेलांगोर प्रांत में पड़ता है। बताया जाता है कि अदानी समूह की नजर यहां एक कंटेनर बंदरगाह बनाने की काफी पहले से थी। मलेशिया का यह प्रोजेक्ट यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अदानी के बंदरगाह बनाने की विस्तारित परियोजना का एक हिस्सा है, जहां से वह समुद्री रास्ते से माल-परिवहन के जरिए अपना व्यापार बढ़ाना चाहता है। मलेशिया को भी अपने बढ़ते माल परिवहन को मैनेज करने के लिए किसी बड़े बंदरगाह की जरूरत थी और उसने कैरी द्वीप पर एक चौथे बंदरगाह के लिए निविदा मंगाई थी। अदानी समूह ने इसके लिए 3 बिलियन डॉलर की बोली लगाई है।
बताया जाता है कि मलेशिया के क्लांग बंदरगाह के विस्तार का यह काम 2060 तक चलने वाला है। इस पर कुल 32 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा। अदानी ने अपने अदानी पोर्ट और स्पेशल इकोनॉमिक जोन के माध्यम से अप्रैल 2017 में एमएमसी कॉर्पोरेशन के साथ कैरी द्वीप में क्लांग बंदरगाह के विस्तार के लिए एक अध्ययन कराने के एमओयू पर दस्तखत किए। दूसरा एमओयू एमएमसी और साइमे डार्बी प्रॉपर्टी के साथ बंदरगाह को सपोर्ट करने के लिए एक समुद्री शहर बनाने का किया है। दोनों में कंटेनर की हैंडलिंग, एक जगह से दूसरे जगह तक उन्हें पहुंचाने और अन्य औद्योगिक सुविधाओं के विस्तार के काम का अनुबंध है। पीएम मोदी की 2015 में मलेशिया की यात्रा के दौरान इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को सुधारने के रूप में प्रचारित किया गया, जबकि मूल रूप से यह भारत नहीं, बल्कि अदानी के फायदे का प्रोजेक्ट है।

मोदी सरकार ने छिपाया, अदानी ने बताया

इस तरह करीब 9 साल तक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट को भारत की जनता से यह कहकर छिपाकर रखा कि इससे भारत और मलेशिया के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे और देश की प्रगति को नई दिशा मिलेगी। लेकिन मई 2024 में अदानी समूह ने पहली बार आम जनता को बताया कि उसकी कंपनी वैश्विक बंदरगाहों के विस्तार के काम में अगले तीन से पांच साल में 5 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी। कंपनी का टारगेट अपने समुद्री माल परिवहन को 600 से 800 मिलियन टन तक पहुंचाना है और इसके लिए अदानी समूह कंपनियों का अधिग्रहण और साझेदारी जैसे कदम उठाएगी। इसी में मलेशिया के कैरी द्वीप में 3 बिलियन डॉलर का बंदरगाह विस्तार प्रोजेक्ट भी शामिल है।

तो इसलिए मलेशिया गए मोदी

फिलहाल बंदरगाह विस्तार का अदानी का यह प्रोजेक्ट एडवांस प्लानिंग के चरण में है। बीते साल के आखिर में मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहीम ने अपने सरकार की एजेंसियों को काम तेज करने का आदेश दिया था। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को राष्ट्र की प्राथमिकता बताते हुए कुशलता और एकजुटता पर बल दिया था। जनवरी 2026 में सेलांगोर प्रांत की सरकार अनवर इब्राहीम कैबिनेट के प्रोजेक्ट पर अनुमोदन का इंतजार कर रही थी। इसी बीच 7 और 8 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी मलेशिया की यात्रा पर कुआलालंपुर पहुंच गए। अदानी के इस प्रोजेक्ट पर मलेशिया की 13वीं योजना के तहत 2026 की शुरुआत से ही काम शुरू होना है। प्रोजेक्ट 2028 से 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद अनवर इब्राहीम की कैबिनेट इस प्रोजेक्ट में बाहरी कंपनी, यानी अदानी के साथ करार को मंजूरी दे सकती है। प्रोजेक्ट में पर्यावरण और स्थानीय आदिवासी समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है।

सरकार ने बताया- रणनीतिक सहयोग

मलक्का जलडमरूमध्य के समुद्री जल परिवहन और माल ढुलाई को प्रभावित करने वाले मलेशिया में बदानी समूह के इस बड़े प्रोजेक्टर और गौतम अदानी के हितों को छिपाने के लिए भारत सरकार ने इसे मलेशिया के साथ व्यापार, रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग बताकर छिपा तो लिया है, लेकिन बीते 10 साल से अदानी की इस डील पर नजर को नहीं छिपा सकी है। इस डील से भारत की जनता को कोई फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन इजरायल के हाईफा बंदरगाह की तरह की अदानी और मलेशिया में साझेदार कंपनी को इसका पूरा फायदा मिलेगा।

मोदी बोले- अनवर इब्राहीम से पुरानी दोस्ती

मलेशिया में अपने संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि अनवर इब्रहीम से उनकी दोस्ती उनके पीएम बनने से पहले की है। यहां आपको बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के पहले अनवर इब्राहीम को 2 बार जेल हुई। उन पर अप्राकृतिक संबंध का आरोप था, जो कि मलेशियाई कानून के मुताबिक एक जघन्य अपराध है। अनवर इब्राहीम पर 1998 में अपने ड्राइवर सहित अन्य पुरुषों के साथ संबंध बनाने के आरोप में नौ वर्ष की सजा हुई। हालांकि 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिलीज कर दिया। फिर 2008 में उनके पूर्व सहायक ने आरोप लगाया कि अनवर ने उनसे बलपूर्वक अप्राकृतिक संबंध बनाए। अनवर इब्राहीम को 2014 में 5 वर्ष की सजा हुई। मगर 2018 में नई सरकार बनने पर राजा ने उन्हें पूर्ण क्षमादान दिया और रिहा कर दिया।

इधर संसद में बवाल

इस बीच संसद के बजट सत्र में विपक्षी सांसदों का बवाल जारी है। इस बवाल के बीच कांग्रेस के 7 और विपक्षी दल का एक सांसद पहले ही पूरे सत्र के लिए निलंबित हो चुका है। विपक्षी सांसदों, खासकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने न देने को लेकर बवाल सोमवार को भी जारी रहा। अब विपक्ष ने लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति तैयार की है। यह तो तय है कि विपक्ष इस अविश्वास प्रस्ताव को पारित नहीं करवा सकेगा, क्योंकि संसद के निचले सदन में भाजपा नीत एनडीए का बहुमत है। लेकिन इससे स्पीकर की भूमिका पर संदेह का प्रश्नचिन्ह जरूर लग जाएगा। कांग्रेस की महिला सदस्यों ने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर निराधार आरोप लगाने की बात कही है। उन्होंने संसद में पीएम की गैर मौजूदगी को उनका डर बताया है।

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