वाराणसी

हौसले, अनुशासन और बेटियों की जीत: काशी की तीन सगी बहनों ने किक बॉक्सिंग में जीता ब्लैक बेल्ट, बनीं मिसाल

काशी की धरती से निकली बेटियों की ऐतिहासिक सफलता

● हौसले, अनुशासन और बेटियों की जीत: काशी की तीन सगी बहनों ने किक बॉक्सिंग में जीता ब्लैक बेल्ट, बनीं मिसाल

● काशी की धरती से निकली बेटियों की ऐतिहासिक सफलता

● तीन सगी बहनों का एक साथ ब्लैक बेल्ट जीतना बना प्रेरक उदाहरण

● उत्तर प्रदेश किक बॉक्सिंग संघ की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन

● तीन वर्षों की कठोर साधना का मिला सुनहरा परिणाम

● पिता खालिद अंसारी का संकल्प और समर्थन बना सफलता की नींव

● बेटियों की उड़ान ने तोड़ी सामाजिक रूढ़ियां

● राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का खुला रास्ता
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का जीवंत उदाहरण बनीं अंसारी बहनें

 

अंशिका मौर्या

वाराणसी। काशी को अक्सर आध्यात्म, परंपरा और संस्कृति की नगरी के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसी काशी की गलियों से अब बेटियों की वह नई तस्वीर उभर रही है, जो आत्मरक्षा, खेल और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने का साहस रखती है। उत्तर प्रदेश किक बॉक्सिंग संघ के तत्वावधान में आयोजित कलर बेल्ट एवं ब्लैक बेल्ट परीक्षा में काशी की तीन सगी बहनों—नायला सुरूर अंसारी, मरजान अंसारी और यूसरा अंसारी ने ब्लैक बेल्ट हासिल कर न सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि दर्ज की, बल्कि पूरे समाज के सामने एक मजबूत संदेश भी रखा। यह सफलता सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस सोच की जीत है, जो बेटियों को कमजोर नहीं, बल्कि सक्षम, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी देखना चाहती है। जिस समाज में आज भी बेटियों की पढ़ाई, खेल और स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठते हैं, वहां तीन सगी बहनों का एक साथ ब्लैक बेल्ट हासिल करना किसी आंदोलन से कम नहीं है। परीक्षा में प्रदेश भर से लगभग 30 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश किक बॉक्सिंग संघ द्वारा किया गया, जो उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ से मान्यता प्राप्त संस्था है। परीक्षा के मुख्य परीक्षक एमेच्योर किक बॉक्सिंग इंडिया संघ के संस्थापक अनुराग श्रीवास्तव रहे। उनके साथ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं तकनीकी निदेशक संतोष कुमार राय की देखरेख में यह परीक्षा पूरी पारदर्शिता और तकनीकी मानकों के साथ संपन्न हुई। पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक और प्रेरणादायक पहलू अंसारी परिवार की तीन बेटियों की ऐतिहासिक उपलब्धि रही। तीन वर्षों की निरंतर साधना, अनुशासन और कठोर अभ्यास ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज वे ब्लैक बेल्ट पहनकर गर्व से खड़ी हैं।
यह कहानी सिर्फ मेडल और बेल्ट की नहीं है, यह कहानी है एक पिता के विश्वास, एक परिवार के समर्थन और बेटियों के अटूट हौसले की है।

प्रदेश स्तरीय परीक्षा, राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आयोजन

उत्तर प्रदेश किक बॉक्सिंग संघ द्वारा आयोजित यह परीक्षा पूरी तरह से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संपन्न हुई। परीक्षा में खिलाड़ियों की तकनीक, स्टैमिना, अनुशासन, फाइटिंग स्किल और आत्मरक्षा क्षमता का बारीकी से मूल्यांकन किया गया। मुख्य परीक्षक अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि किक बॉक्सिंग केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मरक्षा, मानसिक संतुलन और अनुशासन का संपूर्ण प्रशिक्षण है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से निकल रहे खिलाड़ी अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

तीन बहनें, एक सपना और तीन साल का संघर्ष

नायला, मरजान और यूसरा तीनों बहनों ने लगभग तीन वर्ष पूर्व किक बॉक्सिंग का प्रशिक्षण शुरू किया था। शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी, सामाजिक सवाल और नियमित अभ्यास की कठिनाइयां सामने आईं, लेकिन तीनों ने हार नहीं मानी। कोच संतोष कुमार राय बताते हैं कि इन बहनों में शुरू से ही सीखने की ललक और अनुशासन देखने को मिला। सुबह की ट्रेनिंग से लेकर शाम के अभ्यास तक, तीनों बहनें कभी भी शॉर्टकट के रास्ते पर नहीं चलीं।

पिता का संकल्प बना सबसे मजबूत कवच

इनकी सफलता के पीछे सबसे मजबूत भूमिका इनके पिता खालिद अंसारी की रही। एक ऐसे समाज में, जहां बेटियों को खेल के मैदान तक भेजना आज भी चुनौती माना जाता है, खालिद अंसारी ने न सिर्फ अपनी बेटियों को प्रशिक्षण दिलाया, बल्कि हर कदम पर उनका हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने की जरूरत है।

कोच का भरोसा, भविष्य की उड़ान

कोच संतोष कुमार राय ने विश्वास जताया कि यदि ये खिलाड़ी इसी अनुशासन और समर्पण के साथ आगे बढ़ती रहीं, तो वह दिन दूर नहीं जब ये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

सामाजिक संदेश बेटियां बोझ नहीं, शक्ति

कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि समाज को ऐसे माता-पिता से सीख लेनी चाहिए, जो बेटियों को सीमाओं में नहीं, संभावनाओं में देखते हैं। तीनों बहनों की सफलता उन तमाम परिवारों के लिए जवाब है, जो आज भी बेटियों की क्षमताओं पर संदेह करते हैं।

काशी से उठी प्रेरणा की लहर

इस उपलब्धि के बाद काशी के खेल जगत में एक नई ऊर्जा देखने को मिली है। स्थानीय खिलाड़ियों और अभिभावकों में बेटियों को आत्मरक्षा और खेल प्रशिक्षण दिलाने की रुचि बढ़ी है।

* उत्तर प्रदेश किक बॉक्सिंग संघ द्वारा परीक्षा का सफल आयोजन
* लगभग 30 परीक्षार्थियों ने लिया भाग
* तकनीकी देखरेख अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संतोष कुमार राय
* नायला, मरजान और यूसरा अंसारी ने एक साथ ब्लैक बेल्ट जीता
* तीन वर्षों की निरंतर ट्रेनिंग का परिणाम
* पिता खालिद अंसारी की भूमिका रही निर्णायक
* बेटियों की सफलता ने सामाजिक सोच को दी नई दिशा

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