वाराणसी

पुलिसिया उत्पीड़न पर अधिवक्ताओं का न्यायिक बहिष्कार, पुलिस आयुक्त व जिलाधिकारी कार्यालय पर किया प्रदर्शन

अमित मौर्या, अचूक संघर्ष

~ पुलिस का अत्याचार नाकाबिले बर्दाश्त-मंगलेश कुमार दुबे

~ अधिवक्ताओं के उत्पीड़न से बाज आये पुलिस प्रशासन-अनुज यादव

~ अपने साथी पर एफआईआर दर्ज होने के बाद नाराज अधिवक्ता बन्धुओ ने पुलिस आयुक्त कार्यालय व जिलाधिकारी कार्यालय पर किया प्रदर्शन

~ पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने एसआईटी गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का दिया आश्वासन

 

 

वाराणसी। कचहरी परिसर बुधवार को एक बार फिर अधिवक्ता आंदोलन का केंद्र बना रहा। लालपुर चौकी पर अधिवक्ता अरविंद वर्मा के साथ हुई मारपीट और उसके बाद पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे ने अधिवक्ताओं में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। वहीं, कलेक्ट्रेट परिसर से डाकघर को यूपी कॉलेज स्थानांतरित किए जाने की योजना ने आक्रोश को और हवा दी।

सुबह सेंट्रल बार एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राजस्व न्यायालयों में पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहा जाएगा। इसके बाद सैकड़ों अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालते हुए नारेबाजी की और पुलिस कमिश्नर कार्यालय की ओर कूच किया।

अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल से मुलाकात कर दो प्रमुख मांगें रखीं — पहला, अधिवक्ता अरविंद वर्मा के खिलाफ दर्ज मुकदमे को तत्काल रद्द (स्पंज) किया जाए, और दूसरा, मामले की निष्पक्ष जांच हो। पुलिस कमिश्नर ने उन्हें आश्वस्त किया कि एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाएगा, और यदि अधिवक्ता पर कोई स्पष्ट दोष नहीं पाया गया तो केस निरस्त कर दिया जाएगा।

बता दें कि यह मामला तब शुरू हुआ जब बीते रविवार को अधिवक्ता अरविंद वर्मा जमीन विवाद की शिकायत लेकर लालपुर चौकी पहुंचे थे, जहां कथित रूप से चौकी प्रभारी आदित्य सेन सिंह ने उनके साथ हाथापाई की। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस पर दबाव बढ़ा और चौकी प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया। इसके बाद अधिवक्ता की तहरीर पर प्रभारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया। मगर मंगलवार को चौकी प्रभारी ने पलटवार करते हुए अधिवक्ता पर भी सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी।

 

वहीं आंदोलन का दूसरा बिंदु बना कलेक्ट्रेट परिसर से डाकघर का प्रस्तावित स्थानांतरण, जिसे लेकर अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया। अधिवक्ताओं ने डाकघर को यूपी कॉलेज स्थानांतरित किए जाने का कड़ा विरोध जताया और कचहरी में ही उसे बनाए रखने की मांग की। जिलाधिकारी ने मांगों को गंभीरता से लेते हुए भरोसा दिया कि डाकघर को कहीं और स्थानांतरित नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो उसका विस्तार यहीं किया जाएगा।

इस पूरे विरोध प्रदर्शन में सेंट्रल बार अध्यक्ष मंगलेश दूबे, महामंत्री राजेश गुप्ता, अनुज यादव, डीएन यादव, विनोद शुक्ला, शशिकांत दूबे, रंजन मिश्रा, अनूप सिंह, आशीष सिंह, पंकज उपाध्याय, राहुल श्रीवास्तव, रोहित मौर्या, शाहनवाज खान, सत्यप्रकाश सुनील, सुधांशु मिश्रा, गौतम झा सहित दर्जनों अधिवक्ता शामिल रहे।

इस घटना ने पुलिस और अधिवक्ता वर्ग के बीच तनाव को सतह पर ला दिया है। अधिवक्ताओं का साफ कहना है कि वे न्याय की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेंगे। अब सबकी निगाहें SIT जांच और पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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