वाराणसीउत्तर प्रदेश

सीपी मोहित अग्रवाल के कुशल पर्यवेक्षण में घटना का पर्दाफाश, गुनहगार चैन की नही ले पाएंगे सांस

डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार,डीसीपी क्राइम टी सरवणन , एडीसीपी नीतू कादियान एसीपी विजय प्रताप सिंह व सारनाथ थाना प्रभारी

  • विवेक शकंर त्रिपाठी का अथक प्रयास रंग लाया,अंततः आरोपियों को जिला कारागार पहुँचाया
  • सारनाथ थाना के अरिहंत नगर कॉलोनी में हुई हत्या का हुआ खुलासा
  • गाजीपुर के जोगेंद्र यादव ने कराई थी महेंद्र की हत्या
  • जोगेंद्र ने कारोवार में नुकसान के बाद शूटरों को दी सुपारी
  • गाजीपुर के बनारसी यादव ने हत्या के लिए उपलब्ध कराए शूटर
  • चार गिरफ्तार असलहा तस्कर मुठभेड़ के दौरान पैर में लगी गोली से घायल

वाराणसी। सारनाथ थाना क्षेत्र के अरिहंत नगर कॉलोनी में कालोनाइजर महेंद्र गौतम की दिनदहाड़े हत्या ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर सनसनी फैलाई, बल्कि इसके पीछे फैले आपराधिक नेटवर्क ने वाराणसी से लेकर गाजीपुर, मुंबई और यहां तक कि बिहार के मुंगेर तक अपने तार खोल दिए। कारोबारी वर्चस्व की होड़, करोड़ों के कर्ज और जमीन विवाद की जटिल पृष्ठभूमि से उपजी इस साजिश ने पूर्वांचल में अपराध और कारोबार के गहरे गठजोड़ को उजागर कर दिया। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की ‘रिजल्ट-ओरिएंटेड’ कार्यशैली के चलते पुलिस टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को सुलझा कर अपनी साख तो बचा ली, लेकिन फरार शूटरों की तलाश अब भी पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई है। बताते चलें कि पुलिस कमिश्नरेट में इन दिनों अपराध नियंत्रण को लेकर एक अलग तरह की होड़ मची हुई है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने जब से कमान संभाली है, तब से उनके अधीनस्थ अधिकारियों और टीमों में बेहतर प्रदर्शन दिखाने की प्रतियोगिता साफ देखी जा सकती है। हर बड़ी घटना को तुरंत सुलझाने, अपराधियों को पकड़ने और जनता के बीच अपनी साख बनाने की जद्दोजहद अब पुलिस के रोज़मर्रा के कामकाज का हिस्सा बन चुकी है। यही वजह है कि 21 अगस्त को सारनाथ थाना क्षेत्र के सिंहपुर अरिहंत नगर कॉलोनी में कालोनाइजर महेंद्र गौतम की दिनदहाड़े हुई हत्या ने पूरे महकमे को हिला दिया। पुलिस कमिश्नर की छवि पर सवाल उठाना आसान नहीं था, लिहाज़ा उनकी टीम ने इस मामले को ‘प्रतिष्ठा का प्रश्न’ बना लिया। यही वजह रही कि मात्र कुछ ही दिनों में पुलिस ने हत्या की परतें उधेड़ डालीं। मोहित अग्रवाल की कार्यशैली हमेशा से ही ‘रिजल्ट-ओरिएंटेड’ रही है। उनकी प्राथमिकता रही है कि हर बड़ी वारदात का जल्द से जल्द खुलासा हो, ताकि अपराधियों के हौसले पस्त हों और जनता का भरोसा बना रहे। इस हत्या कांड ने भी उनके सामने वही चुनौती रख दी थी।

 

सीपी मोहित अग्रवाल

 

सारनाथ के अरिहंत नगर में हुई सनसनीखेज हत्या का हुआ खुलासा

21 अगस्त की सुबह अरिहंत नगर कॉलोनी का माहौल अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। कालोनाइजर महेंद्र गौतम जब घर से बाहर निकले तो बाइक सवार तीन बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। महेंद्र वहीं ढेर हो गए। इलाके में भगदड़ मच गई। महेंद्र गौतम का नाम सारनाथ और आसपास की कॉलोनियों में जाना-पहचाना था। वे जमीन खरीद-बिक्री और कॉलोनाइजिंग के धंधे में सक्रिय थे। कारोबार में उनकी आक्रामक शैली जैसी छवि बनी हुई थी। यही कारण था कि उनके कई प्रतिद्वंद्वी भी खड़े हो चुके थे। 21 अगस्त को हत्या की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। इलाके के लोगों में भय का माहौल था कॉलोनाइजर को सरेआम गोली मार देना इस बात का सबूत था कि पुलिस कमिश्नर को अपराधी खुलेआम चुनौती देने का प्रयास करने लगे थे।

हत्या की जड़ें कारोबारी वर्चस्व और जमीन विवाद

पुलिस की शुरुआती जांच से ही साफ होने लगा कि इस हत्या की जड़ें गहरी कारोबारी रंजिश में छिपी हैं। गाजीपुर के कालोनाइजर जोगेंद्र यादव ने सिंहपुर की नौ बिस्वा जमीन का एग्रीमेंट संपूर्णानंद उर्फ चंदन शुक्ला से कराया था। लेकिन इस डील में रोड़े अटकाने लगे थे महेंद्र गौतम। जमीन पर नजर रखने वाले महेंद्र ने पहले भी जोगेंद्र के कई एग्रीमेंट्स में दखलंदाजी की थी और रास्ते का विवाद खड़ा कर उन्हें नुकसान पहुंचाया था। जोगेंद्र पहले से ही एक करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज में डूबा हुआ था। कारोबारी दबाव, प्रतिस्पर्धा और कर्ज की चुभन ने उसे मानसिक रूप से अस्थिर कर दिया। इसी बीच, संपूर्णानंद भी महेंद्र से नाराज चल रहा था। दोनों ने मिलकर तय किया कि अगर महेंद्र को रास्ते से हटा दिया जाए तो कारोबार सुचारू रूप से चलेगा। श्याम प्रकाश राजभर, जो खुद जमीन के कारोबार में अपना वर्चस्व जमाना चाहता था, इस साजिश में शामिल हो गया। उसे उम्मीद थी कि महेंद्र के हटते ही उसका रास्ता साफ हो जाएगा।

गाजीपुर से वाराणसी तक अपराध का ताना-बाना

योजना तैयार होते ही जोगेंद्र ने गाजीपुर के गौरहट गांव के कुख्यात अपराधी बनारसी यादव से संपर्क साधा। यही बनारसी यादव वाराणसी-गाजीपुर बेल्ट में सुपारी किलिंग और असलहा सप्लाई का कुख्यात नाम है। पांच लाख रुपये में सौदा तय हुआ। जोगेंद्र ने रकम उपलब्ध कराई और बनारसी यादव ने शूटरों की व्यवस्था कर दी। यह वही संगठित आपराधिक तंत्र था, जिसकी पकड़ पूर्वांचल में लंबे समय से गहरी जमी हुई है। योजना के तहत शूटरों की एक टीम बनाई गई। इनमें एक कुख्यात अपराधी ‘फौजी’ भी शामिल था, जिसने कई राज्यों में हत्या और लूट की वारदातें अंजाम दी थीं।

शूटरों की रेकी और वारदात का अंजाम

5 अगस्त को ‘फौजी’ नामक शूटर वाराणसी आया। उसने संपूर्णानंद के साथ मिलकर महेंद्र की गतिविधियों की बारीकी से रेकी की। 21 अगस्त की सुबह जैसे ही महेंद्र गौतम अपने घर से निकले, तीन बाइक सवार शूटरों ने उन्हें घेर लिया। ताबड़तोड़ फायरिंग से महेंद्र वहीं गिर पड़े। शूटर घटनास्थल से फरार हो गए और इलाके में सनसनी फैल गई। यह हत्या पूर्व नियोजित थी। हर कदम पहले से तय था। पुलिस के लिए चुनौती यह थी कि शूटरों के नेटवर्क तक पहुंचना आसान नहीं था।

कॉल डिटेल, सर्विलांस और खुलता रहस्य

हत्या के तुरंत बाद पुलिस कमिश्नर ने अपनी टीम को अलर्ट कर दिया। सबसे पहले मृतक महेंद्र के कॉल डिटेल निकाले गए। कई संदिग्ध नंबर सामने आए।सर्विलांस टीम ने इन नंबरों को ट्रैक करना शुरू किया। धीरे-धीरे यह खुलासा हुआ कि महेंद्र और जोगेंद्र के बीच लगातार विवाद चल रहा था। कॉल रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि जोगेंद्र की बातचीत कई अपराधियों से हो रही थी। जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ती गईं, पुलिस को यकीन हो गया कि यह महज कारोबारी विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सुपारी किलिंग है।

मुठभेड़ और गिरफ्तारी वाराणसी पुलिस का एक्शन

पुलिस टीम ने दबिश देना शुरू किया। एक छापेमारी के दौरान अपराधियों से मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में असलहा तस्कर के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। इसके अलावा तीन अन्य अपराधियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पूरा नेटवर्क सामने आ गया। वारदात की गुत्थी सुलझने के बाद पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने टीम को बधाई दी।

वाराणसी-गाजीपुर का अपराधी गठजोड़ और पुलिस की चुनौती

इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पूर्वांचल में कारोबार और अपराध का गठजोड़ कितना गहरा है। जमीन का धंधा, कॉलोनाइज़िंग और रियल एस्टेट की प्रतिस्पर्धा अक्सर खूनी टकराव में बदल जाती है। गाजीपुर से वाराणसी तक फैले अपराधी नेटवर्क का इस्तेमाल कारोबारियों द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करने के लिए किया जा रहा है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल की टीम ने जिस तेजी और कुशलता से इस हत्या कांड का पर्दाफाश किया, उसने पुलिस की साख को बचा लिया। लेकिन जब तक कारोबारी- अपराधी गठजोड़ को तोड़ा नहीं जाता, तब तक ऐसी वारदातें होती रहेंगी।

मुंबई से लेकर मुंगेर तक फैली साजिश की परछाई

सारनाथ थाना क्षेत्र में 21 अगस्त को कालोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। कारोबारी वर्चस्व और जमीन विवाद में रची गई इस साजिश का दायरा वाराणसी से निकलकर मुंबई और बिहार के मुंगेर तक फैला हुआ था। पुलिस ने साजिशकर्ता गाजीपुर के जोगेंद्र यादव सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फरार शूटरों की तलाश जारी है।

मोबाइल लोकेशन से मुंबई तक पहुंची पुलिस

डीसीपी प्रमोद कुमार के अनुसार, जब पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता जोगेंद्र यादव की मोबाइल लोकेशन ट्रेस की तो वह मुंबई में पाया गया। दबिश बढ़ने पर जोगेंद्र वाराणसी भाग आया। गुप्त सूचना पर सिंहपुर स्थित डंडन बाबा की कुटिया के पास से पुलिस ने उसे दबोच लिया।

कारोबारी साझेदार भी चढ़े हत्थे

जोगेंद्र से पूछताछ के बाद पुलिस ने जमीन विवाद में शामिल संपूर्णानंद उर्फ़ चंदन शुक्ला और श्याम प्रकाश राजभर को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने महेंद्र को रास्ते से हटाने के लिए जोगेंद्र की साजिश में साथ दिया।

मुंगेर कनेक्शन असलहा और एडवांस रकम

जांच के दौरान बिहार के मुंगेर निवासी मुकीम की संलिप्तता भी सामने आई। उसने हत्या के लिए शूटरों को 25 हजार रुपये एडवांस लिए और 50 हजार रुपये का अवैध असलहा उपलब्ध कराया। पुलिस के अनुसार, जब मुकीम बकाया रकम लेने पहुंचा, तभी घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया। मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से वह घायल हो गया। डीसीपी प्रमोद कुमार एसीपी सरवणन टी और एडीसीपी नीतू ने पूरी पुलिस टीम की सराहना की। टीम को प्रोत्साहित करने के लिए 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई है।

फरार शूटरों की तलाश जारी

हालांकि पुलिस ने साजिशकर्ताओं और असलहा सप्लायर को पकड़ लिया है, लेकिन वारदात को अंजाम देने वाले शूटर अभी भी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए वाराणसी और आसपास जिलों में दबिश दी जा रही है।

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