डीडीयू नगर में ‘भांग’ का नकाब, गांजे का शबाब, आबकारी विभाग बना वसूली का नवाब

- गांजा तस्करों पर मेहरबान आबकारी इंस्पेक्टर!
- डीडीयू में भांग की आड़ में चल रहा नशे का कारोबार
- आबकारी विभाग की मिलीभगत से सरेआम गांजा बिक्री जोरों पर
- कानून व्यवस्था का उड़ रहा मजाक!
चंदौली। जिले के डीडीयू नगर में नशे का कारोबार भांग की दुकानों की आड़ में खुलकर फल-फूल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग, खासकर नगर में तैनात इंस्पेक्टर, गांजा तस्करों के संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। हर महीने की तयशुदा वसूली के बदले कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने वालों के हमदर्द बन गए हैं, और युवा पीढ़ी तेजी से नशे के जाल में फंस रही है।


आबकारी विभाग की ‘सांठगांठ’ पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डीडीयू नगर में तैनात आबकारी इंस्पेक्टर खुद गांजा तस्करों पर मेहरबान हैं। हर महीने गांजा बेचने वालों से बंधी-बधाई वसूली की जाती है जिसके बदले उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। यही वजह है कि भांग की दुकानों के बगल में गांजे की बिक्री का धंधा पूरी निर्भीकता के साथ संचालित हो रहा है।
भांग की दुकान गांजे का अड्डा
नगर के खोवा मंडी, गोधना मोड़, लाखापुर, अलीनगर, पड़ाव और मन्नापुर चौराहा जैसे इलाकों में भांग की दुकानों के बगल में खुलेआम गांजे की बिक्री हो रही है।
सरगना सक्रिय, अधिकारी निष्क्रिय
कुछ कुख्यात सरगना इस धंधे को चला रहे हैं, जिनके नाम सबको मालूम हैं, लेकिन प्रशासनिक संरक्षण के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता।
कानून की धज्जियां, व्यवस्था का मजाक
गांजा एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित है, लेकिन डीडीयू नगर में यह दिन-दहाड़े बिक रहा है। प्रशासन की चुप्पी कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
शिकायतें दबी, कार्रवाई गायब
स्थानीय लोगों ने कई बार जिला प्रशासन और पुलिस से शिकायत की, लेकिन परिणाम सिर्फ खानापूर्ति की औपचारिकता तक सीमित रहा।
युवाओं पर नशे का शिकंजा
गांजे की आसान उपलब्धता ने युवाओं को तेजी से लत की ओर धकेल दिया है। नशे की गिरफ्त में आकर वे अपराध की राह पर भी बढ़ रहे हैं।
भ्रष्टाचार का सुरक्षा कवच
हर दुकान से ‘महीना’ वसूली के चलते आबकारी विभाग और पुलिस इस पूरे नेटवर्क के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे हैं।
जनाक्रोश और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि डीडीयू नगर को नशे के कारोबार से मुक्त कराया जा सके।
सरगना वसूली कर रहे, अधिकारी मौन सहमति में
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुछ सरगना किस्म के व्यक्ति, जिनके नाम सबको मालूम हैं लेकिन डर के मारे कोई खुलकर नहीं बोलता। इनका पूरा नेटवर्क आबकारी विभाग के संरक्षण में चल रहा है। सूत्रों की मानें तो डीडीयू नगर की आबकारी इंस्पेक्टर को हर दुकान से महीना पहुंचता है, इसलिए किसी पर कोई कार्यवाही नहीं होती।
युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में
गांजे की खुलेआम बिक्री से डीडीयू नगर के युवा बड़ी तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। नशे की इस आदत से जहां सामाजिक बुराइयां जन्म ले रही हैं, वहीं अपराध का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि उच्चाधिकारियों द्वारा विशेष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि डीडीयू नगर को नशे के इस जाल से बचाया जा सके।




