वाराणसी

सीपी मोहित अग्रवाल ने थामी गणतंत्र दिवस की कमान, नारी शक्ति इस बार रहेंगी परेड की शान

गणतंत्र की शान, महिला शशक्तिकरण की पहचान, महिला पुलिस बनेंगी गणतंत्र दिवस परेड की जान

● सीपी मोहित अग्रवाल ने थामी गणतंत्र दिवस की कमान, नारी शक्ति इस बार रहेंगी परेड की शान

● गणतंत्र की शान, महिला शशक्तिकरण की पहचान, महिला पुलिस बनेंगी गणतंत्र दिवस परेड की जान

● महिला कमांडो अनुशासन और साहस का प्रतीक

● स्कूटी दस्ता शहरी पुलिसिंग में नारी शक्ति

● घुड़सवार महिला बल परंपरा में आधुनिक नेतृत्व

● एसीपी मानसी दहिया नेतृत्व की नई तस्वीर

● पुलिस आयुक्त का संदेश परेड नहीं

● नुक्कड़ नाटक और प्रदर्शनी संविधान की बात जन-जन तक

● सुरक्षा व्यवस्था हर चुनौती से निपटने की तैयारी

 

आशुतोष शर्मा

वाराणसी। गणतंत्र दिवस केवल एक सरकारी रस्म या झंडारोहण का दिन भर नहीं होता, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक चेतना का उत्सव है, जिसमें संविधान की आत्मा, समानता का अधिकार और नागरिक सम्मान निहित होता है। इस वर्ष काशी में यह उत्सव एक नए और ऐतिहासिक संदेश नारी शक्ति, अनुशासन और नेतृत्व के साथ सामने आ रहा है। पुलिस लाइन्स में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड 2026 पूरी तरह महिला सशक्तिकरण और मिशन शक्ति की भावना को समर्पित होगी, जहां सुरक्षा, अनुशासन और नेतृत्व तीनों की बागडोर महिला पुलिसकर्मियों के हाथों में होगी। जब पूरा देश महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को लेकर बहस कर रहा है, उसी समय वाराणसी पुलिस एक सशक्त उदाहरण पेश कर रही है। परेड में मार्चपास्ट की सभी टोलियां महिला पुलिसकर्मियों की होंगी। महिला कमांडो दस्ता, स्कूटी दस्ता और घुड़सवार महिला बल न केवल परेड की शोभा बढ़ाएंगे, बल्कि यह संदेश भी देंगे कि अब सुरक्षा व्यवस्था पुरुषों तक सीमित नहीं रही। यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वर्षों के प्रशिक्षण, संघर्ष और आत्मविश्वास का परिणाम है। इस ऐतिहासिक परेड की कमान सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मानसी दहिया संभालेंगी। यह तथ्य अपने आप में इस बात का संकेत है कि यूपी पुलिस में महिलाएं अब केवल सहयोगी भूमिका में नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका में आगे बढ़ रही हैं। एसीपी मानसी दहिया के नेतृत्व में महिला टुकड़ियां जिस अनुशासन और समरूपता के साथ अभ्यास कर रही हैं, वह आने वाले गणतंत्र दिवस को यादगार बनाने की तैयारी है। परेड की इन तैयारियों का शुक्रवार को पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने स्वयं निरीक्षण किया। कड़ाके की ठंड और लंबे अभ्यास सत्रों के बीच पसीना बहाते पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्होंने साफ कहा कि यह परेड केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देने का माध्यम है कि महिला सशक्तिकरण अब नारे से आगे बढ़कर जमीनी हकीकत बन चुका है। पुलिस आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान अनुशासन, टर्नआउट, आचरण, कदमताल की एकरूपता और आपसी समन्वय पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि परेड में हर कदम आत्मविश्वास, गरिमा और पेशेवर उत्कृष्टता का परिचायक होना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि परेड देखने वाली हर आंख में यह भरोसा झलके कि प्रदेश की सुरक्षा मजबूत और संवेदनशील हाथों में है। केवल परेड ही नहीं, बल्कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी महिला सशक्तिकरण और देशभक्ति के संदेश से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। नुक्कड़ नाटक, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह बताने की कोशिश होगी कि संविधान ने महिलाओं को जो अधिकार दिए हैं, उन्हें व्यवहार में कैसे उतारा जा रहा है। यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस व्यवस्था को जवाब देता है, जो अक्सर महिला सशक्तिकरण को केवल भाषणों तक सीमित रखती है। वाराणसी में होने जा रही यह परेड दिखाती है कि जब नीति, नेतृत्व और नीयत एक साथ हों, तो बदलाव सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि मैदान में कदमताल करता दिखाई देता है।

महिला पुलिस की ऐतिहासिक परेड परंपरा से परिवर्तन की ओर

पुलिस लाइन्स में इन दिनों सुबह से शाम तक अनुशासन की गूंज सुनाई दे रही है। कदमताल की आवाज, कमांड की स्पष्ट पुकार और एक समान चाल यह सब उस मेहनत की कहानी कह रहे हैं, जो गणतंत्र दिवस परेड को भव्य और अर्थपूर्ण बनाने के लिए की जा रही है। इस वर्ष खास बात यह है कि परेड की हर टुकड़ी महिला पुलिसकर्मियों की होगी। महिला कमांडो दस्ता अपनी फुर्ती और सटीकता से यह साबित कर रहा है कि वे किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम हैं। स्कूटी दस्ता शहरी पुलिसिंग में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, वहीं घुड़सवार महिला बल परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक बनेगा।

एसीपी मानसी दहिया नेतृत्व की नई पहचान

एसीपी मानसी दहिया का परेड कमांडर होना महज संयोग नहीं, बल्कि योग्यता और नेतृत्व क्षमता की पहचान है। उन्होंने परेड अभ्यास के दौरान बार-बार अनुशासन, एकरूपता और आत्मविश्वास पर जोर दिया। महिला पुलिसकर्मियों के लिए यह केवल परेड नहीं, बल्कि अपनी पहचान और क्षमता को सार्वजनिक मंच पर साबित करने का अवसर है।

पुलिस आयुक्त का निरीक्षण सख्ती के साथ संवेदनशीलता

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट कहा कि परेड में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अनुशासन का मतलब कठोरता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और आत्म-सम्मान है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महिला पुलिसकर्मी को यह महसूस होना चाहिए कि वह केवल परेड का हिस्सा नहीं, बल्कि बदलाव की प्रतिनिधि है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और जन-जागरूकता

गणतंत्र दिवस पर केवल मार्च पास्ट ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजन का अहम हिस्सा होंगे। नुक्कड़ नाटक महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार और सम्मान के मुद्दों को उठाएंगे। प्रदर्शनी के माध्यम से पुलिस की उपलब्धियों और मिशन शक्ति के तहत किए गए कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा।

सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन

पुलिस आयुक्त ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सतत निगरानी, प्रभावी यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण पर विशेष फोकस रहेगा। हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। यह परेड सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं है। सवाल यह है कि क्या महिला सशक्तिकरण इसी तरह साल भर व्यवस्था का हिस्सा बनेगा? वाराणसी पुलिस की यह पहल उम्मीद जगाती है कि जवाब हां में होगा।

* पूरी परेड महिला पुलिसकर्मियों द्वारा
* एसीपी मानसी दहिया करेंगी परेड का नेतृत्व
* मिशन शक्ति और महिला सशक्तिकरण थीम
* पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने किया निरीक्षण
* सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महिला अधिकारों पर फोकस
* सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन पर विशेष तैयारी

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