लखनऊउत्तर प्रदेश

सीएम योगी ने दिखाया जज्बा, मुख्तार के गढ़ पर गरीबों का कब्जा

योगी मॉडल ने दिखाई कानून की असली ताकत, गरीबो को मिला आशियाना

● सीएम योगी ने दिखाया जज्बा, मुख्तार के गढ़ पर गरीबों का कब्जा,

● योगी मॉडल ने दिखाई कानून की असली ताकत, गरीबो को मिला आशियाना

● डीजीपी ऑफिस के सामने खड़ा था माफिया का साम्राज्य, आज वहीं खड़े हैं गरीबों के नए आशियाने

● जहां कभी माफिया का साम्राज्य था, आज वहीं गरीबों के सपनों की दीवारें खड़ी

● डीजीपी ऑफिस के सामने योगी का बुलडोजर नहीं, कानून का साहस

● मुख्तार के महल की राख से उठी ईडब्ल्यूएस की नई जिंदगी

● अपराधी चाहे कितना बड़ा हो, राज्य की इच्छा शक्ति उससे बड़ी

● अदालत के आदेशों का सम्मान और अपराध पर प्रहार यही है योगी मॉडल

● जहां पहले खड़े थे असलहे, आज वहां खेल रहे हैं गरीब बच्चों के सपने

● सत्ता के संरक्षण में पलने वाले साम्राज्य ज़मीन में गड़े, जनता को मिली छत

● बुलडोजर सिर्फ तोड़ता नहीं बनाता है गरीबों का भविष्य भी

 

◆  सौरभ सोमवंशी

 

लखनऊ (अचूक संघर्ष)। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक इतिहास में शायद ही कभी ऐसा दृश्य देखा गया हो, जिसमें माफिया की गढ़ी गई अराजक सत्ता के ढांचे को गिराकर उसकी जगह गरीबों के सर पर छत दे दी गई हो। यह सिर्फ भवनों का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि राज्य की नई मानसिकता का प्रतीक था। जहां कानून कमजोर नहीं पड़ता, अपराध का साम्राज्य थोथा साबित होता है और जनता का हक सर्वोपरि रहता है। डीजीपी कार्यालय के सामने दशक भर से खड़ा मुख्तार अंसारी का किला गिरा, और उसी जमीन पर खड़े हुए भगवा रंग के 72 नये फ्लैट, जो आज आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का सुरक्षित घर बन चुके हैं।

मुख्तार का साम्राज्य डीजीपी ऑफिस के सामने

लखनऊ के डालीबाग इलाके में स्थित 2321 वर्ग मीटर की वह जमीन, जहां कभी मुख्तार अंसारी की सत्ता का प्रतीक रायल बंगला खड़ा रहता था, पुलिस महकमे के लिए हमेशा शर्म का कारण रहा। प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी डीजीपी के आवास के ठीक सामने खड़ा यह भवन यह संदेश देता था कि अपराधी किस तरह सरकारों और व्यवस्था की नाक के नीचे फलते-फूलते हैं। 2017 से पहले राज्य की कानून-व्यवस्था की हालत ऐसी थी कि माफिया का महल व्यवस्था की आंखों में आंख डालकर खड़ा रहता था, और सरकारें उससे नजरें चुराती थीं।

मुख्यमंत्री योगी का वह निर्णायक फैसला

31 जनवरी 2020 का दिन डीजीपी ओपी सिंह का आखिरी कार्य दिवस। शाम की चाय पार्टी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचते हैं। समारोह समाप्त होता है और डीजीपी गाड़ी तक उन्हें छोड़ने आते हैं।
मुख्यमंत्री सामने खड़ी इमारत को देखते हैं और पूछते हैं कि यह बिल्डिंग किसकी है तो जवाब मिलता है मुख्तार अंसारी की। मुख्यमंत्री उस विशाल भवन को एक बार फिर देखते हैं। कुछ नहीं कहते, लेकिन उनके भीतर का सत्ता-संन्यासी निर्णय कर चुका था। लोक भवन पहुंचते ही मुख्य सचिव को तलब किया और 24 घंटे में भवन का पूरा ब्यौरा मांगा। रिपोर्ट आई कि यह भवन शत्रु संपत्ति पर खड़ा है। मुख्तार ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा किया है। सीएम योगी ने आदेश दिया कि यह भवन गिरेगा और इसकी लागत अपराधी से वसूली जाएगी।

अधिकारियों की घिग्घी बंद, लेकिन आदेश टला नहीं

मुख्तार अंसारी का नाम आते ही कई अधिकारी सहमे हुए थे। तर्क दिए जाने लगे कि भवन बहुत मजबूत है, बुलडोजर नहीं चल पाएगा। आरसीसी स्ट्रक्चर है, गिराना मुश्किल है। लेकिन योगी का आदेश साफ था कि ढिलाई नहीं चलेगी। चाहें आधुनिक तकनीक से गिराओ या डायनामाइट से लेकिन भवन ध्वस्त होना चाहिए। अधिकारियों के पास दूसरा विकल्प नहीं था।

मुख्तार की भाग-दौड़, कोर्ट की रात वाली सुनवाई

जैसे ही कार्रवाई की भनक पहुंची, मुख्तार अंसारी कोर्ट भागा। रात में सुनवाई हुई, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोर्ट का सम्मान सर्वोपरि है, हर आदेश का पालन हो। कुछ ही दिनों बाद सरकार ने कोर्ट को बताया कि भवन ध्वस्त किया जा चुका है। साइट पर केवल मलबा शेष है। मामला वहीं समाप्त हो गया और मुख्तार के माफिया-साम्राज्य का गर्व उसी मलबे में दफ्न हो गया।

मलबे से उठकर खड़ा हुआ गरीबों का आशियाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि इस स्थान को गरीबों के लिए आवंटित किया जाए।
लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सरदार वल्लभभाई पटेल आवासीय योजना योजना तैयार की और भगवा रंग के 72 आधुनिक फ्लैट निर्मित किए गए। जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आवंटित किए गए। कई लोगों को चाबी खुद मुख्यमंत्री ने सौंपी। यह दृश्य सिर्फ एक सरकारी समारोह नहीं था। उत्तर प्रदेश में सशक्त शासन, निष्पक्ष कानून, और गरीब समर्थक नीति का नया अध्याय था। जहां अपराधी के महल की जगह अब गरीबों का घर खड़ा है।

अतीक अहमद के साम्राज्य पर भी चला बुलडोजर

योगी मॉडल सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहा।
प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के साम्राज्य पर भी कानून की गाज गिरी अलीना सिटी लूकरगंज प्रयागराज एयरपोर्ट के पास की जमीन पर भी गरीबों के लिए आवासीय परियोजनाएं विकसित की गईं। जहां पहले अतीक के गुर्गों की दहशत होती थी, वहां अब बच्चों की आवाजें और गृहणियों की मुस्कान सुनाई देती है। यह बदलाव सिर्फ भौतिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है।

कौन थे वे लोग जो अपराधियों का कर रहे थे बचाव

एक तरफ सरकार अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही थी, दूसरी तरफ कुछ प्रभावशाली वर्ग ऐसे थे जो माफिया संरक्षण में गहराई से लिप्त थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार सिंह वह नाम हैं, जिन्होंने पहली बार 32 वर्षों में साहस दिखाते हुए 22 सितंबर 2022 को मुख्तार अंसारी को 7 वर्ष की सजा, 23 सितंबर 2022 को 5 वर्ष की सजा सुनाई। उन्होंने मुख्तार को जेल में सुविधाओं की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी। लेकिन इसके तुरंत बाद उनका केरल स्थानांतरण रूटीन बताकर कई प्रश्न छोड़ गया। उधर अतीक अहमद अपनी अंतिम सांसें गुजरात में लेते हुए भी गुजरात की जेल को सबसे सुरक्षित मानता रहा।इसके पीछे कौन-सी अदृश्य ताकतें थीं, क्यों अपराधी खुद को किसी राज्य विशेष में अधिक सुरक्षित समझते थे? इन सवालों का जवाब अभी भी सत्ता और न्यायपालिका के गलियारों में घूम रहा है।

एक संन्यासी राजनेता का न्याय

लखनऊ के डालीबाग में जहां कभी मुख्तार की गाड़ियों का शोर, असलहों की नुमाइश और डर की तलवारें लटकती थीं, आज वहां 72 गरीब परिवार अपने बच्चों के साथ सुरक्षित घरों में रहते हैं। यह दृश्य बताता है कि यदि शासन इच्छाशक्ति दिखाए तो अपराध कितना भी बड़ा क्यों न हो, झुकता है। जनता के हक को प्राथमिकता दी जाए तो माफिया के साम्राज्य मिट्टी में मिलते हैं। बुलडोजर सिर्फ तोड़ता नहीं, गरीबों के सपनों को बनाता भी है। यही है संन्यासी राजनेता का न्याय, जहां अपराधी का महल टूटता है और गरीब का घर खड़ा होता है।

* डीजीपी ऑफिस के सामने 2321 वर्गमीटर की शत्रु संपत्ति पर मुख्तार अंसारी ने बनवाया था आलीशान अवैध महल।
* 31 जनवरी 2020 को डीजीपी ओपी सिंह के रिटायरमेंट दिवस पर दौरे के दौरान योगी ने पहली बार उस भवन को देखा।
* लोक भवन पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को 24 घंटे में पूरी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
* जांच में खुलासा भूमि शत्रु संपत्ति, कब्जा फर्जी कागज़ों पर, निर्माण अत्यंत मजबूत आरसीसी संरचना का।
* अधिकारियों ने बुलडोजर चलाने में असमर्थता जताई, लेकिन योगी का आदेश स्पष्ट भवन ध्वस्त होगा, लागत अपराधी से वसूली जाएगी।
* मुख्तार अंसारी कोर्ट भागा, रात में सुनवाई हुई, लेकिन कुछ दिनों बाद सरकार ने कोर्ट को सूचित किया भवन गिराया जा चुका है।
* ध्वस्तीकरण के बाद एलडीए ने सरदार पटेल आवासीय योजना के तहत 72 ईडब्ल्यूएस फ्लैट का निर्माण शुरू किया।
* भगवा रंग के इन फ्लैटों की चाबियां मुख्यमंत्री ने स्वयं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सौंपीं।
* प्रयागराज में अतीक अहमद के अलीना सिटी, लूकरगंज और एयरपोर्ट रोड के अवैध साम्राज्य पर भी यही मॉडल लागू हुआ।
* न्यायपालिका में जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने 32 वर्षों में पहली बार मुख्तार को सजा सुनाई, लेकिन उनके स्थानांतरण ने कई सवाल खड़े किए।

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