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विश्वगुरु के शासन में दुनियां के टॉप 75 शहरों में देश की किसी शहर का नही है नाम

भारत का कोई भी शहर दुनिया के टॉप 75 सबसे सुरक्षित शहरों में क्यों नहीं है?

अचूक संघर्ष डेस्क

 

हाल ही में जारी मिड-ईयर 2025 की न्यूमबियो सेफ्टी इंडेक्स रिपोर्ट ने एक बार फिर दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों की सूची जारी की है, जिसमें अबू धाबी को लगातार नौवीं बार पहला स्थान मिला है। 88.8 के सेफ्टी इंडेक्स के साथ अबू धाबी दुनिया का सबसे सुरक्षित शहर घोषित किया गया है। इसके बाद क्रमशः दोहा (कतर), दुबई (UAE), शारजाह (UAE) और ताइपे (ताइवान) शीर्ष 5 में शामिल हैं।

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दुनिया के टॉप 10 सबसे सुरक्षित शहरों में से 6 शहर इस्लामिक देशों में स्थित हैं — अबू धाबी, दोहा, दुबई, शारजाह, मक्का और मस्कट। यह उन तमाम पूर्वग्रहों को खारिज करता है जो इस्लामिक देशों को असुरक्षा या अस्थिरता से जोड़ते हैं। इन शहरों में न सिर्फ कानून व्यवस्था बेहतर है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में अनुशासन, तकनीकी निगरानी और नागरिकों की भागीदारी भी उच्च स्तर की है।

इस रिपोर्ट में कुल 279 शहरों को शामिल किया गया था, जिनमें भारत के 12 शहर भी मौजूद हैं। लेकिन दुखद सच यह है कि दुनिया के टॉप 75 सबसे सुरक्षित शहरों में भारत का एक भी शहर शामिल नहीं है। भारत का सबसे सुरक्षित शहर माने जाने वाला अहमदाबाद, इस सूची में 77वें स्थान पर है, और उसका सेफ्टी इंडेक्स केवल 68.6 है।

यह तथ्य चिंता पैदा करता है कि एक अरब चालीस करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में, जहां विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पाई जाती है, वहाँ का कोई भी शहर टॉप 75 में नहीं आता। जबकि संयुक्त अरब अमीरात जैसे छोटे देश के तीन-तीन शहर — अबू धाबी, दुबई और शारजाह — शीर्ष 5 में शामिल हैं।

भारत के अन्य शहरों का प्रदर्शन और भी अधिक चिंताजनक है। जयपुर 96वें स्थान पर है, कानपुर 112वें, चेन्नई 123वें, पुणे 129वें और हैदराबाद 139वें पर है। दिल्ली जैसे भारत की राजधानी शहर को 234वां स्थान मिला है, और उसका सेफ्टी इंडेक्स महज़ 41.0 है — जो साफ दर्शाता है कि भारत के महानगरों में कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा की हालत गंभीर है।

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