
~ जिला आबकारी अधिकारी की भूमिका पर क्यो न उठे सवाल ?पट्ठा गांजे से जमकर कमा रहा माल
~ अधिकारियों के संग बैठककर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का निर्देश देते रहते है,मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री
~ एसपी के लाख सख्ती के बाद भी चन्दौली बनता जा रहा है तस्करों का हब
~ भांग की दुकान की आड़ में खुलेआम होती है गांजे की बिक्री
~ चेकिंग अभियान में आये दिन विभिन्न स्थानों से पकड़े जाते है मादक पदार्थ के तस्कर
~ नशाखोरी के दलदल में फसते जा रहे है,युवा पीढ़ी
नरेंद्र गुप्ता
चन्दौली (उ०प्र०)। आप लोग बड़े बुजुर्गों से एक पुरानी कहावत तो सुने होंगे कि जब सईया भये कोतवाल तो डर काहे का। कुछ इसी चरित्रचार्थ पर वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश का उत्तम जिला चंदौली चलता हुआ नजर आ रहा है। जी हाँ उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ व उनके मंत्री भले ही उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाये जाने के लिये वक्त बे वक्त प्रदेश के विभिन्न आला अधिकारियों के संग बैठककर प्रदेश में कानून व्यवस्था एवं मादक पदार्थ तस्करी पर लगाम लगाने को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी करते रहते है और शिकायत पर अधिकारियों को फटकार भी लगाते रहते है। ताकि प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज्य स्थापित हो सके और विभिन्न मादक पदार्थ के तस्करी पर लगाम लगाई जा सके। लेकिन मंत्रियो व उच्चाधिकारियों के द्वारा फटकार मिलने के बाद भी कुछ जनपद के अधिकारियों के सेहत पर कोई विशेष फर्क नही पड़ता नजर आ रहा है। यूपी बिहार प्रांत से सटे जनपद चंदौली वर्तमान समय में विभिन्न मादक पदार्थ के तस्कर काफी सक्रिय है या फिर यूँ कह लें की चंदौली विभिन्न तस्करों का हब बनता दिखाई पड़ रहा है। उसके बाद भी संबधित विभाग के अधिकारी पूर्ण तरीके से बेखबर बने हुये नजर आ रहे है।

आबकारी विभाग के डुलमूल रवैया के कारण जनपद में बिक रहे है खुलेआम मादक पदार्थ
यूपी बिहार प्रान्त से सटे जनपद चंदौली के विभिन्न स्थानों पर वर्तमान समय में आप को खुलेआम मादक पदार्थ मिल जायेगे। सूत्र बताते हैं कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, पड़ाव, दुल्हीपुर, अलीनगर, सकडीहा, चंदौली, चकिया धानापुर सहित जनपद के विभिन्न स्थानों पर गांजा खरीदे व बेचे जाते है और जिन-जिन स्थानों सरकारी मांग की दुकान है वहाँ-वहाँ अपवाद को छोड़ कर बाकि सभी जगहों पर खुलेआम गांजा की बिक्री हो रही है। लोग अपनी तलब को मिटाने के लिये देर रात्रि तक जाकर खरीददारी कर अपनी तलब पुरा करते है।
सरकारी भांग की दुकान की आड़ में खुलेआम होते है गांजा की बिक्री
सूत्र बताते है कि जिन-जिन लोगो सरकारी भांग की दुकान का लायसेंस बनवा रखे है।वे खुलेआम प्रतिबधित मादक पदार्थों का बिक्री करते है।लेकिन जनपद में कई स्थानों पर चोरी चुपके गांजा की बिक्री की जाती है। सूत्र बताते हैं कि इस धंधे में कई महिलाएं व कई पुरुष भी शामिल है। जो कि डीडीयू नगर सहित अन्य विभिन्न स्थानो पर घूम -घूम कर गांजा बिक्री किया करते है।
युवा पीढ़ी भी फंसते जा रहे है नशाखोरी के दलदल में
स्थानीय लोगो का माने तो विभिन्न सरकारी भांग की दुकानों पर सुबह से लेकर देर रात्रि तक गांजा खरीदने वाले का आवागमन होता है। ये दुकानदार इतने शातिर होते है कि कम मात्रा में ही पुड़िया बनाकर दुकानों पर गांजा रखते है और जैसे ही स्टाक समाप्त होने वाले होते है। वैसे दुकानदार व्हाट्सएप कर दुकान पर गांजे की स्टाक मंगवा लेते है। ताकि खुदा न खास्ता अगर कोई छापेमारी भी हो जाय तो कार्रवाई से बचा जा सके।
आगे सूत्र बताते है कि जो पुराने कस्टर हो चूके है। उन्हें मात्र खड़े होते ये दुकानदार समझ जाते है और बिना कुछ बोले ही पुड़िया पकड़ा देते है और ग्राहक भी पैसे रखकर चल देता है। स्थानीय लोगो का कहना है कि कुछ स्कूलों व कॉलेज और कम उम्र के बच्चे नशाखोरी इस दलदल में फसते जा रहे है।
डीएसपी त्रिपुरारी पाण्डेय साधू बनकर पहुंचे थे गांजा खरीदने, किये थे सरकारी भांग की दुकान का भंडाफोड़
कभी चंदौली सदर में डीएसपी त्रिपुरारी पाण्डेय (वर्तमान समय में दिगवंत) विभिन्न तस्करों व गलत कार्य करने वालों के बीच आतंक का पर्याय के रूप में जाने जाते है और गरीबों के बीच मसीहा के नाम से जाने जाते थे।सूत्र बताते है कि वे जब सदर में शायद उस वक्त डीएसपी थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने अलीनगर क्षेत्र में भाँग की दुकान पर अवैध तरीके से गांजा बिक्री की सूचना मिलने पर एक दिन बिना किसी से कुछ बोले सच्चाई की तह तक जाने के लिये के लिए पहुंच गए साधु की भेष बनाकर अलीनगर में स्थित एक सरकारी भांग की दुकान पर पहुंचकर गये और दुकानदार से रूपये देते हुये गांजा की डिमांग कर दिये।गांजा की खरीदारी व कुछ प्रारंभिक जानकारी जुटाने के बाद डीएसपी साहब अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को फोनकर बुला लिये और दुकानदार को पकड़ने का निर्देश जारी कर दिये। चूंकि डीएसपी त्रिपुरारी पाण्डेय साधु के भेष में थे। इसलिये पुलिस वाले भी पहचान नही सके। लेकिन पूरा परिचय बताने के बाद पुलिस दुकान दार को पकड़ ले गयी।
जनपद में खुलेआम बिक रहे अवैध तरीके से मादक पदार्थ, आबकारी विभाग अंजान या है मेहरबान
जिस प्रकार डीडीयू नगर व अलीनगर सहित जनपद के विभिन्न कम्पोटित शराब से ट्रेनों से खुलेआम ट्रेनों व विभिन्न संसाधन से शराब माफिया शराब की खेप बिहार ले जा रहे थे। लेकिन अबकारी विभाग के अधिकारी शायद ही कोई शराब तस्करों व केरियर बॉय को पकडकर कार्रवाई की हो।सूत्र बताते है कि शराब तस्करों के द्वारा शराब की खेप बिहार ले जाने से दुकानदारो को काफी फायदे होते है तो वही दूसरी तरफ अबकारी विभाग को भी कुछ हिस्सा मिल जाते है।जिसके कारण अबकारी विभाग पुरे प्रकरण में चुप्पी साधे रहती है।सूत्र बताते है कि ठीक उसी प्रकार जनपद में बिक रहे विभिन्न स्थानों पर अवैध तरिके से गांजे में भी शायद कुछ हिस्सा अबकारी विभाग के अधिकारियों के पास पहुंच जाते होंगे।शायद यही कारण है कि अब तक नशे के इन कारोबारियो खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नही हुई।
जनपद में जमकर फलफुल रहे है स्मैक के कारोबार
चंदौली जनपद में वर्तमान समय जिस प्रकार क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर गांजा की बिक्री खुलेआम हो रहे है सूत्र बताते है कि ठीक उसी प्रकार डीडीयू नगर व अलीनगर और चंदौली के कुछ स्थानों पर स्मैक के कारोबार भी जमकर हो रहे है।ये बात दिगर है कि जनपद में खुलेआम गांजे की बिक्री हो रही है।उस प्रकार स्मैक नही मिल रहे है।सूत्र बताते है कि यदि स्मैक की बिक्री करने वाले बड़े ही शातिर होते है।ये हर कदम फुक-फुक कर रखते है। सूत्र बताते है कि इन स्नैक बेचने वाले के पास अगर कोई नया चेहरा स्मैक खरीदने जाता है तो उसे पुलिस का मुखबिर या पुलिस वाला समझकर स्मैक देने से मना कर देते है लेकिन वह किसी पुराने कस्टमर के साथ जाता है तो उसे उपलब्ध हो जाता है।
क्या आबकारी विभाग के संग क्षेत्रीय पुलिस भी हिस्सेदार?
सूत्र बताते है कि एक तरफ विभिन्न अवैध मादक पदार्थ बेचने वालों पर जिस प्रकार आबकारी विभाग मेहरबान है।ठीक उसी प्रकार क्षेत्रीय पुलिस भी मादक पदार्थ बेचने वाले पर अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखती है।सूत्र बताते है कि डीडीयू नगर व अलीनगर से शराब की खेप ट्रेन व रोड़ मार्ग से बिहार जाने की जानकारी पूर्व से कुछ कर्मचारियों को भली भाति थी।लेकिन किसी ने भी इस पर लगाम लगाने की जद्दोजहद नही उठाई।ठीक उसी प्रकार जनपद में मादक पदार्थ के बिक्री पर कोई जद्दोजहद उठाने का प्रयास नही करता।
चेकिंग के दौरान तस्कर चढ़ जाते है पुलिस के हत्थे
आप को बताते चले कि जनपद में विभिन्न स्थानों पर किये गये चेकिंग अभियान में यदाकदा विभिन्न तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़ जाते है। अब तक जितनी भी तस्कर पकड़े गए है। तस्करों से पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चलता है कि मादक पदार्थ का खेप ज्यादातर बिहार से लेकर बिक्री करने के लिए मादक पदार्थ की खेप यूपी लेकर आए हुए थे। अब प्रश्न ये उठ रहे है,कि तस्कर के द्वारा अगर यदि बताया जा रहा है कि बिहार से मादक पदार्थ की खेप उक्त स्थान पर बिक्री करने के लिये जा रहे थे तो फिर पुलिस उस व्यक्ति पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जो मादक पदार्थ की खेप बिहार से उत्तर प्रदेश में मंगवाकर बिक्री किया करता है।




